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भारत में टीका लगवाने वालों की संख्या एक करोड़ पार, अमेरिका के बाद दुनिया में दूसरी सबसे तेज गति से टीकाकरण

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक इस संख्या तक पहुंचने में भारत को 34 दिन लगे, जबकि अमेरिका को 31 दिन और ब्रिटेन को 56 दिन लगे।

संपादकीय: राहत के बावजूद

अगर बचाव के घोषित उपायों पर सही तरीके से अमल जारी रहा तो उम्मीद की जानी चाहिए कि देश जल्दी ही इस खतरे से पार निकल कर फिर से विकास की सामान्य रफ्तार पकड़ लेगा।

संपादकीय: भरोसे की खातिर

कोवैक्सीन बनाने वाली संस्था भारत बायोटेक ने एक निर्देश जारी करते हुए कहा कि जिन लोगों की प्रतिरोधक क्षमता कमजोर है या कोई बीमारी है, उन्हें यह टीका नहीं लगवाना चाहिए।

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केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने कहा कि पहले दिन भारत में 2,07,229 लोगों को टीके दिए गए जबकि अमेरिका में पहले दिन 79,458 लोगों का टीकाकरण हुआ। ब्रिटेन में पहले दिन 19,700 और फ्रांस में केवल 73 लोगों को टीके दिए गए।

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एम्स के निदेशक रणदीप गुलेरिया के अनुसार शाम चार बजे के बाद सुरक्षा गार्ड को टीका लगाया गया। उसके 20 मिनट बाद उसकी धड़कन बढ़ गई तथा शरीर पर चकत्ते हो गए जिसके बाद उसे अस्पताल में भर्ती किया गया।

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(एम्स) में शनिवार को कोवैक्सीन का टीका लगवाने वाले स्वास्थ्यकर्मियों के लिए एक सहमति पत्र (कंसेंट फॉर्म) बनाया गया था, जिस पर उन्हें हस्ताक्षर करने थे।

लक्ष्य से एक लाख कम लोगों ने लगवाए टीके, पहले दिन 1,91,181 लोग पहुंचे

लगभग सभी राज्यों में टीके के लिए पंजीकृत लोगों से कम लोग टीका लगवाने पहुंचे। मंत्रालय के मुताबिक सबसे अधिक टीका केंद्र आंध्र प्रदेश में बनाए गए।

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वैक्सीनेशन को लेकर देश के सामने चुनौतियां भी हैं, लेकिन टीकाकरण का अनुभव भी हिंदुस्तान को ही सबसे ज्यादा है। अभी कंपनियों ने अपनी वैक्सीन की कीमत जारी की है, लेकिन वक्त के साथ कीमत को लेकर सरकार का फैसला बदल भी सकता है।

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दुनियाभर में पाकिस्तान और अफगानिस्तान ऐसे देश हैं, जहां पोलियो महामारी अभी भी मौजूद है। इससे पहले भी टीकाकरण के प्रयासों में आतंकवादी बाधा पहुंचाते रहे है।

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कहा कि कोविड-19 टीके के लिए अत्याधुनिक डिजिटल मंच ‘कोविन’ बना लिया है। टीकाकरण के बाद किसी प्रतिकूल घटनाक्रम की आशंका जैसी स्थिति में टीकों की सुरक्षा में विश्वास कायम रखना हमारी रणनीति का महत्त्वपूर्ण हिस्सा है।

दूसरी नजरः महामारी, टीका और विवाद

दुनिया में छह टीके हैं, जिन्हें मंजूरी मिल चुकी है। रूस और चीन के टीकों के बारे में हम ज्यादा नहीं जानते हैं, हालांकि कई देशों में इन्हें बड़े पैमाने पर भेजा और उपयोग किया जा रहा है।

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हमारे देश में सबसे पहले हेल्थ और फ्रंटलाइन वर्कर्स को टीके लगाए जाएंगे। इसके बाद 50 साल से अधिक उम्र के लोगों को टीका लगाया जाएगा। कमजोर, बुजुर्ग और फ्रंटलाइन वर्कर्स को सबसे पहले कोरोना वैक्सीन दी जाएगी,

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उन्होंने बड़े पैमाने पर टीकाकरण अभियान की तैयारियों के सिलसिले में शनिवार को देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में हुए पूर्वाभ्यास के बीच यह एलान किया।

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एक दिन पहले ही सरकार की तरफ से बनाए गए एक्सपर्ट पैनल ने सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया की वैक्सीन को मंजूरी के लिए DCGA के पास भेज दिया।

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आज भी सोशल डिस्टेंसिंग, मास्क और हाथों की सफाई जरूरी है। इसे बनाए रखना है।

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