‘पापा मैं बड़ी होकर आपकी रक्षा करूंगी…’। जब एक छोटी सी बच्ची मानसिक चुनौतियां झेल रहे अपने पिता के लिए यह संवाद बोलती है तो दर्शकों की आंखें भींग जाती हैं।मासूमियत, इंसानियत, दयानतदारी की कोई भाषा नहीं होती है। ये भाव जिस भी भाषा व किरदार के साथ व्यक्त हो जाएं वे लोगों के दिलों पर राज करने लगते हैं। दुनिया भर की सभ्यताओं में न्याय हमेशा से एक क्लिष्ट व्यवस्था रही है। वंचितों तक न्याय पहुंचाना हमेशा से मुश्किल रहा है।
दक्षिण कोरियाई फिल्म ‘मिरेकल इन सेल नं 7’ की कहानी ने दुनिया भर के संवेदनशील लोगों को रुलाया है। इस फिल्म का मुख्य पात्र योंग-गो मानसिक चुनौतियां झेल रहा है। एक पिता होने के बावजूद खास चिकित्सकीय वजह से योंग की समझ एक बच्चे जैसी है। लेकिन वह अपनी बेटी ये-सुंग को बेइंतहा प्यार करता है। पिता और पुत्री का जीवन बेहद अभावों से भरा है। लेकिन एक-दूसरे के प्यार के सहारे वे अपनी जिंदगी को खुशी से जीते हैं। तभी एक हादसे में योंग पर एक नन्ही बच्चे के अपहरण और हत्या का आरोप लग जाता है।
पुलिस को जब योंग की मानसिक हालत का पता चलता है तो वह चालाकी बरत कर उससे अपराध का कबूलनामा करवा लेती है। अदालत योंग को सजा-ए-मौत का हुक्म सुनाती है। योंग को जेल की सात नंबर सेल में भेज दिया जाता है।
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पहले तो जेल में बंद अन्य लोग योंग से नफरत करते हैं क्योंकि वह एक बच्ची की हत्या का दोषी है। लेकिन बाद में उन्हें योंग की मानसिक स्थिति का अहसास होता है तो उनके व्यवहार में बदलाव आ जाता है। अपनी बेटी के प्रति योंग के प्रेम को देख कर उसके जेल के साथी द्रवित हो उठते हैं। जेल के साथी योंग की बेटी को खुफिया तरीके से जेल में लाते हैं, ताकि वह अपनी बेटी से मिल सके। पिता और पुत्री के जज्बे को इस संवाद से समझा जा सकता है-अगर हम साथ हैं तो कोई जगह जेल नहीं लगती है।
ये-सुंग ठान लेती है कि उसे अपने पिता की रक्षा करनी है। जिस व्यवस्था ने उसके पिता को जेल भेजा, वह उसी का अध्ययन करती है। ये कानून की पढ़ाई कर वकील बनती है और अपने पिता को झूठे अपराध से बेगुनाह साबित करने की लड़ाई लड़ती है।
इस फिल्म में ये का किरदार निभाने वाली कलाकार कल-सो-वोन दर्शकों पर अपना भरपूर प्रभाव छोड़ती है। मानसिक चुनौतियों को अपने अभिनय से परदे पर साकार करने के लिए अभिनेता रियु सेउंग रियांग को भी समीक्षकों की जबर्दस्त सराहना मिली। इसे दुनिया की श्रेष्ठ भावनात्मक फिल्मों में से एक माना जाता है।
दक्षिण कोरिया में यह फिल्म इतनी लोकप्रिय हुई कि इसके कई ‘रीमेक’ बने। जब दो लोग एक-दूसरे से बिना अपेक्षाओं के नि:स्वार्थ प्यार करते हैं तो यही प्रेम उनके किरदार की मजबूती भी बन जाती है। पिता-पुत्री का प्रेम ही उन्हें इतनी मजबूती देता है कि वे व्यवस्था से टकरा कर इंसाफ हासिल करते हैं।
