‘आ जाओ, खाना मेज पर लगा दिया है। तुम लोगों का पसंदीदा चीजी पास्ता बनाया है।’ मम्मी ने जैसे ही यह कहा, जानी और पीटर अपने वीडियो गेम छोड़ कर डाइनिंग हाल की ओर भागे। ‘लगता है माम, आज आपका दिन बहुत ही व्यस्त गया, या फिर किसी अपराधी से सामना हुआ है जिसके कारण आप थकी हुई हैं। वरना डिनर में पास्ता?’ हैरानी से जानी ने कहा। ‘बिलकुल सही कह रहे हो तुम जानी, वरना पास्ता के लिए हमें कितना मनाना पड़ता है मम्मी को। उनके हिसाब से यह अस्वास्थ्यकर जो है’।’ पीटर ने हंसते हुए कहा और प्लेट में पास्ता डालने लगा।

‘तुम दोनों बहुत शरारती हो गए हो,’ पापा ने घर में घुसते हुए कहा। ‘पापा, शरारत बच्चे नहीं करेंगे तो कौन करेगा? वैसे भी जिनके पापा जासूस हों और मम्मी इंस्पेक्टर उनके अंदर समझदारी के गुण न आएं, ऐसा संभव ही नहीं है।’ पीटर की बात सुन कर हेनरी डिकोस्टा और रोजी डिकोस्टा मुस्कुरा उठे। इसमें कोई शक नहीं था कि उनके ये जुड़वां बेटे बहुत समझदार थे। हेनरी डिकोस्टा एक निजी कंपनीमें जासूस थे और रात के खाने पर वे चारों अपने-अपने दिन के किस्से सुनाते थे। मम्मी-पापा जो भी मामले या अपराध के बारे में बात करते, उसमें दोनों भाई भी अपनी राय देते। कई बार तो उन्होंने उन्हें सुलझाने में मदद भी की थी।

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‘विज्ञान के शिक्षक मुझसे इतने प्रभावित हैं कि उन्होंने मुझसे आज कहा कि एक दिन अवश्य ही मैं बहुत बड़ा वैज्ञानिक बनूंगा।’ पर तुम तो पापा की तरह जासूस बनना चाहते हो?’ मम्मी ने उसे छेड़ा। ‘क्या वैज्ञानिक, जासूस नहीं हो सकते।’ जानी ने रूठने के अंदाज में मुंह बनाया। ‘और तुम्हारा केस सुलझा क्या हेनरी?’, रोजी ने पति से पूछा। खाना खाकर वे तब तक बैठक में आ गए थे। ‘नहीं। बहुत उलझा हुआ केस है। समझ ही नहीं आ रहा कि केशव राय की हत्या किसने की है। जब वह कक्षा ले रहे थे उस समय चार विद्यार्थी थे। कक्षा खत्म होने के बाद उनकी हत्या की गई है, और चारों से पूछताछ करने से पता चला है कि सब सच बोल रहे हैं।’

‘केशव राय, मशहूर कलाकार। वही जो वाटर कलर पेंटिंग बनाते हैं?’, पीटर ने पूछा। ‘हमारे स्कूल के हाल में उन्हीं की पेंटिंग लगी है। बड़े से पीले गुलाब वाली, जिसके हर तरफ हरा रंग छिड़का गया है। वही बात थोड़ी अजीब लगती है।’, जानी बोला। ‘हरा रंग उनका मनपसंद रंग है। उनकी लाश पर भी हर जगह रंग लगा हुआ था, जैसे किसी ने बड़े ब्रश से छिड़का हो। लेकिन पीला रंग था। उनकी लाश आलमारी के पीछे पड़ी थी। कक्षा खत्म होने के बाद चारों विद्यार्थी किसी न किसी काम से वापस कक्षा में आए थे, पर उनमें से किसी ने भी लाश नहीं देखी थी।’ ‘वे चार लोग कौन हैं पापा?’ दोनों भाइयों की उत्सुकता बढ़ती जा रही थी।

‘एक है सुरेश पटवर्धन। मौसम कोई हो, नीले रंग का गोल चश्मा पहनता है। केशव राय से सीखने के लिए इस शहर में आया है। किराए के मकान में रहता है। उसने बताया कि वह चश्मे का डब्बा कक्षा में भूल गया था। रात को उसे ही लेने आया था। मैंने देखा, एक कुर्सी के नीचे डब्बा पड़ा था। जाहिर है वह झूठ नहीं बोल रहा था।

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दूसरी है मिताली बोस। वह एक लाइब्रेरी में काम करती है और शौकिया पेंटिंग बनाना सीख रही है। उसने बताया कि वह वापस कक्षा में केशव राय की लिखी एक किताब लेने गई थी, जो लाइब्रेरी में मौजूद नहीं है। हमने लाइब्रेरी में देखा। सचमुच वह किताब वहां नहीं है।’ ‘मामला पीले रंग का है!’ जानी बुदबुदाया। पीटर ने हैरानी से उसे देखा तो एक कागज उसकी ओर बढ़ा दिया। कुछ रंग उसमें उभरे हुए थे। पीटर के होंठों पर मुस्कान आ गई।

‘तीसरा व्यक्ति जिस पर हमें संशय है वह कालेज का छात्र है और कला में अपना करियर बनाना चाहता है। वह वापस कक्षा में केशव राय से फीस समय पर न चुका पाने के लिए माफी और कुछ समय मांगने गया था। वह भी झूठ नहीं बोल रहा है।’ जानी के हाथ में रंग का डिब्बा था और कागज पर कुछ चित्रकारी बना रहा था।

‘चौथा व्यक्ति साठ साल का एक अमीर आदमी है, जो समय बिताने के लिए कुछ न कुछ सीखता रहता है। उसे मधुमेह है, इसलिए बार-बार शौचालय जाना पड़ता है। उसका कहना है, वह वापस शौचालय के लिए आया था। देखा जाए तो चारों ने सही वजहें दी हैं कक्षा में वापस लौटने की और मजे की बात है कि किसी ने भी केशव राय की लाश को नहीं देखा।

मुंबई में कोई बहुत बड़ी पेंटिंग प्रदर्शनी लगने वाली थी और केशव राय ने उन चारों की ही पेंटिंग को बेकार कहकर वहां भेजने से मना कर दिया था। कहा जाता है कि केशव राय का कहना था कि किसी भी पेंटिंग में हरा रंग नहीं है, इसलिए वे किसी लायक नहीं हैं। उसे हर पेंटिंग में हरा रंग चाहिए था, चाहे जरूरत हो या नहीं। केशव राय की लाश पर हरा रंग होने के अलावा उसकी बांह पर पीले रंग से बहुत ही कलात्मक ढंग से लिखा था, क्या और चाहिए हरा रंग?’ ‘केशव राय को सुरेश पटवर्धन ने मारा है। वह जो नीले रंग का चश्मा पहनता है।

पीला रंग चश्मे से उसे हरा नजर आ रहा था। इसलिए उसने पीले रंग से लिखा।’ जानी बोला। पीटर ने नीला और पीला रंग मिलाकर पापा को दिखाया। वह हरा बन गया था। हेनरी और रोजी के चेहरे पर मुस्कुराहट फैल गई। हेनरी घर से बाहर निकल गए। सुरेश पटवर्धन इस शहर से भाग जाए, उससे पहले उसे पकड़ना था।