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DSC Prize 2018: पुरस्कार के लिए 16 किताबों की सूची जारी, 4 अनुवाद और 2 डेब्यू उपन्यास भी शामिल

दक्षिण एशियाई साहित्य के लिए दिए जाने वाले प्रतिष्ठित डीएससी पुरस्कार के लिए इस साल 16 किताबों को लॉन्गलिस्ट कर लिया गया है।

10 अक्टूबर को दिल्ली के ऑक्सफोर्ड बुक स्टोर में आयोजित एक कार्यक्रम में रुद्रांग्शू मुखर्जी की अध्यक्षता वाली ज्यूरी ने 88 किताबों में से 16 किताबों को पुरस्कार के लिए लॉन्गलिस्ट किया है।

दक्षिण एशियाई साहित्य के लिए दिए जाने वाले प्रतिष्ठित डीएससी पुरस्कार के लिए इस साल 16 किताबों को लॉन्गलिस्ट कर लिया गया है। 10 अक्टूबर को दिल्ली के ऑक्सफोर्ड बुक स्टोर में आयोजित एक कार्यक्रम में रुद्रांग्शू मुखर्जी की अध्यक्षता वाली ज्यूरी ने 88 किताबों में से 16 किताबों को पुरस्कार के लिए लॉन्गलिस्ट किया है। कार्यक्रम में विख्यात इतिहासकार रुद्रांग्शू मुखर्जी और डीएससी पुरस्कार की संस्थापक सुरीना नरूला ने चयनित किताबों के नाम की घोषणा की। चयनित किताबों की सूची में असमी, हिंदी, कन्नड़ और तमिल भाषा से अनूदित चार पुस्तकें शामिल हैं। इसके अलावा दो डेब्यू उपन्यासों ने भी इस लिस्ट में जगह बनाई है। लॉन्गलिस्ट किताबों में विख्यात लेखिका अनुराधा रॉय की ‘ऑल द लिव्स वी नेवर लिव्ड’ और अरुंधती रॉय की ‘मिनिस्ट्री ऑफ अटमोस्ट हैप्पीनेस’ शामिल हैं।

इसके अलावा रंजना कौल द्वारा अनूदित चंद्रकांता की किताब ‘द सागा ऑफ सातिसार’, दीपक उन्नीकृष्णन की ‘टेम्पोरेरी पीपल’, तेजस्विनी निरंजना द्वारा अनूदित जयंत कैकिनी की किताब ‘नो प्रेजेंट्स प्लीज’, जीत थाइल की किताब ‘द बुक ऑफ चॉकलेट सैंट्स’ और कामिला शम्सी की किताब ‘होम फायर’ को भी लिस्ट में शामिल किया गया है। मनु जोसेफ की लिखी ‘मिस लैला आर्म्ड एंड डेंजरस’, मोहसिन हामिद की ‘एग्जिट वेस्ट’, नील मुखर्जी की ‘अ स्टेट ऑफ फ्रीडम’, प्रयाग अकबर की ‘लीला’, रीता चौधरी की ‘चाइनाटाउन डेज़’ (अनूदित), एसजे सिंधु की ‘मैरेज ऑफ अ थाउजेंड लाइज़’, सुदीत सर्राफ की ‘हरिलाल एंड सन्स’ और ताबिश खैर की ‘नाइट ऑफ हैप्पीनेस’ को भी इस लिस्ट में जगह मिली है। लिस्ट में पेरूमल मुरुगन की ‘पुनाची’ ( एन कल्याण रमन द्वारा अनूदित) को भी शामिल किया गया है। तमिल लेखक पेरूमल मुरुगन ने साल 2015 में अपने एक उपन्यास के विरोध के बाद फेसबुक पर एक सुसाइड नोट लिखकर अपनी मौत की घोषणा की थी। उन्होंने लिखा था कि लेखक पेरूमल मुरुगन की मौत हो चुकी है। अब केवल शिक्षक पेरूमल मुरुगन जिंदा है।

पुरस्कार के लिए किताबों को लॉन्गलिस्ट करने वाली ज्यूरी में इतिहासकार रुद्रांग्शू मुखर्जी के अलावा राइटर-एक्टर नंदना सेन, गार्डियन की पत्रकार क्लेरी आर्मिटस्टेड, यूएस-एसएलफएसी के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर टीसा जयतिलका और ब्राक यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर फिरदौस अज़ीम शामिल थे। लॉन्गलिस्ट किए गए इन 16 किताबों में से 6 किताबों को शॉर्टलिस्ट किया जाएगा, जिसकी घोषणा 14 नवंबर को लंदन के स्कूल ऑफ इकानॉमिक्स एंड पॉलिटिकल साइंस में की जाएगी। बता दें कि दक्षिण एशियाई साहित्य के लिए दिए जाने वाले डिएससी पुरस्कार 2010 से दिए जा रहे हैं। 25000 अमेरिकी डॉलर की पुरस्कार राशि वाले इस अवार्ड की शुरुआथ सुरीना नरूला और मनहद नरूला ने किया था। अंतरराष्ट्रीय साहित्य पुरस्कारों में डीएसएस पुरस्कार काफी प्रतिष्ठित पुरस्कार माना जाता है, जो खास तौर पर दक्षिण एशियाई साहित्य पर केंद्रित होता है। 8 साल के डीएससी पुरस्कारों के इतिहास में पाकिस्तान के एचएम नकवी, श्रीलंका के शेहान करुणातिलका, भारत के जीत थाइल और साइरस मिस्त्री, भारतीय मूल के अमेरिकी लेखक झुम्पा लाहिड़ी, भारत की अनुराधा रॉय और श्रीलंका के अनुक अरुदप्रगासम को पूर्व में यह सम्मान हासिल हो चुका है।

 

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