Autobiography Of a Yogi Book Review: कुछ किताबें पढ़ी नहीं जातीं, महसूस की जाती हैं। परमहंस योगानंद की आत्मकथा Autobiography Of a Yogi भी ऐसी ही एक किताब है, जो पाठक को खुद से मिलवाती है। यह किताब कई सवालों के जवाब देती है, मन को शांत करती है और भारत व सनातन धर्म की अद्भुत आध्यात्मिक परंपरा का एहसास कराती है।

इस किताब की सबसे बड़ी खासियत यह अध्यात्म को विज्ञान से जोड़कर प्रस्तुत करती है। इसमें योग, साधना और परमात्मा से जुड़ने के सरल तरीकों का उल्लेख है, साथ ही यह भी बताया गया है कि मनुष्य अपनी उच्च चेतना तक कैसे पहुंच सकता है। एक पाठक के तौर पर मुझे ये किताब इसलिए बहुत अच्छी लगी क्योंकि ये भीतर तक आपको शांत करती है, आपके सवालों का जवाब देती है।

किताब किस बारे में है

यह किताब एक ऐसे योगी की कहानी है, जो बचपन से ही शांति और सत्य की खोज में है। परमात्मा से मिलन की चाह उसे संन्यास, योग-साधना और अंत में पश्चिमी देशों में क्रिया योग के प्रचार तक ले जाती है। इस यात्रा में योगानंद जी को ऐसे अनेक लोग मिलते हैं, जो उन्हें उनके लक्ष्य की ओर मार्गदर्शन देते हैं।

किताब में भगवद गीता, योग दर्शन और भारतीय अध्यात्म का विस्तार से उल्लेख है। यह भारत की आध्यात्मिक विरासत को पूरी दुनिया के सामने रखती है।

किताब आपके डर को कम करती है, अगर आपको मौत या अपनों को खोने से डर लगता है तो ये किताब समझाती है कि क्यों ये डर बेवजह है।

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गुरु–शिष्य का संबंध

किताब गुरु के महत्व को गहराई से समझाती है। यह बताती है कि एक सच्चा गुरु जीवन को सही दिशा देता है और कई बार वह स्वयं जीवन में प्रकट हो जाता है। महावतार बाबाजी, लाहिड़ी महाशय और श्री युक्तेश्वर जैसे गुरुओं के माध्यम से योगानंद जी भारतीय गुरु-शिष्य परंपरा की गरिमा को सामने रखते हैं।

विज्ञान और अध्यात्म का संगम

इस किताब में क्वांटम फिजिक्स और मेटाफिजिक्स जैसे विषयों का उल्लेख मिलता है, जिन्हें विज्ञान ने बहुत बाद में समझा, लेकिन जिनका उपयोग भारतीय साधना में सदियों से होता आ रहा है। योगानंद जी बताते हैं कि ध्यान, प्राणायाम और आत्म-संयम के ज़रिये आप अपनी चेतना के दरवाज़े खोल सकते हैं। किताब पढ़कर आपको लगेगा कि भारत के ऋषि और योगी समय से कितना आगे थे और विज्ञान की खोज से पहले ही सच तक पहुंच चुके थे।

किताब में कुछ जगह चमत्कारों का वर्णन है, जो बढ़ा-चढ़ाकर लगे, लेकिन इन्हें प्रतीक या रूपक की तरह भी समझा जा सकता है। किताब अंधविश्वास को बढ़ावा नहीं देती है।

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किताब की सीख
• शांति बाहर नहीं, हमारे भीतर है
• परमात्मा से जुड़ने के लिए संन्यास ज़रूरी नहीं
• योग और ध्यान जीवन को संतुलित बनाते हैं
• अवचेतन मन (Subconscious Mind) हमारी सोच के अनुसार काम करता है

किसे पढ़नी चाहिए

यह किताब सिर्फ आध्यात्मिक लोगों के लिए नहीं है। अगर आप भीतर से अशांत हैं, जीवन का अर्थ, उद्देश्य और शांति ढूँढ रहे हैं, योग और ध्यान में रुचि रखते हैं तो यह किताब आप पढ़ सकते हैं। Autobiography Of a Yogi पाठक को अपनी दुनिया में ले जाती है और भीतर से बदलाव का अनुभव कराती है।

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कौन हैं परमहंस योगानंद

परमहंस योगानन्द, बीसवीं सदी के एक आध्यात्मिक गुरू, योगी और संत थे। उन्होंने ना सिर्फ भारत में बल्कि विदेशों में भी क्रिया योग का प्रचार प्रसार किया। परमहंस योगानंद के जन्म का नाम मुकुंद लाल घोष था, 5 जनवरी, 1893 को गोरखपुर में पैदा हुए योगानंद की मृत्यु 7 मार्च, 1952 को कैलिफोर्निया में हुई। अपने उपदेशों के प्रसार के लिए उन्होंने सेल्फ-रियलाइजेशन फेलोशिप (एसआरएफ)/ योगोदा सत्संग सोसाइटी ऑफ इंडिया (वाईएसएस) की स्थापना की, जो एक धार्मिक ध्यान और क्रिया योग संगठन है।