Tata Nano

रतन टाटा के ड्रीम प्रोजेक्ट Tata Nano का बुरा हाल! साल 2019 में बिकी महज 1 कार, जानें क्या है वजह

बता दें, इस कार की 2019 में मात्र 1 यूनिट सेल की गई है। वहीं कंपनी ने दिसंबर में इस कार की एक भी यूनिट का प्रोडक्शन नहीं किया है। लखटकिया नैनो को 2009 में मात्र 1 लाख की कीमत के साथ लॉन्च किया गया था।

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Ratan Tata महज 21 साल की उम्र में टाटा समूह के चेयरमैन बने। जिन्होंने अपनी काबिलियत के दम पर टाटा को नई उंचाईयों तक पहुंचाया।

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Tata Motors ने घरेलु बाजार में Tata Nano को बतौर लखटकिया कार पेश किया था। लेकिन समय के साथ इस कार की कीमत बढ़ती गई जो कि अब 2.36 लाख रुपये तक पहुंच गई है। ऐसे में इस कीमत में बाजार में और भी कारें मौजूद हैं जिन्हें ग्राहक पसंद कर रहे हैं।

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ये पंखे किसी वास्तविक हेलिकाप्टर की ही तरह चलते हैं लेकिन ये इतनी फोर्स जेनरेट नहीं कर सकते हैं कि वो भारी भरकम कार को हवा में उठा सकें।

Tata Nano: रतन टाटा के ड्रीम प्रोजेक्ट का बुरा हाल! 6 महीने में बिकी महज एक कार, जनवरी से बंद है प्रोडक्शन

Tata Nano की हालत काफी खस्ता है। Tata Nano की हालत काफी खस्ता है। फरवरी से कंपनी ने एक भी Nano कार नहीं बेची है। कंपनी ने शेयर बाजार को भेजी सूचना में यह जानकारी दी है।

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इस साल 2019 में भी कई वाहन जो कि अपने समय में भारतीय सड़क पर धूम मचा चुके हैं अब उनकी चमक फीकी सी पड़ चुकी है। अब वाहन निर्माता कंपनियां उनका उत्पादन और बिक्री बंद करने जा रही है।

अब इतिहास का हिस्‍सा होगी टाटा की लखटकिया नैनो, सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला बना वजह

टाटा की नैनो को अगले साल अप्रैल में अलविदा कहा जा सकता है। रतन टाटा की इस ड्रीम कार को भारत स्टेज-छह पर्यावरण मानकों के अनुरूप उन्नत बनाने की टाटा मोटर्स की कोई योजना नहीं है।

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विवाद मचने के बाद, टाटा ने 2008 में अपनी नैनो फैक्‍ट्री को कहीं और लगाने की प्रक्रिया शुरू की।‍

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जिन लोगों ने कारखाने के लिए अपनी जमीन टाटा को दी थी, वे लोग आज भी सिंगुर नैनो कारखाना बनने का सपना लिए हुए हैं।

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हेमा ने कार के साथ अपनी तस्‍वीर ट्वीट करते हुए लिखा कि इसे वह खुद चला सकेंगी और क्षेत्र में अपना राजनीतिक काम आसानी से निपटा सकेंगी।

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