पुलिस…इस शब्द से ही शक्ति का बोध होता है। पुलिस मतलब रौब। दफ्तर, सड़क, घर हर जगह। अगर पुलिस के साथ एक और शब्द महिला जोड़ दें तो क्या होगा? महिला जोड़ने के बाद भी क्या इस शब्द की शक्ति बरकरार रहेगी। इसी का जवाब देती है बबीता सिंह उर्फ बेबी। ओटीटी मंच ‘प्राइम’ पर दो घंटे 11 मिनट की फिल्म ‘बबीता सिंह रिपोर्टिंग’ तथ्यात्मक रूप से एक अपराध रहस्य कथा है।
एक अपराध की गुत्थी सुलझाने में बेबी बहुत सहज और सरल तरीके से पितृसत्ता की गुत्थी सुलझाती है। पिता की मौत के बाद अनुकंपा के आधार पर बबीता सिंह एसआइ बनी है। पुलिस थाने में एक महिला पुलिस और पुरुष पुलिस के रुतबे का अंतर दिखता है। बेबी को थाने के बाद घर लौट कर पति के लिए खाना भी बनाना होता है, साथ ही वीडियो काल पर सास और ननद के ताने भी सुनने पड़ते हैं कि वह ससुराल के लिए वक्त नहीं निकाल पाती है। निर्देशक ने बेबी के इस संघर्ष को उतने ही सहज तरीके से दर्शाया है, जितनी सहजता से आम महिलाएं कार्यस्थल से लेकर घर के कर्तव्यों में सामंजस्य बिठाती हैं।
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बेबी को पुलिस की नौकरी अपने पिता की जगह पर मिली है। उसमें पुलिस के काम को लेकर जज्बा है। वह ‘फील्ड ड्यूटी चाहती है। बेबी अपने पति को गर्व से बताती है कि उसकी तैनाती ‘फील्ड’ में हो गई है तो उसे बधाई के बजाय ताना मिलता है-तब तो और भी छुट्टी नहीं मिलेगी। तुम्हारी स्कूल की नौकरी ही सही थी।
पुलिस-सेवा जैसे मुश्किल क्षेत्र में पति से लेकर सास और ननद की ख्वाहिश बेबी से यही है कि वह घर को ज्यादा से ज्यादा समय दे। बेबी अपने घरवालों को खुश करना चाहती है और इस तनाव में वह निलंबित होने का रास्ता भी चुन लेती है। बेबी का वरिष्ठ उसके सामने प्रस्ताव रखता है कि अगर उसकी एक गलती का दोष वह अपने ऊपर ले ले तो उसे कुछ समय के लिए निलंबित कर दिया जाएगा।
गलती छोटी ही है तो विभागीय कार्रवाई पूरी होने के बाद उसकी फिर से बहाली हो जाएगी। जिस समाज में अपनी नौकरी से निलंबित होना मर्दों के लिए अन्य नुकसान से ज्यादा साख की बात होती है वहीं बेबी ससुराल में अच्छी बहू की साख पाने के लिए वह गलती अपने ऊपर लेती है जो उसने की ही नहीं। वह निलंबन से मिली ‘छुट्टी’ का इस्तेमाल अपने ससुराल वालों को खुश करने के लिए करना चाहती है।
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बेबी के बचपन के दोस्त की हत्या हो जाती है और उससे उम्मीद की जाती है कि वह इन पचड़ों में पड़ने के बचाय अपनी ससुराल पर ध्यान दे। बेबी अपने अस्तित्व को लेकर सहज है तो वह अपने दिल की सुनती है। वह दोस्त की हत्या की गुत्थी सुलझाती है। यहां पर दो पुलिस हैं। एक पुलिस बेबी की दोस्त का पति है जो घर आते ही पत्नी पर रौब झाड़ता है। दूसरी पुलिस बेबी है, जो न तो सड़क और न अपने घर पर रौब झाड़ सकती है। बेबी अपनी काबिलियत साबित कर नौकरी वापस पाती है। छुट्टी के लिए निलंबित होने वाली बेबी महिलाओं की विलंबित स्थिति की प्रतीक है।
