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बुंदेलखंड में मेड़बंदी यज्ञ रथ से रुकेंगी वर्षा की बूंदें, जल शक्ति मंत्री की गांवों को पानीदार बनाने की अहम पहल

वर्षा बूंदों को खेत में रोकने के लिए उत्तर प्रदेश के जल शक्ति मंत्री डॉ. महेंद्र सिंह ने देश में पहली मेड़बंदी यज्ञ यात्रा को हरी झंडी दिखाई। यह यात्रा 6 माह में बुंदेलखंड के 13 जिलों के 111 गांवों में जाएगी।

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सूखे बुंदेलखंड में 21 वर्षों की लगातार मेहनत रंग लाई और जखनी के किसानों ने पिछले वर्ष 21000 हजार कुंटल बासमती धान और 13000 हजार कुंटल गेहूं का उत्पादन किया।

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विभिन्न तकनीकों के माध्यम से जल संरक्षण करने, वर्षा जल रोकने और संग्रहण करने के क्षेत्र में काम करने वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं और संस्थाओं में इस पुरस्कार के लिए जखनी जलग्राम समेत एशिया के 50 लोगों का चयन किया गया।

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पीएम मोदी ने अपने दूसरे कार्यकाल के दौरान बुंदेलखंड के बांदा में चुनाव प्रचार के बीच जल संकट से निपटने के लिए जलशक्ति मंत्रालय बनाने की घोषणा की थी। चुनाव जीतने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जल शक्ति मंत्रालय का गठन किया और इसकी घोषणा बुंदेलखंड के ही झांसी में की।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने परंपरागत तरीके से वर्षा जल को रोकने के लिए देशभर के प्रधानों को पत्र लिखा था। जखनी की भू जल संरक्षण विधि को प्रधानमंत्री के पत्र ने राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दी।

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नदियों का संकट में होना आमजन के लिए भी संकट का कारण बन सकता है। सन 1951 में हमारे यहां प्रतिव्यक्ति चौदह हजार एक सौ अस्सी लीटर पानी सहजता से उपलब्ध था। लेकिन अनुमान है कि सन 2050 तक पानी की उपलब्धता तीन हजार एक सौ बीस लीटर प्रतिव्यक्ति ही रह जाएगी। यह स्थिति डराती है।

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नीति आयोग की प्रेरणा से ऋषि कुल आश्रम समिति का प्रयास। आसपास के गांवों-क्षेत्रों में परंपरागत विधि और जखनी मॉडल से सूख रहीं नदियों, तालाबों काे पानीदार बनाया जाएगा।

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बुंदेलखंड के जखनी गांव में जहां पहले पानी की भारी कमी से लोग परेशान रहते थे, खेती नहीं होती थी और बेरोजगारी के चलते भुखमरी का माहौल था, वहां आलम यह है कि गांव का हर तालाब पानी से लबालब है, कुंओं का जलस्तर ऊपर से एक फीट तक है, खेतों में नमी है।

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केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय और केंद्रीय भूजल बोर्ड के मुताबिक देश के ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों की 85 फीसद से ज्यादा घरेलू जरूरतों के लिए भूमिगत जल ही एकमात्र स्रोत है।

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खेत में मेड़, मेड़ पर पेड़ की परंपरागत तकनीकी से वर्षा बूंदों को रोककर जलस्तर बढ़ाने की कवायद ने यह साबित कर दिया कि जल में कितनी ताकत है। इसकी वजह से जलग्राम जखनी एक नया शोधकेंद्र साबित हो रहा है।

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केंद्रीय भूजल बोर्ड के मुताबिक सूखाग्रस्त क्षेत्र बांदा के भूजलस्तर में मेड़बंदी तकनीकी से एक मीटर 38 सेंटीमीटर का इजाफा हुआ है। अब देशभर में इसे अपनाने की सलाह दी जा रही है।

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वे लोग वैज्ञानिक नहीं हैं, न ही किसी सरकार या संस्था से अनुदान लिए हैं और न ही जल संरक्षण के किसी विशेष शोध समूह (Research Team) का ही हिस्सा हैं, लेकिन खुद के प्रयासों से उन्होंने उस क्षेत्र को हरा-भरा बना दिया, जिसे सिर्फ सूखी, बंजर और पथरीली भूमि के लिए जाना जाता था।

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