बिल्लियां क्या इंसानों से बात कर सकती हैं? क्या आसमान से मछलियां बरस सकती हैं? क्या जंगल के किसी छोर से दूसरी दुनिया का दरवाजा खुल सकता है? इन सवालों के जवाब जैसा जादुई यथार्थ है काफ्का तिमुरा की दुनिया में। ‘काफ्का ऑन द शोर’ हारुकी मुराकामी की एक ऐसी रचना है जो जीवन के विरोधाभासों को एक कुंजी की तरह समेटती है। काफ्का तिमुरा एक पंद्रह साल का किशोर है। मुराकामी अपनी खास शैली में इस किशोर किरदार के जरिए नियति और पहचान जैसे कठोर सवालों से सामना करवाते हैं।
काफ्का एक ऐसा किशोर पात्र है, जिसे समझने की प्रक्रिया में पाठक खुद को परिपक्व महसूस करते हैं। इस उपन्यास को लेकर हर पाठक का अपना खास पाठ होता है। साहित्यिक बाल किरदारों की तरह काफ्का भी अपनी उम्र के अनुपात में बहुत गंभीर लगता है। उसका अकेलापन उसे आत्मविश्लेषण के अध्यायों से गुजारता है। उपन्यास की शुरुआत में ‘क्रो’ काफ्का से कहता है—“कभी-कभी किस्मत किसी रेत की आंधी की तरह होती है।”
काफ्का की मां उसे चार साल की उम्र में अकेला छोड़कर चली गई है। मां के प्यार से वंचित काफ्का का कोई भावनात्मक सहारा नहीं है। अपना साथ देने के लिए वह एक काल्पनिक दोस्त तैयार करता है, जिसे ‘द बॉय नेम्ड क्रो’ कहा जाता है। सबसे अहम बात यह है कि मुराकामी ने काफ्का को पारंपरिक बाल नायक की तरह नहीं गढ़ा है। वह न तो आम कहानियों का चंचल बालक है, न हैरी पॉटर की तरह साहसी, और न उसके पास अलादीन की तरह जादुई कारनामे करने वाला कोई चिराग है।
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इस दुनिया की व्यवस्थागत संरचना की सबसे छोटी इकाई परिवार है। काफ्का के जरिए पाठक परिवार की अनुपस्थिति में एक किशोर की मनोवैज्ञानिक यात्रा से रूबरू होते हैं। मां की अनुपस्थिति में बच्चा अपने मन से बात करता है। जीवन के अनसुलझे सवाल उसके मन में एक भुलभुलैया बनाते हैं, जिसमें वह भटकता रहता है। परिवार की एक भूमिका स्मृति का निर्माण करना भी है। एक सामान्य बचपन और मां के बिना किसी बच्चे की स्मृति और पहचान का संघर्ष मुराकामी काफ्का के जरिए दिखाते हैं।
काफ्का के अंदर कौए के रूप में एक काल्पनिक साथी है। कौए को मुराकामी ने प्रतीक के रूप में इस्तेमाल किया है। सबसे पहले तो यह काफ्का के जीवित रहने की इच्छा का प्रतीक है। वह अपने अवचेतन मन को ही अपना मार्गदर्शक बना लेता है। जब काफ्का किसी बात से डरता है तो अवचेतन का कौआ उसे निर्भीक बनने की प्रेरणा देता है। वहीं उपन्यास में जंगल को भी खुद को खोजने की यात्रा और जीवन-मृत्यु के संघर्ष के तौर पर देखा जाता है।
इन सबके बीच सवाल उठता है कि शक्ति की परिभाषा क्या है? एक क्लिष्ट बाल किरदार के जरिए मुराकामी संदेश देते हैं कि असली शक्ति अपने डर का सामना करने में है।
