जनसत्ता बाल कथा: मोहल्ले में इधर-उधर फैली गंदगी को देखकर अमन अपने मित्रों से बोला, ‘हमारे मोहल्ले में इस प्रकार इधर-उधर बिखरी गंदगी शोभा नहीं देती। इससे बीमारियां भी फैलती हैं। हमें लोगों को जागरूक करना होगा। गंदगी को इधर-उधर न फेंक कर एक जगह रखे कचरे के डिब्बे में फेंकना चाहिए। इससे हमारा मोहल्ला साफ-स्वच्छ होने के साथ ही लोगों को साफ-सफाई का महत्त्व समझ में आ जाएगा। क्यों न हम अपने खाली समय का उपयोग मोहल्ले की साफ-सफाई में करें? इससे हमारा मोहल्ला सुंदर बन जाएगा’।
‘गंदगी से बीमारियां फैलने के साथ ही मच्छर भी पनपते हैं, जो हमारे शरीर में डेंगू, मलेरिया जैसी बीमारियों को पैदा करते हैं।’ चंदन बोला। फिर क्या था। बच्चों ने ठान लिया कि अब अपने मोहल्ले को गंदा नहीं रखना है। उन्होंने इसके लिए पूरी रणनीति बना ली। वे अपने खाली समय का उपयोग मोहल्ले की साफ-सफाई में करने लगे। इसके लिए उन्होंने अलग-अलग टीम बना ली थी। अमन इस बात का खास खयाल रखता था कि सफाई अभियान के दौरान किसी बच्चे को किसी तरह का नुकसान न हो। उन लोगों ने पैसे जमा कर अच्छे दस्ताने भी खरीद लिए थे।
लोगों की समझ में यह बात नहीं आ रही थी कि आखिर उनका मोहल्ला इतना साफ कैसे हो गया? जबकि एक समय था, जब मोहल्ले में सफाई कर्मचारी कचरा उठाकर ले जाते, फिर शाम होते-होते मोहल्ला कचरे से भर जाता। लोग इस मोहल्ले को काफी हेय दृष्टि से देखते थे। कोई इस मोहल्ले में आना नहीं चाहता था, लेकिन आज इस मोहल्ले की साफ-सफाई की चर्चा पूरे शहर में हो रही थी।
एक दिन नगर परिषद के अधिकारी उस मोहल्ले का मुआयना करने आए। वहां की साफ-सफाई देख कर अवाक रह गए। उन्होंने उस क्षेत्र में तैनात कर्मचारी को शाबासी देते हुए कहा, ‘यह मोहल्ला तो एकदम चकाचक है, लेकिन अन्य मोहल्ले में इतनी साफ-सफाई क्यों नहीं हो पाती? इस मोहल्ले के सफाई कर्मचारी पुरस्कार के अधिकारी हैं। आप लोगों को पुरस्कृत किया जाएगा।’
यह सुनकर सफाई कर्मचारी बोला, ‘सर! हम इस पुरस्कार के अधिकारी नहीं हैं। इतनी साफ -सफाई रखने में कौन हमारी मदद कर रहा है, हम लोग स्वयं समझ नहीं पा रहे?’ ‘इस बात का पता लगाना होगा कि मोहल्ले की इतनी साफ-सफाई में कौन अपनी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है? वह जो भी है, पुरस्कार का वास्तविक अधिकारी है। इस बात का पता लगाओ कि वे कौन हैं, जो मोहल्ले को साफ-सुथरा रखने में हमारी मदद कर रहे हैं।’ अधिकारी अपने कर्मचारी को आदेश देते हुए बोले।
काफी प्रयास के बाद जब लोगों और सफाई कर्मचारी को इस बात की जानकारी हुई कि उनकी साफ-सफाई के बाद मोहल्ले के बच्चे अपनी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं तो सभी आश्चर्यचकित रह गए।
बच्चों का यह काम सामने आने के बाद मोहल्ले वालों को अपनी गलती का एहसास हो गया। उन्होंने समझ लिया कि अपने घर से कचरा निकाल देना भर ही काफी नहीं होता है। घर से कचरे को कैसे निकाला गया, और कहां पर डाला गया, यह अति महत्त्वपूर्ण है। मोहल्ले वालों ने तय किया कि वे अपने घर से गीला और सूखा कचरा अलग-अलग निकालेंगे।
घायल करने वाली चीजों का अलग से निस्तारण करेंगे। कचरे के डिब्बे के अलावा कचरा और कहीं नहीं डालेंगे। बच्चों ने मोहल्ले वालों को स्वच्छता का महत्त्व समझा दिया था। जब इस बात की जानकारी नगर परिषद के अधिकारी को हुई तो वे बच्चों से मिलने के लिए पहुंचे। मोहल्ले के लोग भी उनके साथ खेल मैदान की ओर बढ़े , जहां बच्चे खेल रहे थे। नगर परिषद के अधिकारी को अपनी ओर आते देखे बच्चों ने खेल बंद कर उनका अभिवादन किया। सभी बच्चे कतारबद्ध होकर एक ओर खड़े हो गए।
‘बच्चों! तुम लोगों ने अपने खाली समय का उपयोग मोहल्ले की साफ-सफाई में किया है। यह अतुलनीय कार्य है।
बच्चे ही देश के भविष्य हैं। तुम्हारे जैसे बच्चे ही बड़े होकर देश व अपने माता-पिता का नाम रोशन करते हैं। तुम लोगों का यह महान काम समाज को नई दिशा देगा। यदि देश का हर नागरिक साफ-सफाई की महत्ता को समझ जाए तो हमारा देश कितना सुंदर बन जाएगा। तुम लोग पुरस्कार के वास्तविक अधिकारी हो। तुम लोगों को गांधी जयंती के अवसर पर सरकार द्वारा पुरस्कृत किया जाएगा। इसी का आमंत्रण देने आया हूं। तुम्हारा यह कार्य समाज के लिए मिसाल बनेगा।’
‘हम लोगों ने पुरस्कार के लिए यह कार्य नहीं किया बल्कि मोहल्ले को साफ-सुथरा रखना हर नागरिक का नैतिक कर्त्तव्य बनता है।’ बच्चे एक स्वर में बोले। उनकी बातें सुनकर अधिकारी के साथ-साथ लोग भी तालियां बजाने लगे। तालियों की गड़गड़ाहट से खेल मैदान गूंज उठा। तभी कुछ बच्चों के माता-पिता एक बड़े से पैकेट में नमकीन और मिठाइयां लेकर खेल के मैदान में पहुंचे। सबने मिल कर मिठाई खाई और मैदान में साथ बैठ कर हंसी-मजाक का आनंद लिया। जनसत्ता बाल कथा: फुटबॉल के मैदान से दिल तक – ईर्ष्या, गलती और माफी की कहानी
