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विशेष: अकाल और महामारी का मैला आंचल

रेणु ने अपनी कहानी ‘पहलवान की ढोलक’ और ‘प्राणों के घुले हुए रंग’ में हैजा और मलेरिया महामारी से बदलते सामाजिक और राजनीतिक परिवेश की गहरी पड़ताल की है। रेणु की कई रपटों में उस समय के अकाल, बाढ़ और गरीबी का जिक्र मिलता है।

Author Updated: November 16, 2020 1:51 PM
साहित्यकार फणीश्वरनाथ रेणु।

हरिशंकर परिसाई ने अपने निबंध ‘गर्दिश के दिन’ में प्लेग महामारी की चपेट में आए एक गांव का मार्मिक चित्रण किया है। इसी महामारी ने परिसाई की मां को उनसे छीन लिया। फणीश्वनाथ रेणु ने अपने उपन्यासों ‘ऋणजल धनजल’ और ‘हड्डियों का पुल’ में बिहार के अकाल का, ‘मैला आंचल’ में मलेरिया और कालाजार के बीच फंसे ग्रामीण जीवन का सजीव चित्रण किया है। रेणु ने अपनी कहानी ‘पहलवान की ढोलक’ और ‘प्राणों के घुले हुए रंग’ में हैजा और मलेरिया महामारी से बदलते सामाजिक और राजनीतिक परिवेश की गहरी पड़ताल की है। रेणु की कई रपटों में उस समय के अकाल, बाढ़ और गरीबी का जिक्र मिलता है।

ओडिया के साहित्यकार फकीर मोहन सेनापति की कहानी ‘रेबती’ में उस समय फैले हैजे का मार्मिक वर्णन है। राजिंदर सिंह बेदी की कहानी ‘क्वारंटीन’ में महामारी के साथ उसके बचाव के उपायों का वर्णन है। पाकिस्तानी लेखक अहमद अली ने अपने उपन्यास ‘ट्वाइलाइट इन डेल्ही’ में महामारी के बाद आने वाली परेशानियों का जिक्र किया है। कन्नड़ कथाकार यूआर अनंतमूर्ति ने अपनी रचना ‘संस्कार’ में प्लेग महामारी के प्रभावों का वर्णन किया है। हमारे देश में भूख और गरीबी से बड़ी महामारी क्या हो सकती है? हाल के वर्षों में अकाल, भूख और गरीबी पर कई महत्त्वपूर्ण पुस्तकें आई हैं। पी.साईनाथ ने अपनी पुस्तक ‘एवरीबडी लव्स ए गुड ड्रॉउट’ में भारत के ग्रामीण इलाकों में सूखे की स्थिति और उसके प्रभावों का बहुत सूक्ष्म विश्लेषण किया है।

अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन ने देश में ही नहीं अफ्रीका जैसे देशों में गरीबी और अकाल को केंद्र में रखकर पुस्तक लिखी ‘पोवर्टी एंड फेमनीज’ (गरीबी और अकाल)। इस पुस्तक में भुखमरी और अकाल के स्वरूप, उसके कारणों के साथ उनके प्रभावों की गहन पड़ताल की गई है। अभिजीत बनर्जी की किताब ‘पुअर इकोनॉमिक्स’ में वैश्विक स्तर पर गरीबी के कारण और उसे दूर करने के उपाय सुझाए गए हैं।

सुकांता भट्टाचार्य ने ‘अकाल’ काव्यशास्त्र का संपादन किया। भूख पर पंत, केदारनाथ अग्रवाल नागार्जुन, निराला से लेकर नरेश सक्सेना, आलोक धन्वा, विनय विश्वास, विपिन चौधरी, यतीश कुमार, प्रांजल धर, घनश्याम कुमार देवांश आदि अनेक कवियों ने लिखा है। कोरोनाकाल में मौजूदा दौर के अधिकतर महत्त्वपूर्ण कवियों ने अपनी कविताओं में इस दौर की संवेदनाओं को शब्द दिए हैं। इस बीच कई कहानीकारों ने भी इस महामारी को केंद्र में रखकर अनेक कहानियां लिखी हैं और यह क्रम अभी जारी है।

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