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दुनिया मेरे आगे: दान का सुख

हमारे पूर्वज शुरू से ही हमारी जीवनशैली को बेहतर बनाने के लिए ज्ञान की अनगिनत बातें बताते रहे हैं। अनेक बोधकथाएं ऐसी हैं, जिन्हें...

दुनिया मेरे आगे: नन्ही मेरी बिटिया होगी

मुझे नहीं पता कि लोगों पर सामाजिक खबरों का क्या असर होता है और ऐसी खबरों से लोग समाज के दिशा-दशा का ज्ञान कर...

दुनिया मेरे आगे: बदलाव की कसौटी

‘नया’ शब्द में ही कुछ ऐसा जादू है कि लगता है सब कुछ बेहतर होने वाला है। गजब की ताजगी, ऊर्जा से भरा शब्द...

दुनिया मेरे आगे: गदगद मन, टपकते आंसू

आज फिर आपसे संवाद करने का शुभ अवसर प्राप्त हो रहा है। सच जानिए, जब-जब आपसे अपनी बात साझा करने का मौका मिलता है,...

दुनिया मेरे आगे: स्नेह के संबोधन

सन 1893 में शिकागो में आयोजित विश्व धर्म संसद में स्वामी विवेकानंद ने जब अपने श्रोताओं को ‘मेरे अमेरिकी बहनों और भाइयों’ कह कर...

दुनिया मेरे आगे: वक्त का कारवां

यह समय का कालचक्र है। वक्त किस तरह से बीत जाता है, पता ही नहीं चलता। समय के शिलालेख इतिहास की दास्तान हो जाते...

दुनिया मेरे आगे: कृत्रिमता से जूझते मासूम

इन दिनों बच्चियों के जीवन से गुड़िया खो-सी गई है। पहले उनके जीवन में गुड्डे भी होते थे और गुड़िया भी। उनके जीवन की...

दुनिया मेरे आगे: धूप के रंग

धूप के दिन आ गए हैं। धूप में बैठने और सेंकने के दिन। और अगर किसी ऐसी जगह में हों जहां, पेड़-पौधे-फूल, तितलियां, गिलहरियां...

दुनिया मेरे आगे: घुमक्कड़ी का आनंद

कुदरत ने हम सबको घुमक्कड़ी करने के लिए ही दो पैर दिए हैं, पर ज्ञान-विज्ञान और तकनीक के विस्तार ने पैर-पैदल घुमक्कड़ी को पीछे...

दुनिया मेरे आगे: अवसाद के पांव

आजकल ‘अवसाद’ शब्द चलन में है! कहीं भी और किसी भी व्यक्ति के हावभाव को देख कर यह शब्द प्रयोग में लाया जाता है!...

जीवन जगत: दिलों को जोड़िए, कुंठा को भगाइए

दरअसल जब किसी भी तरह की कोई कुंठा हमारे मन में घर कर लेती है तो हमारी मानसिकता भी संकुचित हो जाती है। कुंठित...

सार-संसार: संयम, सरलता और सहजता का त्रिगुण

मनुष्य ने सब कुछ विशेष पाने और बनने की होड़ में जीवन को इतना जटिल बना दिया है कि जीवन कि मधुरता, हर्ष, उल्लास...

दुनिया मेरे आगे : जरा देख के चलो

आज बेतहाशा भागती दुनिया में दुर्घटनाएं आम हो गईं हैं। आज के समाचार पत्र ‘लापरवाही से वाहन चलाने से हुई दुर्घटना’, ‘नशे में धुत...

दुनिया मेरे आगे: बाजार की नई चमक

खरीदारी एक बड़ा ‘कैथारसिस’ होता है और यह अवसाद से भी मुक्त करता है। आज जब घरों में एकल परिवारों में संवाद की स्थिति...

दुनिया मेरे आगे: विस्तार की सिकुड़ती गलियां

अभी तक घर के बच्चे दादा-दादी के गोद में सोते और नाना-नानी से परियों की कहानी सुनते। परंपरावाद और रूढ़िवाद अपनी जगह पर...

दुनिया मेरे आगे: विकल्प का हासिल

शिक्षा संस्थानों के नियामकों ने बिना अधिक सोच-विचार किए ही ई-शिक्षा के कार्यक्रम जारी कर दिए। अब भी इस मसले पर असमंजस जारी है...

किस्सों से जुड़ा मनोविज्ञान

मनोवैज्ञानिकों का भी कहना है कि जब आप किस्सों में डूब जाते हैं तो आप असल में दूसरे की जिंदगी को जी रहे होते...

लीक पुरानी सीख नई

हमारी लोक-परंपराओं में किस्से-कहानियों के जरिए लोकमानस भी तैयार होता रहा है। यह लीक पहले की तरह अमिट रहनी चाहिए। यह समझ जहां कहीं...

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