rajesh jharpure

कहानी : वह फिर नहीं लौटा

खूब अच्छी सुबह, गुलाब के फूलों की तरह खिली हुई सुबह, चिड़ियों की चहचहाट से भरी सुबह, तुलसी चौरे पर जल चढ़ाती सुबह, दादी मां के हृदय से उठते पवित्र मंत्र से गूंजती सुबह, मंत्र उच्चारण से आसपास के घरों में आध्यात्मिक चेतना को अंतश्चेतना में भिगो देने वाली सुबह, कुएं में उतरती-डूबती बाल्टी की रस्सी पकड़ कर खींचती सुबह, कुएं की घिर्रियों की चूं-चहट के साथ मन में संगीत घोलती सुबह, सचमुच की सुबह, खूब अच्छी सुबह, अब सुबह में नहीं होती।

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