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नृत्योत्सव: स्वाति तिरुनाल को कलाकारों की नृत्यांजलि

समारोह की दूसरी संध्या में टीवी मणिकंडन ने कर्नाटक संगीत शैली में गायन पेश किया।

दो दिवसीय समारोह की पहली संध्या में मोहिनीअट्टम नृत्यांगना जयप्रभा मेनन और पूर्वा धनाश्री ने नृत्य पेश किया।

केरल के महाराजा स्वाति तिरुनाल उन्नीसवीं सदी के महान संगीतज्ञ थे। उन्होंने कर्नाटक व हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत की चार सौ रचनाएं की हैं। ये रचनाएं मलयालम, संस्कृत, हिंदी, बांग्ला और अन्य भाषाओं में हैं। कर्नाटक संगीत के त्रिमूर्ति-संत त्यागराज, स्याम शास्त्री व मुथुस्वामी दिक्षितर के इतर उन्होंने अपनी रचनाओं को कलाकारों को समर्पित किया। उनकी रचनाएं भक्ति मंजरी, स्यानंदपुरवरणम प्रबंधम, पद्मनाभ अष्टकम, अजामिल, उत्सव वरणम प्रबंध में संग्रहित हैं। उनकी रचनाएं आज भी कलाकार गाते हैं और उन्हें नृत्य में पिरोते हैं। इसकी झलक दसवें स्वाति तिरूनाल समारोह में दिखी।

इंटरनेशनल अकादमी आॅफ मोहिनीअट्टम की ओर से इंडिया हैबिटाट सेंटर में समारोह आयोजित था। दो दिवसीय समारोह की पहली संध्या में मोहिनीअट्टम नृत्यांगना जयप्रभा मेनन और पूर्वा धनाश्री ने नृत्य पेश किया। अदिति शर्मा गर्ग ने स्वाति तिरुनाल की रचनाओं को धु्रपद शैली में गाया। उन्होंने रचना ‘देवन के पति इंद्र’ को राग दरबारी कान्हड़ा का आधार लेकर गाया। अदिति ने भजन ‘जमुना किनारे प्यारे’ को ठुमरी अंग में गाया। यह राग चारूकेशी और कहरवा ताल में निबद्ध था। मोहिनीअट्टम नृत्यांगना जयप्रभा मेनन ने महाराजा स्वाति तिरूनाल रचित गणपति स्तुति से नृत्य आरंभ किया। इसमें गणपति के रूप का वर्णन पेश किया। दूसरी प्रस्तुति हिंदी रचना ‘चलिए कुंजन में तू हरि’ थी। इस रचना में नृत्यांगना जयप्रभा ने राधा और कृष्ण के संयोग के भावों को अभिनय के जरिए दर्शाया।

समारोह की दूसरी संध्या में टीवी मणिकंडन ने कर्नाटक संगीत शैली में गायन पेश किया। जबकि भरतनाट्यम नृत्यांगना प्रिया वेंकटरमन और कथक युगल नृत्यांगना नलिनी व कमलिनी ने महाराजा स्वाति तिरुनाल की रचनाओं को नृत्य में पिरोया। भरतनाट्यम नृत्यांगना प्रिया वेंकटरमन ने कृष्ण स्तुति से नृत्य आरंभ किया। इस प्रस्तुति में उन्होंने कृष्ण के मनोहर रूपों का वर्णन हस्त मुद्राओं और भंगिमाओं के जरिए दशार्या। रचना ‘जय गोपिका जय मुरलीधर’ को वेंकटेश्वरन ने जितनी तन्मयता से गाया, उतनी ही सुघड़ता से प्रिया ने भावों को विवेचित किया। उनकी प्रस्तुति में परिपक्वता दिखी। उनकी अगली पेशकश पद्म थी।

रचना ‘परिमाणिमुखी पद्मनाभपदे’ राग आवेरी और मिश्र चापू ताल में निबद्ध थी। इसमें नृत्यांगना प्रिया ने पद्मनाभ के प्रति नायिका के भावों को संचारी भाव के जरिए निरूपित किया। उन्होंने अपनी प्रस्तुति का समापन तिल्लाना से किया। यह राग आनंदभैरवी और आति ताल में निबद्ध था। उनकी प्रस्तुति मनोरम थी।
कथक नृत्य में ठुमरी, दादरा के अलावा, नई रचनाओं पर नृत्य पेश करना चुनौतीपूर्ण होता है। अक्सर, कथक नृत्य में महाराजा स्वाति तिरुनाल की रचनाओं को पिरोया गया। इसे नृत्य युगल नलिनी व कमलिनी ने पेश किया।

उन्होंने रचना ‘यमुना किनारे कदंब तले मोहना’ को पेश किया। यह रचना राग चारूकेशी और तीन ताल में निबद्ध थी। उन्होंने छंद, तिहाइयों, टुकड़े व परणों के जरिए अपने नृत्य को प्रभावपूर्ण बनाया। उनकी अगली प्रस्तुति तराना थी। यह राग विभास और कहरवा व तीन ताल में निबद्ध थी। कथक नृत्यांगना कमलिनी और नलिनी के नृत्य में बनारस घराने की बानगी बखूबी दिखती है।

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