सौरभ समाज सेवा के क्षेत्र में काफी सक्रिय था। अपने एनजीओ ‘उजास’ के माध्यम से उसने फुटपाथ में रहने वाले गरीब बच्चों को आश्रयगृह में लाकर रखना शुरू किया। वहां उनके पढ़ने-लिखने की व्यवस्था भी करता। यूट्यूब में उसके अनेक ऐसे वीडियो देख कर लोग उसे काफी पसंद करने लगे। यूट्यूब पर उसके लाखों दर्शक हो गए।पहले तो लोगों को लगा कि यह अपनी छवि चमकाने का धंधा है। लेकिन सौरभ की निरंतरता देखकर लोग बड़े प्रभावित हुए, और बाद में उसकी आर्थिक मदद भी करने लगे।
सौरभ आर्थिक दृष्टि से संपन्न व्यक्ति था। विशालपुर में उसकी कपड़े की बड़ी दुकान थी, जो खूब चलती थी। दुकान की कमाई का बड़ा हिस्सा सौरभ ‘उजास’ में लगा देता। चैनपुर गांव में उसकी पैतृक जमीन थी। उसका एक बड़ा खंड बेचकर उसने शहर में ‘उजास’ की शुरुआत की और बचे हुए पैसों से बच्चों की मदद करनी शुरू की। उसे पूरी उम्मीद थी कि धीरे-धीरे लोग उस पर विश्वास करेंगे। हुआ भी ऐसा।
लोगों ने दिल खोलकर उसकी मदद की। सौरभ आए दिन विभिन्न फुटपाथों पर घूमता और कोई लावारिस बच्चा या बच्ची दिखाई देती, तो उन्हें प्रेम से पुचकारता। उनके पैरों में चप्पल नहीं है तो चप्पल खरीद कर देता। फटे कपड़े बदलवाता। उन्हें सुंदर पोशाक पहनाता। सौरभ के पीछे चलता उसका सहयोगी इन सारे दृश्यों को मोबाइल में कैद करके यूट्यूब में अपलोड कर देता। उसके एक भी वीडियो फर्जी नहीं थे। लोगों को उसकी नीयत पर भरोसा होने लगा।
उस दिन सौरभ कुछ फुर्सत में था। बैठ कर मोबाइल देखने लगा। तभी उसकी नजर फेसबुक के मैसेंजर पर गई, जिसमें कुनिका नामक फेसबुक दोस्त ने कोई श्रव्य संदेश भेजा था। उसने उत्सुकतावश उसे क्लिक किया तो वहां से आवाज आ रही थी, ‘आप समाज सेवा के क्षेत्र में अद्भुत काम कर रहे हैं। मैंने आज तक किसी व्यक्ति को आई लव यू नहीं कहा, लेकिन आपको कहती हूं आई लव यू।’
बस इतना ही संदेश था।
उसे सुन कर सौरभ एक रूमानी दुनिया में खो गया। शादी के बीस साल हो चुके थे। पत्नी के अलावा किसी भी स्त्री का कोई ख्याल उसे नहीं आया। अब पचपन साल की उम्र में इस स्थिति ने उसे हतप्रभ कर दिया। सौरभ ने तत्काल कोई जवाब नहीं दिया। मुस्कुराते हुए हाथ जोड़ने वाली इमोजी भेज दी।
कुछ दिनों के बाद कुनिका सौरभ को प्रेम भरे फिल्मी गीत भेज भेजने लगी। आए दिन कुनिका सौरभ को ऐसे गाने भेजती, जिसमें नायिका की ओर से नायक के लिए प्रणय निवेदन होता।
सौरभ धीरे-धीरे समझने लगा कि महिला मुझसे प्यार करने लगी है। सौरभ ने उसकी फेसबुक प्रोफाइल को गौर से देखा। हालांकि वहां कोई गंभीर सामग्री उसे दिखाई नहीं दी। ज्यादातर उसके चित्र ही दिखाई दिए। कभी वह किसी मंदिर का भ्रमण कर रही है, तो कभी किसी पहाड़ी इलाके में दोनों हाथ फैला कर आनंदित होने का भाव प्रदर्शित कर रही है। उसकी उम्र भी पचास के आसपास थी। सौरभ को लगा कि ठीक है, जीवन के इस उत्तर काल में अगर कोई अपनी ओर से प्रणय-निवेदन कर ही रही है, तो उसे स्वीकार कर लेने में हर्ज ही क्या है।
एक दिन कुनिका ने सौरभ से उसका मोबाइल नंबर मांग लिया और फिर फोन लगाकर उससे बात भी की। इससे यह तो निश्चित हो गया कि संदेश भेजने वाली महिला सही में है। आजकल मैसेंजर में अनेक मनचले लड़के महिला बन कर पुरुषों से बातें करते हैं, और उन्हें ठगते रहते हैं। जब कुनिका ने बात की तो सौरभ ने भी उत्तर देना शुरू किया। उसके हर मैसेज को या गाने को वह लाइक करने लगा। दिल वाली इमोजी भेज कर उसकी प्रशंसा भी करने लगा।
एक दिन कुनिका ने व्हाट्सएप संदेश में कहा, ‘मैं रूपनगर के सेक्टर 15 में रहती हूं। पति विदेश में रहते हैं। बच्चे भी बंगलुरु में नौकरी कर रहे हैं। बाइयों के सहारे जिंदगी कट रही है। कभी इधर आएं तो अच्छा लगेगा। यहां पास में एक बड़ा होटल है। वहां हम साथ में डिनर करेंगे और आप जैसा चाहें, वैसा हो जाएगा।’
सौरभ ने उसकी मंशा समझ ली। मन में खुशी के लड्डू फूटने लगे। सोचा समाज सेवा तो कर ही रहा हूं, क्यों न जीवन के इस अयाचित रंग का भी आनंद लिया जाए। बस रूपनगर जाने की पृष्ठभूमि बनाने लगा। पत्नी संजू से कहा, ‘रूपनगर में यूट्यूबरों का एक बड़ा सम्मेलन होने वाला है। आयोजक ने आमंत्रित किया है। देखो, तारीख कब आती है।’
संजू ने मुस्कुराते हुए कहा, ‘क्यों नहीं, तुम तो लाखों लोगों के हीरो हो। जाओ। बढ़िया है। अपने विचार व्यक्त करके आना। तुम्हारा सम्मान भी होगा।’
सौरभ ने मन-ही-मन सोचा, चलो घर से तो जरूरी सहमति मिल गई, वरना कई बार पत्नी शक करने लगती है कि अचानक दूसरे शहर क्या करने जा रहे हो। अब सौरभ अपने जीवन में आई इस प्रेमिका के बारे में किसी परम मित्र को बताना चाहता था। मर्द की यह मानसिकता होती है कि अगर कोई प्रेमिका मिल गई, तो वह गर्व के साथ किसी-न-किसी मित्र को बताने की कोशिश जरूर करता है।
एक दिन उसने अपने परम मित्र सुमन कुमार को फोन लगाया और बोला, ‘यार! एक महिला मुझे आई लव यू कह रही है। इसका आडियो मैसेज भेज रहा हूं।’ सुमन कुमार ने कहा, ‘कमाल है। फौरन भेजो।’
सौरभ ने आडियो मैसेज भेज दिया। कुछ देर बाद सुमन कुमार का फोन आ गया, ‘अरे बेटा! तुम किस चक्कर में पड़ गए हो। यह तो कुनिका की आवाज है। पिछले दिनों उसने मुझे भी यही संदेश भेजा था कि आप इस समय बहुत अच्छा लिख रहे हैं। मैंने किसी को आज तक आई लव यू नहीं कहा, आपको कह रही हूं।’
सुभाष की बात सुन कर सौरभ का सिर चकरा गया। ऐसा नहीं है कि सुभाष ने कोई दिल तोड़ने वाली बात कही हो। अब सौरभ को अपनी गलती का अहसास हुआ। सच में बाल-बाल बचा। अगर कुनिका के कहने पर वह रूपनगर चला जाता तो पता नहीं उसके साथ क्या होता। आजकल सोशल मीडिया के माध्यम से युवकों को, बूढ़ों को फंसाने का खूब खेल चलता है। और यह खेल दोनों तरफ से होता है। पुरुष भी भोली-भाली महिलाओं को आर्थिक मदद करके उनके साथ अश्लील बातें करते हैं।
गनीमत है सौरभ ने इस तरह का कोई अश्लील संवाद नहीं किया था। लेकिन अब वह सावधान हो गया। उसने सुमन कुमार का धन्यवाद करते हुए कहा, ‘यार मेरे! तुमने सही समय पर मुझे बचा लिया। संयोग देखो, मैंने तुमसे ही बात की, वरना पता नहीं मेरा क्या होता। अच्छा-खासा उजास का काम चल रहा था, मगर मैं अंधेरी गुफा में घुसता चला जा रहा था।
