यह सुखद संयोग है कि जब दिल्ली में AI Impact Summit 2026 जारी है तभी यह किताब पढ़ने का सुयोग बना। दिल्ली स्थित भारत मण्डपम में आयोजित AI सम्मेलन में गूगल के सीईओ सुन्दर पिचाई ने कहा कि एआई (Artificial Intelligence) ‘हमारे जीवनकाल का सबसे बड़ा प्लेटफॉर्म शिफ्ट’ लाने जा रहा है। ऐसा सोचने वाले सुन्दर पिचाई अकेले विशेषज्ञ नहीं है। ज्यादातर तकनीक विशेषज्ञ मान रहे हैं कि एआई निर्विवाद रूप से मानव इतिहास की सबसे बड़ी तकनीकी छलांग में एक होने जा रहा है।
एआई क्या है, इसका जन्म कैसे हुआ, एआई टूल क्या होते हैं, क्या काम करते हैं, उनका हम दैनिक जीवन में किस तरह इस्तेमाल कर सकते हैं, एआई तकनीक का हमारे वर्तमान और भविष्य पर क्या असर पड़ेगा?, इन सभी सवालों का जवाब देती है डॉक्टर सुरेश कुमार की नई किताब ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और हम लोग।’
हिन्दी लेखकों पर यह आरोप लगता रहा है कि वह तकनीकी विषयों पर लिखने में या तो आलस्य करते हैं या पीछे रह जाते हैं। तकनीकी विशेषज्ञों और गीक की दुनिया से बाहर एआई तब वैश्विक चर्चा का केंद्र बना जब वर्ष 2022 में ‘ओपेन-एआई’ कंपनी ने अपना रिसर्च प्रिव्यू ऐप ‘चैट जीपीटी‘ को सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराया। वर्ष 2025 में सुरेश जी की यह किताब प्रकाशित होकर हिन्दी पाठकों के बीच आ गयी। आप कह सकते हैं कि एआई जैसी तेजी से ही सुरेश जी ने इस विषय पर काम किया जिसकी वजह से हिन्दी के आम पाठकों को इस लेटेस्ट टेक्नोलॉजी के बारे में जानने-समझने के लिए साहित्य का अभाव नहीं महसूस होगा।
हर तकनीकी की तरह एआई का विकास भी तकनीकी के ऐतिहासिक सोपानिक उन्नति के चरणों से होकर ही अपने वर्तमान स्वरूप तक पहुँचा है। प्रस्तुत किताब में लेखक ने एआई के वर्तमान स्वरूप के बारे में बात नहीं की है। उन्होंने इसके विकास के प्रमुख चरणों से भी पाठकों को परिचित कराया है। कम्प्यूटर, इंटरनेट और एआई के क्रमिक विकास का विवरण उन पाठकों के लिए बेहद सहायक साबित होगा जो कम्प्यूटर और इंटरनेट तकनीक से भलीभांति परिचित नहीं हैं।
प्रस्तुत किताब कुल नौ अध्यायों में विभाजित है। प्रस्तुत किताब के व्यापक वितान को समझना है तो इसके सभी अध्यायों के नाम देख लेना काफी रहेगा- (1), AI क्या है? (2) AI का इतिहास और विकास, (3) हमारे जीवन में AI, (4) आम लोगों के लिए AI टूल्स, (5) AI और हमारा समाज, (6)फेक फोटो, नकली आवाज और चैट बॉट्स, AI से कैसे बचें?, (7) AI और इंसान: साथ-साथ या आमने-सामने, (8) भारत में AI – गाँव से लेकर संसद तक, (9) भविष्य का नागरिक – AI के साथ जीने की कला।

उक्त विषय सूची से हम देख सकते हैं कि सुरेश जी ने अपनी किताब में एआई के तकनीकी के साथ ही सामाजिक और नैतिक पहलुओं पर भी बिन्दुवार चर्चा की है। पुस्तक का सबसे प्रशंसनीय पहलू यह है कि यह बिल्कुल ही नई तकनीकी को लेकर समाज में पैदा किये जा रहे भय एवं आशंक का निराकरण करने का प्रयास करती है। एआई हमारे जीवन को कैसे प्रभावित करेगा, यह मनुष्यों को बेरोजगार और अनुपयोगी बना देगा, क्या इसके बाद तकनीकी जालसाजी की बाढ़ जा जाएगी, असली और नकली में भेद करना मुश्किल हो जाएगा, हमारा निजी डेटा एआई के हाथों में जाकर हमें टारगेट करने का हथियार बन जाएगा? ऐसे ही अन्य बहुत से आम फहम प्रश्नों का उत्तर इस किताब में देने का प्रयास किया गया है।
सभी अध्यायों के अन्त में सन्दर्भ सूची दी गयी है जिससे जिज्ञासु पाठक अपने अध्ययन को आगे बढ़ा सकते हैं। एआई टेक्नोलॉजी से जुड़े महत्वपूर्ण शब्दावली के संक्षिप्त रूप का फुल फॉर्म भी दिया गया है। इसलिए यह पुस्तक छात्रों और आम पाठकों दोनों के लिए समान रूप से उपयोगी साबित हो सकती है।
पुस्तक: ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और हम लोग, लेखक: डॉ. सुरेश कुमार, प्रकाशक: तक्षशिला प्रकाशन, नई दिल्ली, मूल्य: 650.00 रुपये
