African indigenous tribes and rituals
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पूरी जिंदगी में सिर्फ 1 बार नहाती हैं इस जनजाति की महिलाएं, फिर भी मानी जाती हैं सबसे खूबसूरत

Himba Tribe: नहाना एक सामान्य दिनचर्या है जिसे हम में से अधिकांश लोग रोज करते हैं, लेकिन दुनिया में कुछ…

Jansatta Dunia Mere Aage, jansatta Epaper
दुनिया मेरे आगे: बिखरता चूल्हा, सिमटता आंगन, खत्म हो रही परिवारिक परंपराएं और ग्रामीण संस्कृति

परिवार के सिमटते आंगन का एक मुख्य कारण आर्थिक तनाव भी है, क्योंकि महंगाई की मार के बावजूद आवश्यकता की…

Strange Wedding Rituals Around the World
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यहां शादी के बाद 3 दिन तक टॉयलेट नहीं जा सकती दुल्हन, इस अजीबो-गरीब रिवाज की वजह जानकर हैरान रह जाएंगे

Unusual Marriage Traditions: निया भर में शादी से जुड़े कुछ अजीब और विचित्र रिवाज होते हैं जो अक्सर हैरान कर…

जनसत्ता- दुनिया मेरे आगे
दुनिया मेरे आगे: परंपराओं से दूर हो रहे लोग, शहरीकरण के दौर में लोक से हो रहा मोहभंग

गनीमत है कि अभी भी गांव की बची-खुची आबादी शहरी व्यामोह में नहीं फंसी। आज भी सुदूर गांवों या वनप्रांतर…

Jansatta Dunia Mere Aage, jansatta Epaper
दुनिया मेरे आगे: स्वर का संसार और ध्वनि का विकास, प्रकृति की मधुरता से यांत्रिक शोर तक का सफर

अशोक कुमार बता रहे हैं कि जो ध्वनि हमारे कानों को मधुर और मीठा लगे, उसे संगीत माना गया है,…

Letter| relative| write
दुनिया मेरे आगे: अहं का विसर्जन, चिट्ठियों का जमाना और मन की कसक

चिट्ठियों को देखे मानो जमाना हो गया है। चिट्ठियों का यों इतिहास हो जाना दुखद है। इनका कोई संग्रहालय भी…

Krishna| Religion
समय की अवधारणा और अवतार लीला में बदल जाते हैं

वेदों, उपनिषदों और षड्दर्शनों में समय या काल की बहुत सूक्ष्म व्याख्या मिलती है। उसे बौद्ध सर्वास्तिवाद ने अभूतपूर्व ऊंचाई…

Jansatta Editorial, Child Marriage
संपादकीय: खेलने की उम्र में परिपक्व बच्चे, कुप्रथा के खिलाफ पेश की जागरूकता की मिसाल

नोएडा में स्कूली बच्चियों ने अपनी एक सहपाठी के लिए जो किया, उससे उम्मीद बंधती है कि लोग अपने आसपास…

chhath festival
दुनिया मेरे आगे: लोकचेतना के समांतर, जानिए परंपराओं से क्यों जुड़ी हैं स्त्रियां और प्रतीक

आज न पुराने रूप में संयुक्त परिवार हैं, न ही नगरों में वह सामुदायिक जीवन और न कृषि सभ्यता के…

Festival | Indian culture
दुनिया मेरे आगे: चिराग का हो रहा बाजारीकरण, कब समझेंगे जीवन में उजाले और उत्सवप्रियता का महत्व?

कंगूरे के हर घुमाव में भावनाएं बिखरी होती थीं। हालांकि आंगन से होकर घर में प्रवेश करने वाला हर शख्स…

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