Yakub Memon death

फांसी के बहाने

आखिरकार 1993 में हुए मुंबई बम धमाकों के दोषी याकूब मेमन को फांसी दे दी गई। इस फांसी को रुकवाने के लिए देश की कई संस्थाएं और लोग लगे हुए थे।

फांसी का फैसला

तमाम कानूनी जद्दोजहद के बाद आखिरकार याकूब मेमन को फांसी दे दी गई। उसे 1993 के मुंबई बम विस्फोटों का दोषी पाया गया था। टाडा अदालत ने पहले ही उसका दोष सिद्ध कर दिया था। फिर सर्वोच्च न्यायालय ने उसकी फांसी की सजा बरकरार रखी। स्वाभाविक ही न सिर्फ याकूब ने अपने स्तर से, बल्कि मौत की सजा का विरोध करने वाले अनेक लोगों ने इसे रोकने का प्रयास किया।

याकूब मेमन की फांसी पर कांग्रेस नेताओं के बयानों से भड़का विवाद

विवाद पैदा करते हुए, कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने आज कहा कि याकूब मेमन मामले में दिखाई गयी ‘‘तत्परता’’ के बाद सरकार और न्यायपालिका की साख दांव पर है, जबकि उनकी पार्टी के सांसद शशि थरूर ने अपराध रोकने के लिए मृत्युदंड के औचित्य पर सवाल उठाया।

करीब 22 साल पुराने मामले याकूब मेमन का घटनाक्रम यहां पढ़ें…

करीब 22 साल पहले मुंबई को हिलाकर रख देने वाले एक के बाद एक हुए 12 सिलसिलेवार बम विस्फोटों के मामले में मौत की सजा पाने वाले दोषी याकूब मेमन को उच्चतम न्यायालय द्वारा फांसी पर रोक लगाने की उसकी याचिका खारिज किए जाने के बाद आज सुबह फांसी दे दी गई।

SC की पीठ में याकूब की याचिका पर मतभेद, प्रधान न्यायाधीश को भेजा मामला

उच्चतम न्यायालय की दो न्यायाधीशों की एक पीठ ने आज याकूब अब्दुल रजाक मेमन की उस याचिका पर खंडित निर्णय दिया जिसमें उसने 1993 के मुंबई बम विस्फोट मामले में 30 जुलाई को निर्धारित अपनी फांसी पर रोक लगाने का आग्रह किया है । पीठ ने मामला प्रधान न्यायाधीश को भेज दिया ।

जस्‍ट नाउ
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