जीवन की विफलताएं, कमजोरियां संघर्ष हमारी साधना का रहस्य हैं।
शब्द बहुत हैं, मगर भावनाएं कम पड़ गई हैं, संवेदनाओं के शहर में अकेला होता मनुष्य | दुनिया मेरे आगे

जनसत्ता अखबार के स्तम्भ ‘दुनिया मेरे आगे’ में आज पढ़ें शोभा जैन के विचार।

Performative Grief, Social Media Sentiments
दुख का तमाशा और किराए की संवेदनाएं: शोर, दिखावे और बनावटी आंसुओं के दौर में जी रहे हैं हम | दुनिया मेरे आगे

जनसत्ता अखबार के स्तम्भ ‘दुनिया मेरे आगे’ में आज पढ़ें सुरेश कुमार मिश्रा ‘उरतृप्त’ के विचार।

intellectual crisis society, decline of intellectualism India, modern society mental imbalance
बौद्धिकता का संकट: विश्वविद्यालयों से समाज तक फैलता मानसिक अवसाद | विचार

बौद्धिकता का ह्रास राजनीति और संकीर्णतावादी ताकतों को निष्कंटक बना देता है और समाज की नकारात्मक ताकतों को प्रतिष्ठा प्राप्त…

Greater Noida Woman Trapped with Child in High Rise Society Elevator No Assistance Received for 40 Minutes
ग्रेटर नोएडा: हाई राइज सोसाइटी की लिफ्ट में बच्चे संग फंसी महिला, 40 मिनट तक नहीं मिली मदद, लापरवाही पर उठे सवाल

नोएडा और ग्रेटर नोएडा वेस्ट में लिफ्ट खराब होने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। यहां की सोसाइटी में…

spiritual practice India, meditation and discipline
दुनिया मेरे आगे: जानने की जिद और उत्सुकता, कैसे एक उल्टी दिशा की पगडंडी ने बदल दी मंजिल और यादें?

जनसत्ता अखबार के स्तम्भ ‘दुनिया मेरे आगे’ में आज पढ़ें खुशी श्रीवास्तव के विचार।

Mobile Addiction, Smartphone Habit, Digital Detox, Dopamine Effect
दुनिया मेरे आगे: सिर्फ मन का एक वादा… और मोबाइल की लत से मिली आजादी, जहां वक्त भी अपना और रिश्ते भी मजबूत

सवाल है कि क्या स्मार्टफोन की इस लत से छुटकारा पाना मुश्किल है, या सिर्फ एक छोटा-सा संकल्प ही काफी…

fake vs real life, societal hypocrisy
दुनिया मेरे आगे: खोखली मुस्कान और चमक-दमक का समाज, क्या हम भूल चुके हैं असली जीवन की सादगी?

जनसत्ता अखबार के स्तम्भ ‘दुनिया मेरे आगे’ में आज पढ़ें सुरेश कुमार मिश्रा ‘उरतृप्त’ के विचार।

intelligence vs character, importance of morality
दुनिया मेरे आगे: बुद्धिमान बनाम चरित्रवान, जीवन में कामयाबी के लिए क्यों जरूरी है नैतिकता?

समाज में आज भी ऐसे बहुत से लोग मिलते हैं, जो उच्च शिक्षित नहीं हैं, लेकिन अपने उच्च नैतिक मूल्यों…

Truth of life, regret, life lessons, self realization, true love,
दुनिया मेरे आगे: एक झटका… और बदल गई जिंदगी! जिनकी कभी कद्र न की, वही बन गए सबसे अहम चीज; खोने के बाद ही दिखता है असली सच

जीवन बहुत जटिल है। कई बार सिर्फ एक झटका लगता है, एक ढलान आती है या सिर्फ एक टक्कर लगती…

हम कौन थे और क्या हो गए? जब विचारों की जगह TRP का शोर गूंजने लगा, यही है भारत का बौद्धिक पतन; पढ़ें राकेश सिन्हा का दृष्टिकोण

भारत अपने वैशिष्ट्य को कभी छोड़ता नहीं है। स्वाध्याय, सत्संग और शास्त्रार्थ की परंपरा इतनी गहरी और प्राचीन है कि…

Constructive Ideas, Mental Clarity, Thought Leadership, Inner Growth
दुनिया मेरे आगे: विचारों का मंथन या भटकाव, सुंदर समाज की राह में सोच का संतुलन क्यों जरूरी?

जब हम अपनी दुनिया, अपने समाज को लेकर सपना देखते हैं, जिसमें हम सुंदर, समृद्ध और स्वस्थ समाज की परिकल्पना…

अपडेट