Markandey Katju

नीरव मोदी की तरफ से पूर्व जज काटजू की गवाही, यूके कोर्ट ने कहा- आप भरोसे के क़ाबिल नहीं

ब्रिटिश कोर्ट के न्यायाधीश का मानना है कि यह पूर्व वरिष्ठ न्यायिक सहकर्मियों के प्रति असंतोष लिए हुए थे और उसके कुछ हिस्सों को “हैरान करने वाला, अनुचित और पूरी तरह असंवेदनशील तुलना” करार दिया।

क‍िसानों का आंदोलन है भारत का ‘लॉन्‍ग मार्च’, उम्‍मीद कीज‍िए शांत‍ि से आए पर‍िवर्तन

चीनी लॉन्ग मार्च लगभग 2 साल (1934-36) तक चला। हमारा लॉन्ग मार्च संभवत: 15-20 साल तक चलेगा, जिसमें कई मोड़ और फेर आएंगे। संघर्ष के इस दौर में महान बलिदान देने होंगे।

व्हाट्सप लीक चैट मामले में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज़ बोले- अर्णब गोस्वामी का कुछ नहीं बिगड़ेगा, क्योंकि उसके आका उसके पीछे

मार्कंडे काटजू ने एक ट्वीट कर लिखा-अर्णबवा फंसा शिकंजे में व्हाट्सएप्प के पंजे में। इस पोस्ट के बाद उन्होंने एक और पोस्ट किया जिसमें उन्होंने…

किसान आंदोलन: सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज ने कहा- कमेटी कमोड जैसी, राहुल गांधी बोले- ट्रैक्टर ट्रॉली से डर रही सरकार

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज मार्कण्डेय काटजू ने कमेटी की तुलना कमोड से की है। वहीं कांग्रेस नेता राहुल गांधी का कहना है कि मोदी सरकार को किसानों की मौत से शर्मिंदगी नहीं होती है। किसानों की ट्रैक्टर परेड से शर्मिंदगी होती है।

‘कृष‍ि को बाजार के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता’

जस्टिस काटजू के मुताबिक, “भारत सरकार ने कहा है कि वह एमएसपी को बनाए रखेगी। लेकिन मौखिक या लिखित आश्वासन का मतलब कुछ भी नहीं है, क्योंकि वे बाध्यकारी नहीं हैं।”

Farmers protest: ‘खत्म न हुआ गतिरोध तो भविष्य भयावह है, कहीं ‘Bloody Sunday’ जैसा न हो’

जस्टिस काटजू के मुताबिक, “वर्तमान में सरकार उन किसानों के दबाव में है, जिन्होंने दिल्ली को घेर रखा है और इसके चलते सड़कों को अवरुद्ध कर दिया गया है। इसलिए सरकार द्वारा यह कानूनों को तुरंत निरस्त करने की संभावना नहीं है।”

जस्टिस काटजू ने पूछा सुशांत केस पर रिपब्लिक टीवी पर सैकड़ों डिबेट लेकिन किसानों के मुद्दे पर खामोशी; आने लगे ऐसे कमेंट

जस्टिस काटजू ने रिपब्लिक टीवी पर निशाना साधते हुए कहा है कि सुशांत मामले पर रिपब्लिक टीवी ने सैकड़ों डिबेट किए। वहीं बाबा राम सिंह की आत्महत्या पर एक भी डिबेट नहीं की गई।

‘क‍िसान जाग गया है, तख्‍त ह‍िला सकता है’

किसानों के आंदोलन ने पूरे परिदृश्य को बदल दिया है। इसने जाति और धर्म की सीमाओं को तोड़ दिया है और इससे ऊपर उठ गया है। इसने 1947 में आजादी के बाद पहली बार भारतीय लोगों के बीच एकता कायम की है – जो पहले केवल एक स्वप्न था I

किसानों की जिद से हिंसक हो सकता है उनका आंदोलन

मुझे भय है कि आंदोलनकारी किसानों की ओर से कठोर स्वभाव और हठी होना केवल हिंसा को ही जन्म देगा, जैसा कि जनवरी 1905 में सेंट पीटर्सबर्ग में ख़ूनी रविवार (Bloody Sunday) को हुआ था या अक्टूबर 1795 में पेरिस में वेंडीमाइरे (Vendemiare) में, जहां नेपोलियन की तोपों से ‘व्हिफ़ ऑफ ग्रेपशॉट’ (Whiff of Grapeshot) द्वारा बड़ी भीड़ को तितर-बितर कर दिया गया था।

उर्दू शायरी में इश्क की संकल्पना

हमारे ही देश में भगत सिंह, सूर्य सेन, चंद्रशेखर आज़ाद, बिस्मिल, अशफ़ाक़ुल्ला, खुदीराम बोस आदि जैसे ब्रिटिश शासन के खिलाफ़ महान स्वतंत्रता सेनानियों ने अपने इश्क़ के लिए अपनी जान दे दी, और ‘सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमरे दिल में है’ स्वतंत्रता संग्राम का गान बन गया।

कपिल स‍िब्‍बल जैसे नेताओं की बात मान कर भी नहीं उबर सकती कांग्रेस

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज की राय में कांग्रेस का वोटबैंक अब उसके साथ नहीं रह गया है। जात‍ि और धर्म के आधार पर वोट बैंक ज‍िसके पास होगा, उसी पार्टी का आज देश में भव‍िष्‍य है। ऐसे में कांग्रेस के द‍िन खत्‍म हो गए लगते हैं।

व‍िभाजन अंग्रेजों की साज‍िश थी, पाक‍िस्‍तान की अवधारणा में ही खोट

मुझे पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों (हिंदुओं, ईसाईयों और सिखों) की दुर्दशा के बारे में बोलने की ज़रूरत भी नहीं पड़ेगी , जिनके बारे में आये दिन रिपोर्ट में नियमित रूप से नाबालिक लड़कियों के जबरन धर्मांतरण, फर्जी ईशनिंदा ( blasphemy ) के आरोप और इन आरोपों पर उनकी भयानक हत्याएँ आदि की ख़बरें आती हैं।

भारत जैसे विविधता वाले देश में क्यों जरूरी है जैन धर्म का अनेकांतवाद?

भारत जैसे विविधता वाले देश में, जैन धर्म बहुत प्रासंगिक है, क्योंकि यह सहिष्णुता और धर्मनिरपेक्षता को बढ़ावा देता है, जो कि हमारे देश की प्रगति के लिए आवश्यक है…

न भारत, न पाकिस्‍तान सभ्‍य समाज कहलाने के हकदार

जब मैं सुप्रीम कोर्ट का जज था, तब एक मामले में मैं एक बेंच का हिस्सा बना। यह 2008 में ओडिशा के कंधमाल जिले में कुछ अतिवादी हिंदू तत्वों द्वारा ईसाइयों पर किए गए हमलों के विषय में था।

आजादी के बाद उर्दू को लेकर कैसे पैदा हुई गफलत? पढ़ें

वास्तव में 1947 तक उर्दू भारत के बड़े हिस्सों में शिक्षित वर्ग की आम भाषा थी, चाहे वह हिंदू, मुस्लिम या सिख हो। हमारे सभी पूर्वज (जो शिक्षित थे) भारत के बड़े हिस्सों में उर्दू जानते थे।

भारतीयों के लिए क्रिकेट है अफीम जैसा, आप होंगे इस पागलपन में शरीक, पर मैं नहीं- IPL के बीच पूर्व SC जज का पोस्ट, लोग करने लगे ऐसे-ऐसे कमेंट्स

मनोरंजन के साधनों पर निशाना साधते हुए काटजू ने आगे कहा, “दूसरे अफीम (नशे के साधन) बॉलीवुड, राजनीति, टीवी और धर्म हैं।”

PNB Scam: नीरव मोदी के पक्ष में पूर्व SC जज ने दी गवाही, कहा- भारत में न्यायपालिका का अधिकांश हिस्सा भ्रष्ट, निष्पक्ष सुनवाई का मौका नहीं; ट्रोल

भगोड़ा हीरा कारोबारी नीरव मोदी पीएनबी घोटाले में आरोपी है, सीबीआई की चार्जशीट में उसके और मेहुल चौकसी के खिलाफ 13 हजार करोड़ के घोटाले का आरोप है।

नीरव मोदी के पक्ष में गवाही देंगे पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज मार्कंडेय काटजू, कहा- भारत में नहीं मिलेगा न्याय

भगोड़ा हीरा कारोबारी नीरव मोदी पीएनबी घोटाले में आरोपी है, सीबीआई की चार्जशीट में आरोप लगाया गया है कि नीरव मोदी ने 6498 करोड़ रुपए का गबन किया।

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