rakesh sinha

राकेश सिन्हा बीजेपी के पूर्व राज्यसभा सांसद हैं। वे डीयू में राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर रहे हैं। आरएसएस पर उनके शोध और लेखन ने उन्हें एक प्रमुख विचारक के रूप में स्थापित किया। राकेश सिन्हा कई राष्ट्रीय टीवी चैनलों पर बहस में अपनी सटीक और स्पष्ट विचारधारा के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने राष्ट्रीय मुद्दों पर अनेक लेख और पुस्तकें लिखी हैं


जिमखाना क्लब ने सांकेतिक तौर पर भी लोकहित में ऐसा कुछ नहीं किया, जिससे इसको नैतिक सरोकारों से जोड़ा जा सके।
जिमखाना क्लब से खुली बहस: क्या लोकतंत्र में भी बची रहनी चाहिए ‘खास’ लोगों की दुनिया?

क्लब को करोड़ों रुपए की वार्षिक आमदनी सदस्यों की विलासितापूर्ण गतिविधियों और सदस्यता शुल्क से होती है। पर इसी राजधानी…

भारतीय संस्कृति, मंदिर, लोक परंपराओं और आधुनिक शहरी जीवन के बीच ‘स्वैच्छिक अज्ञानता’ को दर्शाता प्रतीकात्मक दृश्य।
भारत की विविधता से दूर होती नई पीढ़ी, अपनी विरासत को जानने की जिज्ञासा क्यों खो रही है?

मैक्समूलर ने 1882 में अपने भाषणों की शृंखला में बताया था कि ‘भारत: हमें क्या सिखा सकता है’, तो एलएम…

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बौद्धिकता का संकट: विश्वविद्यालयों से समाज तक फैलता मानसिक अवसाद | विचार

बौद्धिकता का ह्रास राजनीति और संकीर्णतावादी ताकतों को निष्कंटक बना देता है और समाज की नकारात्मक ताकतों को प्रतिष्ठा प्राप्त…

महिला आरक्षण, women reservation India, नारी भागीदारी, Indian politics women
राजनीति में महिलाओं की राह मुश्किल, क्या आरक्षण बनेगा पितृसत्ता को तोड़ने का निर्णायक हथियार?

लोकतंत्र का मूल भाव योग्यता की खोज और नेतृत्व की पात्रता का सृजन करना होता है। इसके इतर होने पर…

Narendra Modi, opposition relations, parliamentary decorum, verbal violence in politics, crisis of democracy
राकेश सिन्हा के विचार: आलोचना से नफरत तक, मोदी–विपक्ष संबंध और संसदीय जनतंत्र का नैतिक संकट

प्रधानमंत्रियों के प्रति नापसंदगी पहले भी व्यक्त होती रही है। अटल बिहारी वाजपेयी को ‘संघ का मुखौटा’, इंदिरा गांधी को…

The crisis of rationalism, materialism and individualism
विचार: ट्रंप या पुतिन नहीं, हमारी सोच है परेशानियों की वजह, जिस रास्ते पर दुनिया चल रही है, खतरनाक है वह

विकसित लोकतंत्र का दावा करने वाले देश के शीर्ष पर बैठे राजनेता मध्ययुगीन राजाओं की तरह व्यवहार कर रहे हैं।…

Somnath temple debate, Nehru vs Modi ideology
विचार: सोमनाथ से 2047 तक, नेहरू बनाम मोदी की वैचारिक लड़ाई में भारत की असली पहचान क्या है?

सोमनाथ मंदिर के बहाने नेहरू और नरेंद्र मोदी की वैचारिक टकराहट भारत की संस्कृति, राष्ट्रबोध और राज्य की भूमिका पर…

Bihar Mandate 2025, Women Voters Bihar, Welfare Model India
राहुल–तेजस्वी अब आउटडेटेड मॉडल… जनता का इशारा साफ, बदलता बिहार एक नई कहानी कह रहा है

बिहार जनादेश ने सामाजिक यथास्थिति तोड़ी। कल्याणकारी योजनाओं, महिलाओं की अभूतपूर्व भागीदारी और नए आर्थिक वर्गों की चेतना ने राजनीति…

Satyabhakt, Indian Communism, Communist Party of India, Left Movement
सत्यभक्त कौन थे और क्यों भारत का कम्युनिस्ट इतिहास उन्हें भूल गया? सोवियतवाद के साए में वाम आंदोलन की असलियत

अंधभक्ति व्यक्ति या समुदाय को अनावश्यक समर्पण की प्रेरणा देती है और वह इसे अपने व्यक्ति की उपलब्धि मानने लगता…

Indian politics decline, political culture India, Atal Bihari Vajpayee friendship
गाली से राजनीति चमक रही है या लोकतंत्र डूब रहा है? राकेश सिन्हा पूछते हैं – आखिर कहां जा रहे हैं हम?

राकेश सिन्हा ने भारतीय राजनीति में गिरते स्तर पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की मां को गाली…

Pandit Nehru era, Mountbatten allowance, Mountbatten salary
जनता भूख से मर रही थी, माउंटबेटन को दिया जा रहा था 2000 गुना ज्यादा भत्ता; प्रधानमंत्री नेहरू ने कहा- कुछ भी गलत नहीं है

अंग्रेजों के जाते वक्त आधे से ज्यादा भारतीय गरीबी रेखा से नीचे थे। 1930 में उनकी रोज़ाना आमदनी सिर्फ दो…

Bihar politics, caste equations, Jayaprakash Narayan, Lohia ideology
जयप्रकाश, लोहिया, कर्पूरी, रेणु के बिहार में जात-पात क्यों बना सबसे बड़ी ताकत? क्या ‘संपूर्ण क्रांति की आवाज’ फिर पूछेगी- ‘मैं कौन हूं?’

राजनीति का अपना स्वभाव होता है। वह सुलभ और आसान रास्ते से सफर करना चाहती है। जाति की पीठ की…

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