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होली: फूलों से रंगों तक महीने भर की उमंग

भवानी प्रसाद मिश्र की लंबी कविता सतपुड़ा के घने जंगल की कुछ पंक्तियों में होली की खुमारी दिखती है – जबकि होली पास आती/सरसराती घास गाती/और महुए से लपकती/मत्त करती बास आती…। यानी कि पूरी प्रकृति होली के रंग में रंग जाती है। प्रकृति और फूलों से शुरू हुई होली रंग और गुलाल तक पहुंची और अब तो फेसबुक से लेकर ट्वीटर तक पर होली अपने ढंग से ट्रेंड कर रही है। पेश है जनसत्ता टीम की जुटाई यह रिपोर्ट जिसमें कोशिश की गई है कि शास्त्रों से लेकर मुगलकाल तक, देश ले लेकर विदेश तक की होली की चर्चा हो।