नाम तो था दिव्य, मगर सब पुकारते देबू, देबू। उसकी नानी कहती-मेरा छुटकू सा देवता। इस तरह नानी के बोलते-बोलते देबू पीछे छूट गया, रह गया छुटकू। नाम के साथ मिलती तुकें-छुटकू, मुटकू, खटकू, पटकू। जिसके मुंह पर जो आता, वही पुकारता और वह उसका जवाब भी देता-‘हूं, हां’। उसे पता चल जाता था कि उसी से बात की जा रही है। उसकी बहन थी-देवयानी। सब उसे देवी कहते। देवी साइकिल चलाती और वह पीछे बैठता। वह कागज, स्लेट पर ड्राइंग करती, तो छुटकू चील-बिलौउए बनाता। देवी स्कूल जाती, तो वह भी अपने छोटे से बस्ते को संभालता, जिसे उसकी मौसी ने लाकर दिया था। हालांकि अभी स्कूल जाने में बहुत समय बाकी था।
कई बार ऐसा होता कि जब मम्मी उसे बोतल से दूध पिला रही होतीं, तो बहन उससे मजाक में कहती-‘मुझे भी बोतल से दूध पीना है।’ यह सुनकर वह और कसकर बोतल और मां को पकड़ लेता। एक बार जब बहन उसके पास आ कर ऐसा कहने लगी तो छुटकू ने उसके बालों को इतनी जोर से खींचा कि वह रोने लगी। मां को इतना गुस्सा आया कि वह उसे डांटने लगीं, तो देवी बोली-‘रहने दो। अभी छोटा है। आप कुछ मत कहो। उसे मैं अपने आप समझा लूंगी।’
देवी को चाकलेट बहुत पसंद थी। अकसर जिद करती तो मां उसे दिलवा देती। छुटकू को भी मिलती। एक दिन ऐसा हुआ कि पांच साल की देवी के दांत में तेज दर्द होने लगा। मम्मी ने लौंग के तेल की कुछ बूंदें रुई की मदद से उसके दांत में लगाई, उससे कुछ राहत मिली, लेकिन आधी रात फिर से दर्द होने लगा। रात भर पापा, मम्मी उसके दर्द को कम करने की कोई न कोई कोशिश करते रहे। सवेरे पापा ने दफ्तर वालों से कहा कि आज घर से काम करेंगे। डाक्टर दस बजे से पहले आते नहीं थे। ऐसे में दफ्तर कैसे जाते। देर हो जाती।
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डाक्टर ने देवी को देख कर कहा कि दाढ़ में कैविटी है। पापा ने कहा-‘इतनी छोटी बच्ची के दांत में कैविटी क्यों है, डाक्टर साहब। अभी तो पांच साल की हुई है।’ डाक्टर ने कहा कि कैसे हुई यह बताना मुश्किल है, लेकिन खाती क्या है। क्या पसंद है इसे। पापा कुछ बोलें उससे पहले ही देवी बोली-‘चाकलेट’। उसकी बात सुनकर डाक्टर ने कहा-‘हां समझ में आ गया। खाने की जगह बस चाकलेट, चाकलेट ही खाती हो।’
हां, यह खाना तो खाना ही नहीं चाहती। कई-कई चाकलेट रोज चाहिए। पापा बोले। ‘बंद कर दीजिए। वर्ना दूसरे दांतों में भी कैविटी हो जाएगी। वैसे भी बच्चों के लिए अच्छी नहीं है। कभी-कभार तो कोई बात नहीं।’ कहते हुए डाक्टर दवा का पर्चा लिखने लगे। उन्होंने कहा-‘पहले दर्द बंद हो जाए। फिर कैविटी की फिलिंग करूंगा।’
पापा ने लौटकर मम्मी से कहा-‘मना करता था तुम्हें कि इसे चाकलेट ज्यादा मत खिलाओ। पर तुम्हें तो यह पड़ी थी कि मेरे बच्चे को कभी किसी चीज की कमी महसूस नहीं होनी चाहिए।’ ‘हां, हां, सारी गलतियां मेरी ही तो होती हैं।’ मम्मी ने गुस्से से कहा तो छोटू नकल उतारते बोला-‘आं, आं मेली ई तो होती हैं।’ उसकी बात सुनकर देवी जोर से हंसी। फिर बोली-‘पापा, अब प्रामिस करती हूं कि कभी चाकलेट नहीं मांगूगी। मेरी तरह छुटकू के भी दांत खराब हो गए तो क्या होगा।’
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पापा हंसने लगे-‘अपनी चिंता की जगह छुटकू की चिंता कर रही है।’ ‘हां, आप ही तो कहते हैं कि मैं उसकी बड़ी बहन हूं। मुझे उसकी चिंता करनी चाहिए। सचमुच अब नहीं मांगूगी चाकलेट।’ पापा को अपनी बच्ची पर प्यार आ गया। उन्होंने उसे गोद में उठाते हुए कहा-‘मेरा राजा बेटा।’ तभी छुटकू वहां आकर ठुनकने लगा। पापा की तरफ हाथ उठाकर कहने लगा कि उसे भी गोद में लिया जाए। राजा बेटा तो वह है। पापा ने उसे भी गोद में उठा लिया। एक तरफ देवी, तो दूसरी तरफ छुटकू। मम्मी मुस्कुराते हुए आंगन में चली गईं।
देवी और छुटकू खेलने लगे। देवी ने अपना टेंट हाउस निकाला। टेंट हाउस के अंदर वह अपने खिलौने लाकर रखने लगी। उसे ऐसा करते देख छुटकू भी अपने खिलौने ले लाया। स्पाइडरमैन, डोरोमोन, मिकी माउस, डोनाल्ड डक, शेर और कई डायनोसोर। दोनों भाई-बहन देर तक खेलते रहे। फिर देवी वहीं से चिल्लाकर बोली-‘मम्मा, भूख लगी है।’
यह बात सुनकर छुटकू रसोई की तरफ दौड़ा और अपनी मां का दुपट्टा खींचने लगा-‘दुद्दू, दुद्दू।’ ‘तू कब तक बोतल से दूध पीता रहेगा। दूध के अलावा और कुछ खाता ही नहीं।’ मम्मी ने गुस्सा करते हुए कहा। लेकिन छुटकू को कुछ समझ में नहीं आया, तो वह जोर से रोने लगा। मजबूरन मम्मी रसोई में जाकर दूध गर्म करने लगीं। तभी छुटकू ने अपना शेर देते हुए कहा-इसके लिए भी। ‘हां, अब तू मुझे शेरनी भी बना दे।’-मम्मी अभी ये कह ही रही थीं कि पापा ने कहा-‘वो क्या बनाएगा। तुम तो पहले ही से शेरनी हो। दहाड़ती हो तो सब डर जाते हैं।’ ‘हां बस तुम्हें छोड़कर।’ मम्मी मुस्कुराते हुए बोलीं।
‘अपनी तो मैं क्या बताऊं। एक दहाड़ में थर-थर कांपने लगता हूं।’ इतने में ही देवी अंदर आ गई-‘क्या पापा, आप कांप रहे हैं। ठंड लग रही है। स्वेटर लाऊं।’ ‘हां ले आ स्वेटर। अब गर्मी में भी स्वेटर पहनना पड़ेगा और ठंड में एसी, कूलर चला करेंगे।’-पापा ने कहा तो मम्मी भी जोर से हंसने लगीं। न देवी को कुछ समझ में आया, न छुटकू को मगर मम्मी पापा को हंसते देख, वे दोनों भी जोर से खिलखिलाने लगे।
