जून महीने का संबंध आम तौर पर दो जून की रोटी के चुटकुले और मीम से हो चुका है। पर्यावरण सलाहकार संजीवनी शर्मा की मानें तो इससे ज्यादा हास्यास्पद समय पांच जून का होता है। पांच जून यानी कि विश्व पर्यावरण दिवस। शर्मा अपनी रील में बताती हैं कि उत्तर भारत में पेड़ लगाने का सबसे खराब समय जून का महीना होता है। इस समय इतनी गर्मी पड़ रही होती है कि पहले से लगे पेड़-पौधों पर ही आफत होती है। ऐसे में जून की गर्मी में नए पौधों से यह उम्मीद करना कि वे जड़ पकड़ कर लहलहाते पेड़ में बदल सकते हैं, अत्यंत बेमानी है।

विश्व पर्यावरण दिवस पर सरकार के बड़े स्तरों से लेकर, निगम और रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन तक में पौधरोपण कार्यक्रम होता है। कैमरे के सामने पौधे लगाए जाते हैं। इन दिनों बिना तोहफा तो कोई दिवस अधूरा ही रहता है तो विश्व पर्यावरण दिवस पर लोग अपने दोस्तों और अजीजों को पौधे भी भेजते हैं। हालांकि जिन लोगों को बागवानी की समझ है वे किसी भी नए पौधे को लगाने के लिए सावन का इंतजार करेंगे। लेकिन विश्व पर्यावरण दिवस पांच जून को तय किया गया है तो इसमें उत्तर भारतीय लोगों का क्या कसूर। जब यहां हर चीज तारीखों में सिमटी है तो लोग पर्यावरण और पेड़ के बारे में तयशुदा तारीख से इधर-उधर कैसे सोचेंगे भला?

जलवायु संकट आज जितना बड़ा मसला हो चुका है, उसे लेकर अभी हम बहुत छोटे स्तर तक भी सक्रिय नहीं हुए हैं। किसी भी ऐसी परियोजना में जिसके तहत हजारों की संख्या में बड़े पेड़ और जंगल काटने हों, वहां विरोध करने वाले लोगों को विकास विरोधी कहा जाने लगता है। पर्यावरण कार्यकर्ताओं को अभी तक गंभीरता से नहीं लिया जाता है। पांच जून को लगाए गए पौधों का 15 जून तक क्या हाल होता है, इसे देखने की किसी को सुध नहीं होती है।

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पर्यावरण संकट का मसला जुड़ा हुआ है उपभोग से। जितना ज्यादा उपभोग, कुदरत को उतना ही नुकसान। जो लोग पांच जून को पौधे उपहार देते हैं, वही लोग मई-जून की झुलसती गर्मी में दोस्तों, रिश्तेदारों को एसी में ओढ़ने वाली रजाई भी तोहफे में देते हैं। अगर हम बाजार में एसी वाली रजाई की बढ़ती खपत का आंकड़ा देखेंगे तो शायद पर्यावरण संकट के कारणों को थोड़ा और स्पष्ट रूप में समझ सकेंगे। जून की 40 से 45 डिग्री की गर्मी में हमें अपने घरों को इतना ठंडा करने की जरूरत क्यों है कि रजाई ओढ़ने की नौबत आ जाए।

यह सच है कि गर्मी लगातार बढ़ती जा रही है लेकिन एसी रजाई जैसी संस्कृति बाहर की गर्मी को इतना बढ़ाएगी कि कुछ दिनों में घरों को ठंडा करने में एसी भी नाकाम हो सकते हैं। इन दिनों घर बनाने और उनकी साज-सज्जा में शीशे से लेकर कृत्रिम चीजों का इतना इस्तेमाल किया जाता है, जो हमारे घरों को और गर्म कर देते हैं। इसलिए पांच जून से पहले, उसके बाद और साल भर अपने हर क्रियाकलाप पर सोचिए कि आप धरती को और गर्म तो नहीं कर रहे?