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विदेशी कलाकारों में दिखी रामायण की अनुगूंज

रामायण महोत्सव की शुरुआत इंडोनेशिया के कलाकारों की प्रस्तुति से हुई। इस दल में जकार्ता के विराग संधी समूह के पुरुष कलाकार शामिल थे। उन्होंने रामायण के पात्र हनुमान दूत की कथा ‘आंगुर पाणी’ पेश की।

मॉरीशस के अनन्त नवरंग आर्ट्स की प्रस्तुति का एक दृश्य

राम और रामायण दोनों ही भारतीय जनमानस के लिए आकर्षण का केंद्र रहे हैं। इनका प्रभाव भारत के साथ आसपास के देशों पर भी गहरा है। तभी तो पिछले तीन बरस से भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद की ओर से अंतरराट्रीय रामायण महोत्सव का आयोजन मुमकिन हो पा रहा है। इस साल इस महोत्सव में छह देशों के कलाकार शामिल हुए।

रामायण महोत्सव की शुरुआत इंडोनेशिया के कलाकारों की प्रस्तुति से हुई। इस दल में जकार्ता के विराग संधी समूह के पुरुष कलाकार शामिल थे। उन्होंने रामायण के पात्र हनुमान दूत की कथा ‘आंगुर पाणी’ पेश की। इस टीम ने हाथ की मुद्राओं, आंखों और मुख के भाव व पैरों के काम के जरिए इस प्रसंग की जीवंत प्रस्तुति दी। इस आयोजन की पहली शाम की दूसरी पेशकश कर्नाटक कलादर्शिनी के कलाकारों की थी। उन्होंने श्रीनिवास संस्थान के निर्देशन में पंचवटी प्रसंग पेश किया। उन्होंने सीताहरण, जटायु वध और अशोक वाटिका के दृश्य मंचित किए। यक्षगान शैली में यह प्रस्तुति गायन और नर्तन की मार्मिक अभिव्यक्ति के लिए याद रहेगी।

मलेशिया के कल्पना डांस थिएटर के कलाकारों की पेशकश लाजवाब रही। उनकी कोरियोग्राफी, नृत्य से लेकर संगीत तक सभी संतुलित, आकर्षक और मोहक थे। इस ग्रुप के कलाकारों ने संगीता नमशिवायम के निर्देशन में सीता स्वयंवर को भरतनाट्यम के जरिए पेश किया। इसकी व्याख्या भावे सुब्रम्णयम और नृत्य रचना पीटी नरेंद्रन ने की थी। इस प्रस्तुति में भरतनाट्यम की परंपरागत मार्गम का अनुसरण तो हुआ ही, पुष्पांजलि से मंगलम तक की परंपरा का सुंदर निर्वहन भी था। शुरू में नृत्यांगना संगीता नमशिवायम ने ‘श्री राम अवध नृपम’ रचना पर आधारित नृत्य पेश किया। इसके बाद उन्होंने विश्वामित्र मुनि के आश्रम, सीता व सखियों की गतिविधि, राम-सीता का प्रथम दर्शन, सीता स्वयंवर को नृत्य में पिरोया। जहां जतीस के बोलों पर सीता और राम के पहले मिलन को दर्शाया गया। वहीं, राम पर मोहित सीता के भावों को नृत्यांगना ने रचना ‘यर बडेइन्ने नान्नै सखिए’ के बोलों पर पेश किया। सरगम के बोलों और रचना ‘श्रीराम सीता कल्याण पादं’ पर सीता स्वयंवर के प्रसंग को चित्रित किया गया। तिल्लाना के बोलों पर भरतनाट्यम की विशुद्ध तकनीकी बारीकियों को लयात्मक गतियों के जरिए पेश किया गया। इस संध्या की दूसरी प्रस्तुति मॉरीशस के कलाकारों की थी। वहां के अनन्त नवरंग आर्ट के कलाकारों ने ‘राम भरत सम भाई’ नाटक का मंचन किया।

महोत्सव की तीसरी शाम श्रीलंका के अरू श्री आर्ट थिएटर के नाम रही। अरुंधती श्रीरंगनाथन के नेतृत्व में कलाकारों ने रामायण से जुड़े विभिन्न प्रसंग पेश किए। इसमें राम, सीता, सखी, जनक, कैकेई-मंथरा, सूर्पनखा-रावण संवादों को नृत्य में पिरोया गया। इस प्रस्तुति में भरतनाट्यम, कथक व कैंडियन-उदरत नटम नृत्यों का सुंदर समन्वय था। कलाकारों का आपसी तालमेल मोहक था। समारोह का समापन नेपाल संगीत एवं नृत्य अकादमी की प्रस्तुति से हुआ। काठमांडू के इन कलाकारों ने सीता स्वयंवर प्रसंग को विशेष रूप से पेश किया। इसका निर्देशन माधव प्रधान ने किया था।
महोत्सव का उद्घाटन परिषद के अध्यक्ष डॉ लोकेश चंद्र और निदेशक रीवा गांगुली दास ने दीप प्रज्वलित कर किया।

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