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कार्टून चोट नहीं पहुंचाते, उनमें होती है जख्‍म भरने की ताकत: पीएम मोदी

प्रधानमंत्री ने कहा कि कार्टूनिस्ट भगवान के करीब होते हैं क्योंकि वह विभिन्न इंसानों के चरित्रों को बेहद बारीकी से देख सकते हैं।

Author December 18, 2018 5:42 PM
प्रधानमंत्री मोदी (एक्सप्रेस फाइल फोटो/ अमित मेहरा)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को सुझाव दिया कि महाराष्ट्र का कोई विश्वविद्यालय कार्टून के जरिये पिछले चार-पांच दशक के सामाजिक-राजनीतिक इतिहास का केस स्टडी के माध्यम से अध्ययन करे। उन्होंने कहा कि कार्टून आहत नहीं करते बल्कि उनमें जख्मों को भरने की शक्ति होती है।

प्रधानमंत्री ने यह बात विमोचन समारोह में कही। दरअसल यह समारोह प्रख्यात कार्टूनिस्ट दिवंगत आर. के. लक्ष्मण के जीवनकाल पर ‘टाइमलेस लक्ष्मण’ शीर्षक वाली एक कॉफी टेबलबुक के विमोचन पर आयोजित किया गया था। लक्ष्मण ने ‘आम आदमी’ जैसा कालजयी कार्टून चरित्र गढ़ा।

बता दें कि कार्यक्रम में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस और राज्यपाल सी. विद्यासागर राव ने भी शिरकत की थी । मोदी ने मुख्यमंत्री फड़णवीस से कहा कि वह यह देखें कि क्या कार्टून के माध्यम से कोई विश्वविद्यालय सामाजिक और राजनीतिक इतिहास पर अध्ययन कर सकता है। जिसका आधार लक्ष्मण का काम हो। उन्होंने कहा कि लक्ष्मण के कार्टून सामाजिक विज्ञान पढ़ाने का सबसे आसान तरीका हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि लक्ष्मण सिर्फ एक व्यक्ति नहीं बल्कि एक मौलिक धागा थे। जिन्होंने करोड़ों आम लोगों और उनके दिलों को एकसाथ रखा। उन्होंने ‘कॉमन मैन’ कार्टून के डिजिटलीकरण और उसे एनीमेटेड स्वरूप में जारी करने के दिवंगत काटूर्निस्ट के परिवार के फैसले पर उन्हें बधाई दी।

प्रधानमंत्री ने कहा कि कार्टूनिस्ट भगवान के करीब होते हैं क्योंकि वह विभिन्न इंसानों के चरित्रों को बेहद बारीकी से देख सकते हैं। मोदी ने याद करते हुए कहा कि कैसे लक्ष्मण के कार्टून ने उनके दिमाग पर गहरी छाप छोड़ी है।

समारोह के दौरान उन्होंने कहा कि मैं हमेशा यह महसूस करता था कि हवाई जहाज पर महाराजा टैग क्यों होना चाहिए और आम आदमी का क्यों नहीं। मेरे विचार तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी तक पहुंचे और कुछ विमानों में आम आदमी की तस्वीर नजर आई। उन्होंने कहा, सत्ता में आने के बाद, मैंने सपना देखा कि हवाई चप्पल पहनने वाले भी विमानों में उड़ान भर सकें ऐसा होना चाहिए। अब ट्रेनों के द्वितीय श्रेणी के वातानुकूलित डिब्बों में सफर करने वाले से ज्यादातर लोग हवाई सफर करते हैं।

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