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शख्सियतः मकबूल फिदा हुसेन

दुनिया के महान चित्रकारों में से एक थे मकबूल फिदा हुसेन।

Author Updated: September 17, 2017 1:04 AM

एमएफ हुसेन- जन्म: 17 सितंबर 1915 निधन: 9 जून 2011

दुनिया के महान चित्रकारों में से एक थे मकबूल फिदा हुसेन। वे एमएफ हुसेन के नाम से मशहूर हैं। ‘भारत का पिकासो’ कहे जाने वाले हुसेन का जन्म 17 सितंबर, 1915 को महाराष्ट्र के पंढरपुर गांव में एक सुलेमानी बोहरा परिवार में हुआ था। यह परिवार मूल रूप से गुजरात का रहना वाला था।
हुसेन के बचपन में ही उनकी मां चल बसी थीं। इसके बाद उनके पिता इंदौर चले गए। वहीं हुसेन की प्रारंभिक शिक्षा हुई। बड़ोदरा में एक मदरसे में पढ़ने के दौरान सुलेखन करते-करते कला में उनकी दिलचस्पी पैदा होने लगी।
बीस साल की उम्र में हुसेन मुंबई गए और वहां जेजे स्कूल आॅफ आर्ट्स में दाखिला लिया। अपने करियर के शुरुआती दौर में पैसा कमाने के लिए वे सिनेमा के पोस्टर बनाते थे। पैसे की तंगी के चक्कर में एक बार उन्होंने खिलौने बनाने वाली एक फैक्टरी में भी काम किया। जब भी उन्हें समय मिलता, वे गुजरात जाकर प्राकृतिक दृश्यों के चित्र बनाते थे।

कला की दुनिया में

हुसेन ने वर्ष 1947 में ‘द प्रोग्रेसिव आर्टिस्ट्स ग्रुप आॅफ बांबे’ की स्थापना की। वे ‘बंगाल स्कूल आॅफ आर्ट्स’ की राष्ट्रवादी परंपरा को तोड़ कर कुछ नया करना चाहते थे। हुसेन की कलाकृतियों की पहली प्रदर्शनी सन 1952 में ज्यूरिख में लगी थी। अमेरिका में उनकी पहली कला प्रदर्शनी सन 1964 में न्यूयार्क के ‘इंडिया हाउस’ में लगाई गई। सन 2008 में एमएफ हुसेन दुनिया के सबसे महंगे भारतीय चित्रकार बन गए। क्रिस्टीज की नीलामी में उनकी एक कलाकृति सोलह लाख अमेरिकी डॉलर में बिकी थी।
अपने जीवन का अंतिम वक्त उन्होंने लंदन में रहते हुए गुजारा। हुसेन का निधन 9 जून 2011 को लंदन के रॉयल ब्रॉम्पटन अस्पताल में हुआ। उन्हें दिल का दौरा पड़ा था।

सम्मान और पुरस्कार

दुनिया के इस मशहूर चित्रकार को अपने काम के लिए देश-दुनिया में तमाम सम्मान मिले। 1955 में उन्हें ‘पद्म श्री’ से नवाजा गया। 1973 में सरकार ने उन्हें ‘पद्म भूषण’ से सम्मानित किया। फिर सन 1991 में उन्हें ‘पद्म विभूषण’ सम्मान मिला।
सन 2008 में केरल सरकार ने उन्हें प्रतिष्ठित ‘राजा रवि वर्मा पुरस्कार’ से सम्मानित किया। इसके अलावा जॉर्डन की राजधानी अम्मान स्थित ‘रॉयल इस्लामिक स्ट्रेटेजिक स्टडीज सेंटर’ ने उन्हें अपने ‘दुनिया के 500 सबसे प्रभावशाली मुसलमान’ की सूची में शामिल किया।

फिल्मी सफर

हुसेन ने फिल्मी दुनिया में भी काम किया। सन 1967 में उन्होंने अपनी पहली फिल्म ‘थ्रू द आईज आॅफ ए पेंटर’ बनाई। इस फिल्म को बर्लिन इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में प्रदर्शित किया गया और इसे ‘गोल्डन बेयर शॉर्ट फिल्म’ का पुरस्कार मिला। सन 1971 में ‘साओ पावलो बाईएन्निअल’ में पाब्लो पिकासो के साथ-साथ वे भी विशिष्ट अतिथि थे।
सन 2000 में उन्होंने मशहूर अदाकारा माधुरी दीक्षित को लेकर ‘गजगामिनी’ फिल्म बनाई थी। सन 2004 में उन्होंने अदाकारा तब्बू के साथ एक और फिल्म ‘मीनाक्षी : अ टेल आॅफ थ्री सिटीज’ बनाई। इस फिल्म को कई पुरस्कार भी मिले थे। ‘कांस फिल्म फेस्टिवल’ में भी यह फिल्म दिखाई गई थी।

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