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साहित्य चर्चाः राजेंद्र जोशी ने कहा, लेखक को कार्यकर्ता होना चाहिए

केंद्रीय साहित्य अकादेमी नई दिल्ली के तत्वावधान में सात दिवसीय राष्ट्रीय साहित्योत्सव में बुधवार को रवींद्र भवन में उत्तर-पूर्व और उत्तरी लेखक सम्मेलन हुआ।

Author February 1, 2019 12:18 PM
केंद्रीय साहित्य अकादेमी नई दिल्ली के तत्वावधान में सात दिवसीय राष्ट्रीय साहित्योत्सव में बुधवार को रवींद्र भवन में उत्तर-पूर्व और उत्तरी लेखक सम्मेलन हुआ।

रोहित कुमार
केंद्रीय साहित्य अकादेमी नई दिल्ली के तत्वावधान में सात दिवसीय राष्ट्रीय साहित्योत्सव में बुधवार को रवींद्र भवन में उत्तर-पूर्व और उत्तरी लेखक सम्मेलन हुआ। इस सत्र में ‘मेरी रचना मेरा संसार’ के अंतर्गत राजस्थानी भाषा के लेखक राजेंद्र जोशी ने अपने रचना संसार से रूबरू कराया।  अकादेमी के सचिव के श्रीनिवासन राव ने बताया कि इस सत्र में ‘मेरी रचना, मेरा संसार’ कार्यक्रम में पांच भारतीय भाषाओं के रचनाकारों की परिचर्चा में जोशी ने कहा कि वे अपने परिवेश से सीखते हैं और आसपास के चरित्रों का निर्माण करते हैं। जोशी ने बताया कि उन्होंने सामाजिक कार्यकर्ता से अपना सफर प्रारंभ करते हुए लिखना-पढ़ना शुरू किया और वे तीन दशकों से पूरी ईमानदारी और निष्ठा से एक लेखक के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं।

उन्होंने समाज और आम आदमी के प्रति लेखक के दायित्वों को रेखांकित करते हुए कहा कि लेखक को एक्टीविस्ट होना चाहिए। स्वयं को लोक में रहने वाला लेखक बताते हुए जोशी ने कहा कि उनकी दादी द्वारा कही जाने वाली लोक कथाओं को सुनते हुए उन्हें साहित्य सृजन की प्रेरणा मिली। जोशी ने अपने रचना संसार में समाज की भूमिका को रेखांकित करते हुए बताया कि राजस्थानी परिवार में सदैव लोक संस्कृति को तरजीह दिए जाने के कारण राजस्थानी लेखन विश्व की अन्य भाषाओं के लेखन के बराबर दिखाई देता है। जोशी ने कहा कि लोक के साथ घर, परिवार और समाज में रहते हुए वहां के विषयों, घटनाओं और पीड़ा को कविताओं में उठाने का वे प्रयास करते हैं। उन्होंने कहा कि लोक संस्कृति को जीने वाला लेखक ही राजस्थानी में लिख सकता है।

इस सत्र में बोडो के लेखक अदाराम बसुमतारी, हिंदी के कृष्ण मोहन झा, अंग्रेजी की संगीता मल्ल ने भी अपने रचना संसार से परिचय कराया। कार्यक्रम में वरिष्ठ साहित्यकार एवं राजस्थानी भाषा परामर्श मंडल के संयोजक मधु आचार्य ‘आशावादी’, डॉ राजेश कुमार व्यास सहित देश के प्रतिष्ठित साहित्यकार उपस्थित थे।। कार्यक्रम का संचालन सुकृता पाल कुमार ने किया। अकादेमी सचिव राव ने बताया कि इससे पहले पूर्वोत्तरी कार्यक्रम के उद्घाटन समारोह की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार एवं अकादेमी के अध्यक्ष चंद्रशेखर कंबार ने की। बीज वक्तव्य वरिष्ठ साहित्यकार डॉ विश्वनाथ प्रसाद तिवारी ने दिया तथा वरिष्ठ असमिया लेखक ध्रुव ज्योति वोरा समारोह के विशिष्ट अतिथि थे।

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