14-15 साल के बच्चों की जरूरतें माता-पिता पूरा करते हैं। उन्हें किसी चीज की फिक्र नहीं होती है। यह उम्र खेलने-कूदने और पढ़ने की होती है। लेकिन जरा सोचिए इतनी ही उम्र में किसी बच्चे के ऊपर अपने परिवार की जिम्मेदारियां आ जाए, तो क्या करेगा। यह कहानी एक ऐसे बच्चे की है जिसके कंधे पर 14 साल की ही उम्र में परिवार और आर्थिक दोनों जिम्मेदारी आ गई। लेकिन इस बच्चे ने हिम्मत नहीं हारी। अध्यात्म में गहरी रुचि बचपन से ही थी, जो उसे अपने पुरखों से मिली थी। आगे चलकर इस बच्चे की अध्यात्मिक दुनिया की ख्याति न केवल देश बल्कि दुनिया में भी फैली। कभी दो वक्त की रोटी के लिए मोहताज इस युवा बालक की कथा सुनने और उन्हें देखने के लिए आज लाखों की भीड़ इकट्ठा होती है। देश के बड़े उद्योगपति अपने बेटे की शादी में शामिल होने के लिए ऑस्ट्रेलिया में अपना निजी विमान भेज देते हैं। देश के प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, बड़े से बड़े नेता, कलाकार से लेकर आज देश और दुनिया के कई बड़े चेहरे इस युवा बच्चे के साथ नजर आते हैं।

संघर्षों से भरा जीवन
आज इस बच्चे को लोग बागेश्वर धाम सरकार, धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के नाम से जानते हैं। जिस उम्र में आपको यह नहीं पता होता है कि कमाई क्या चीज होती है? परिवार का बोझ क्या होता है? परिवार चलाने के लिए क्या करना पड़ता है? पैसे कैसे कमाए जाते हैं? उस उम्र में ही ये सारी जिम्मेदारियां छोटे से बालक धीरेंद्र शास्त्री के कंधों पर आ गई थी। पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का जीवन बेहद ही कठिन परिस्थितियों में गुजरा। हालांकि, उनके जीवन में कई चमत्कार भी हुए। वरिष्ठ पत्रकार सचिन चौधरी ने ‘बागेश्वर धाम सरकार पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की अद्भुत यात्रा’ नामक जीवनी लिखी है। इस किताब में लेखक ने धीरेंद्र शास्त्री के बचपन से लेकर जीवन की कई चमत्कारिक घटनाओं का उल्लेख किया है। कैसे एक छोटा सा बालक आज दुनिया के लाखों युवाओं की धड़कन बन गया।

बालाजी सरकार के प्रकट होने की कहानी (Photo Source: Bageshwar Dham Sarkar/Facebook)

बालाजी सरकार के प्रकट होने की कहानी
बागेश्वर धाम, मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के गाढ़ा गांव में स्थित है। सचिन चौधरी अपनी किताब में लिखते हैं कि साल 2021 से पहले इस गांव में न तो इतनी दुकानें हुआ करती थीं और न ही इतनी भीड़, यातायात के साधन तक सीमित थे। लेकिन पिछले पांच सालों में जितनी धीरेंद्र शास्त्री को ख्याति मिली उतनी ही गाढ़ा गांव को भी। आज यहां 100 से अधिक छोटी-बड़ी दुकानें, 200 से अधिक रुकने के लिए कमरे, यातायात के पर्याप्त साधन हैं और हजारों की संख्या में लोगों की भीड़ है। बागेश्वर धाम आज देश के सबसे प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों में से एक है। इस स्थान पर बालाजी सरकार की महिमा है। देश और दुनिया में बागेश्वर धाम को हनुमान जी के नाम से प्रसिद्धि मिल रही है। यहां पर दो मंदिर हैं एक शिवजी का और दूसरा हनुमान जी का। स्थनीय लोगों की जानकारी के अनुसार 200 साल पहले यहां पर शिवजी का ही मंदिर हुआ करता था। बाद में यहां स्वयंभू हनुमान जी प्रकट हुए। हालांकि, हनुमान जी की मूर्ति यहां पर कब प्रकट हुई इसकी स्पष्ट जानकारी नहीं है। कई साल तक मूर्ति की पूजा नीम के पेड़ के नीचे होती रही। बाद में हल्कू घोषी नामक व्यक्ति ने बाबा का चबूतरा बनवाया एवं मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया।

पं. धीरेंद्र शास्त्री 14 साल की उम्र में अपने दादा गुरु के स्वर्गवास के बाद इस मंदिर के पुजारी बने। इस दौरान उन्होंने बड़ा मंदिर बनवाने के लिए लगातार प्रयास किए और 2016 में यहां बालाजी सरकार की पुनः प्राण प्रतिष्ठा कराई और मंदिर निर्माण शुरू करावाया। सचिन चौधरी बताते हैं कि, इसी के बाद से बागेश्वर धाम की तस्वीर बदलनी शुरू हुई। आज के समय में मंगलवार और शनिवार को यहां लाखों की संख्या में श्रद्धालु दर्शन करने के लिए आते हैं।

किसकी कृपा से धीरेंद्र शास्त्री को मिली सिद्धी (Photo Source: Bageshwar Dham Sarkar/Facebook)

बचपन में अध्यात्म का जुड़ाव
धीरेंद्र शास्त्री का अध्यात्म से बचपन से ही जुड़ाव था। उनको आज जो मुकाम और प्रसिद्धि मिली है उसके लिए वह अपने गुरु की कृपा मानते हैं। वह अपने कार्यक्रमों में अक्सर संन्यासी बाबा और दादा गुरु का नाम लेते हैं। संन्यासी बाबा, पंडित धीरेंद्र शस्त्री की पांचवी पीढ़ी के संत थे और उनके परिवार के पहले सन्यासी। यहां की पहाड़ी पर उनका समाधि स्थल भी है, जिस पर लोगों की गहरी आस्था है। दादा गुरु पंडित धीरेंद्र शास्त्री के सगे दादा थे। वह यह बात अक्सर कहते हैं कि, दादा गुरु की वजह से ही उनके जीवन में सब कुछ है। शिक्षा से लेकर हनुमान जी की प्रेरणा (जिसे लोग सिद्धि कहते हैं) या फिर कई चमत्कारिक घटनाओं के पीछे वह दादा गुरुजी का हाथ मानते हैं। दादा गुरुजी से ही उन्होंने भागवत, रामायण सीखी और उन्होंने ही दरबार के लिए विधि बताई। हनुमान जी से धीरेंद्र शास्त्री को जोड़ने वाले उनके दादाजी ही थे। उन्होंने नौ वर्ष की उम्र से ही दादा जी के सान्निध्य में हनुमान जी की सेवा करनी शुरू कर दी थी। उनके भीतर आई प्रेरणा (सिद्धि/दिव्य शक्ति) के लिए भी वह दादा जी को ही श्रेय देते हैं।

कौन थे सन्यासी और दादा गुरुजी (Photo Source: Bageshwar Dham Sarkar/Facebook)

कैसे मिली सिद्धि
लेखक अपनी इस किताब में लिखते हैं कि धीरेंद्र शास्त्री जब छोटे थे तब उनके परिवार की स्थिति ठीक नहीं थी। पिताजी उतना कुछ करते नहीं थे। वह कर्मकांड से ही घर का खर्चा चलाते थे, लेकिन वह पर्याप्त नहीं था। कुछ समय बाद जब उन्होंने यह भी छोड़ दिया तो घर की स्थिति और भी नाजुक हो गई। यहां तक कि भोजन तक की व्यवस्था ठीक से नहीं हो पाती थी। परिवार की बिगड़ती हालत जब धीरेंद्र शास्त्री से देखी नहीं गई, तो अपने दाद गुरुजी के पास गए और प्रार्थना करते हुए बोलें कि, “वह दुनिया का सब कुछ बता देते हैं और अपने परिवार को कुछ नहीं। उन्हें अपने परिवार के भविष्य के बारे में भी बताना चाहिए। यह बात सुनकर दादाजी मुस्कराए और उन्होंने चाय पी और रात में आने के लिए कहा। रात में धीरेंद्र शास्त्री को उन्होंने एक सूत्र दिया और बालाजी से जीवन भर के लिए जोड़ दिया। उन्होंने एक लीला दिखाई, बहुत तेज प्रकाश का अनुभव हुआ”। उसके बाद दिन और महीने बीतते गए और धीरेंद्र शास्त्री को कुछ आभास और अनुभव होने लगा। अचानक से कोई रहस्यमयी शक्ति उन्हें मन ही मन बता जाती कि सामने वाला क्या बोलने वाला है।

धीरेंद्र शास्त्री ने अपने परिवार का भरण-पोषण करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ा। छोटी उम्र में वह 10-11 रुपये के लिए घर से 65 किलमीटर दूर दूसरे गांव में जाकर कथा वाचन करते थे। यहां तक कि परिवार की स्थिति इतनी खराब हो चली थी कि आठ-नौ साल की उम्र में धीरेंद्र शास्त्री को भिक्षा मांगकर भी गुजारा करना पड़ता था। न रहने के लिए अच्छी छत थी, न पहनने के लिए पर्याप्त कपड़े और न ही खाने के लिए पर्याप्त भोजन। लेकिन उन्होंने कभी भी हिम्मत नहीं हारी। भगवान और परिवार की सेवा में उन्होंने खुद को पूरी तरह समर्पित कर दिया।

धीरेंद्र शास्त्री को जब संत और महात्माओं ने अपनाया (Photo Source: Bageshwar Dham Sarkar/Facebook)

साधु-संतों में स्वीकार्यता
धीरेंद्र शास्त्री को बेहद ही कम उम्र में जो लोकप्रियता और साधु-संतों द्वारा स्वीकार्यता हासिल हुई है वह बहुत ही कम लोगों को मिलती है। तुलसी पीठाधीश्वर जगदगुरु रामभद्राचार्य उन्हें अपना शिष्य मानते हैं। वर्तमान समय में भारत के बड़े से बड़े साधु-संत धीरेंद्र शास्त्री को स्वीकार्य करते हैं। अयोध्या के संत देवशाचार्य महाराज, धर्माचार्य रमाकांत गोस्वामी, आध्यात्मिक गुरु और भागवत कथावाचक श्री देवकीनंद ठाकुर और महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि जैसे देश के महान अध्यात्मिक गुरु धीरेंद्र शास्त्री के सामाजिक कार्यों और समाज के प्रति सोच का आदर करते हुए गुणगान करते हैं। यह प्रसिद्धि बहुत की कम लोगों को मिली है। इसकी वजह है, धीरेंद्र शास्त्री की समाज के प्रति कार्य और हिंदू एकता के प्रति उनके गहरी सोच। सबसे अधिक लोकप्रियता उन्हें उस वक्त मिली जब उन्होंने हिंदू एकता पद यात्रा निकाली। इसका उद्देश्य था हिंदुओं को जोड़ना। जात-पात को भूलकर हिंदुओं को एक करना।

कब और कैसे मिली लोकप्रियता
सचिन चौधरी लिखते हैं कि साल 2022 के बाद धीरेंद्र शास्त्री की लोकप्रियता तेजी से बढ़ी। उनकी लोकप्रियता के पीछे सबसे बड़ा वह संस्कार टीवी को मानते हैं, जो उनका सोशल मीडिया हैंडल तब से लेकर आज तक संभालता है और साथ ही शुरुआती दिनों में उनके कथा वाचन का आयोजन किया करता था। विदेश में धीरेंद्र शास्त्री को जो पहचान मिली है उसका श्रेय भी संस्कार टीवी को ही जाता है। खासकर कोविड-19 महामारी के समय उनके वीडियो लोगों तक तेजी से पहुंचे। उनके बोलने का मुखर अंदाज, अध्यात्म और हिंदू धर्म के प्रति समर्पण को सनातन धर्म स्वीकार्य करने लगा। खासकर 18 से 45 वर्ष के लोगों में पंडित धीरेंद्र शास्त्री काफी लोकप्रिय हुए।

हजारों की संख्या में बागेश्वर धाम में रहती है भीड़ (Photo Source: Bageshwar Dham Sarkar/Facebook)

बागेश्वर धाम में सितारों की महफिल
आज बागेश्वर धाम से कलाकार, उद्योगपति से लेकर नेता तक जुड़े हुए हैं। बागेश्वर धाम से न सिर्फ भोजपुरी जगत से सितारे बल्कि, बॉलीवुड के भी कई बड़े चेहरे जुड़े हुए हैं। भोजपुरी के जाने माने कलाकार और लोकसभा के सदस्य मनोज तिवारी और धीरेंद्र शास्त्री का एक दूसरे से गहरा लगाव है। मनोज तिवारी उन्हें अपना छोटा भाई मानते हैं। खेशारी लाल यादव और अक्षरा सिंह जैसे कई बड़े कलाकार भी धीरेंद्र शास्त्री से जुड़े हुए हैं। बॉलीवुड की बात करें तो गोविंद रामदेव, सोनू सूद, जैकलीन फर्नांडिस, उर्वशी रौतेला सहित कई कलाकार बागेश्वर धाम से जुड़े हुए हैं। अनुपम खेर और संजय दत्त से धीरेंद्र शास्त्री का घर जैसा लगाव है। वह इन दोनों सितारों के मुंबई में स्थित उनके घर भी जा चुके हैं। संजय दत्त तो 2024 में आयोजित हिंदू सनातन एकता पदयात्रा में धीरेंद्र शास्त्री के साथ शामिल भी हुए थे। इस दौरान दोनों की जमीन पर बैठे तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी। संजय दत्त, धीरेंद्र शास्त्री को अपना भाई मानते हैं। वीरेंद्र सहवाग, शिखर धवन और ग्रेट खली भी बागेश्वर धाम और धीरेंद्र शास्त्री से जुड़े हुए हैं।

विदेश में पहचान बनाने के पीछे किसका हाथ रहा (Photo Source: Bageshwar Dham Sarkar/Facebook)

विदेश में कैसे मिली पहचान
पंडित धीरेंद्र शास्त्री ब्रिटेन, नेपाल, दुबई, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, फिजी और मॉरीशस जैसे देशों में न सिर्फ कथाएं की, बल्कि अपने दरबार से लोगों को मंत्रमुग्ध कर चुके हैं। उनकी पहली विदेश यात्रा साल 2022 में लंदन से शुरू हुई। धीरेंद्र शास्त्री की पहली विदेश यात्रा के सूत्रधार संस्कार टीवी के सीईओ मनोज त्यागी हैं। उन्होंने ही पहली बार लंदन में कथावाचन का आयोजन किया था। धीरेंद्र शास्त्री का जिस लंदन के वेम्बली मंदिर में कथा हुई थी, वहां पर बैठने के लिए सिर्फ 400-500 लोगों के लिए सीट थी। तीसरे दिन उस मंदिर का हॉल पूरी तरह भर गया। दूसरी बार जब वह लंदन गए थे तो लेस्टर का तीन हजार क्षमता वाला प्रजापति हॉल पूरी तरह भर गया। इसके अलावा लगभग तीन से चार हजार लोग हॉल के बाहर सड़कों पर खड़े थे। लंदन यात्रा के दौरान ब्रिटेन के सांसद भवन ने धीरेंद्र शास्त्री को वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड लंदन, वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड ब्रिटेन और संत शिरोमणि अवॉर्ड से सम्मानित किया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी जा चुके हैं बागेश्वर धाम (Photo Source: Narendra Modi/Facebook)

सामूहिक कन्या विवाह के पीछे की असल वजह
पंडित धीरेंद्र के सामूहिक कन्या विवाह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, मनोज तिवारी और मध्य प्रदेश मुख्यमंत्री मोहन यादव संग देश की कई बड़ी हस्तियां पहुंच चुकी हैं। इस सामाजिक कल्याण के पीछे भी एक कहानी है, जो धीरेंद्र शास्त्री की बहन की शादी से जुड़ी हुई है। सबसे पहले साल 2019 में सत्रह कन्याओं का उन्होंने विवाह करवाया। इसके बाद 2021 में 21, 2022 में 108, 2023 में 125, 2024 में 157 और 2025 में 251 कन्याओं का विवाह हुआ। इस तरह बागेश्वर धाम के सहयोग से अब तक 669 निर्धन बेटियों की शादी कराई जा चुकी है। शादी के दौरान कन्याओं को उपहार में सारी जरूरत की सामान भी दी जाती है। इस कन्या विवाह से धीरेंद्र शास्त्री की ख्याति और बढ़ गई और लोगों ने स्वीकार करना शुरू कर दिया कि वह सिर्फ जनकल्याण के लिए काम कर रहे हैं। साल 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी बागेश्वर धाम में बालाजी सरकार का दर्शन करने के लिए पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने धीरेंद्र शास्त्री के कार्यों की खूब सराहना की थी।

समाज कल्याण
धीरेंद्र शास्त्री आज समाज कल्याण के लिए कई ऐसे कार्य कर रहे हैं जिसकी सराहना शब्दों में नहीं की जा सकती। बागेश्वर धाम में जरूरतमंदों के लिए हाईटेक अन्नपूर्णा रसोई चलती है। सामान्य दिनों में यहां 10 से 15 हजार लोग भंडारा में प्रसाद ग्रहण करते हैं और विशेष आयोजनों में यह संख्या 1 लाख तक पहुंच जाती है। इसके अलावा जनकल्याण के लिए वह बागेश्वर धाम में कैंसर अस्पताल और रिसर्च इंस्टीट्यूट खोल रहे हैं, जिसका निर्माण कार्य 2028 तक पूरा होगा। इस अस्पताल की आधारशिला 23 फरवरी 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रखी थी। अस्पताल में गरीबों का सस्ते में इलाज किया जाएगा। बागेश्वर धाम में गौशाला, बागेश्वर बगीचा (पर्यावरण संरक्षण) और वैदिक गुरुकुल (सनातन शिक्षा) जैसे कई और लोककल्याण कार्य किए जाते हैं।

धीरेंद्र शास्त्री का जन कल्याण के लिए काम (Photo Source: Narendra Modi/Facebook)

सनातन हिंदू एकता पदयात्रा
पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने जब साल 2024 में सनातन हिंदू एकता पदयात्रा का ऐलान किया तो इसकी सराहना देश के बड़े साधु, संत और महात्माओं ने की। यह 21 नवंबर से 29 नवंबर 2024 तक 9 दिवसीय पदयात्रा यात्रा थी। इस दिन बागेश्वर धाम में 1.5 से 2 लाख की भीड़ थी। कई लोगों ने इस यात्रा कि आलोचना भी की, जिसे पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने करारा जवाब देते हुए कहा कि, “हमको हिंदू मुसलमान नहीं करना है, हमको तो बस हिंदू-हिंदू करना है। अगर किसी को कोई दिक्कत है तो अपनी ठठरी बराओ”। इस पद यात्रा का उद्देश्य हिंदुओं को एक करना, जात-पात और भेदभाव को खत्म करने का उद्देश्य था। इसी पदयात्रा के बाद पंडित धीरेंद्र शास्त्री की लोकप्रियता और बढ़ गई।

धीरेंद्र शास्त्री का यह सनातन हिंदू एकता पदयात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव का एक सशक्त प्रतीक बन गई। इसमें लोगों ने एक अभूतपूर्व जनसैलाब देखा, जिसने बुंदेलखंड जैसे जातिवाद प्रभावित क्षेत्र में सामाजिक समरसता का एक नया अध्याय लिख दिया।

इस किताब में क्या है?
इस किताब में धीरेंद्र शास्त्री के जीवन को उन कठोर संघर्षों का जिक्र किया गया है, जिसके बारे में आमजन अपरिचित हैं। कितनी भी कठिन परिस्थिति रही हो, उन्होंने कभी भी अध्यात्म को नहीं छोड़ा। कठोर तपस्या की। इस किताब में कई चमत्कारों का जिक्र किया गया है। सिर्फ यही नहीं, जब धीरेंद्र शास्त्री को पहचान मिली, उसके बाद कब और क्या-क्या वाकये हुए इसका भी जिक्र किया गया है। किस तरह उन्हें विदेशों में पहचान मिली। सोशल मीडिया ने किस तरह उनके जीवन को पूरी तरह बदल दिया। कभी 10-12 लोग दरबार में आने वाले आज किस तरह लाखों लोग शामिल होते हैं।

अंत में
यह 167 पन्नों की किताब है, जिसकी कीमत सिर्फ 350 रुपये है। इस किताब में आप पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के जीवन से उन हिस्सों से परिचित होंगे जिसके बारे में कहीं जानकारी नहीं है। किताब को पढ़ेंगे तो समझेंगे कि चमत्कार क्या होता है? अध्यात्म क्या होता है? मेहनत कैसे रंग लाती है? संघर्ष क्या होता है? किस तरह अपने वर्तमान जीवन को स्वीकार्य करते हुए आगे बढ़ना है? हिंदुओं का एक होना क्यों जरूरी है? अगर आपकी अध्यात्म में हल्की सी भी रुचि है तो इस किताब को एक बार जरूर पढ़ना चाहिए। इसके साथ ही धीरेंद्र शास्त्री के जीवन में दिव्य शक्ति कहां से आई, इसका गहराई से उल्लेख किया गया है।

किताब का नाम: बागेश्वर धाम सरकार पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की अद्भुत यात्रा

लेखक: सचिन चौधरी

प्रकाशन: मंजुल पब्लिशिंग हाउस

मूल्य: 350 रुपए

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