मैं उत्तर प्रदेश हूं

मैं उत्तर प्रदेश हूं’ जनसत्ता की साप्ताहिक विशेष श्रृंखला है, जिसमें उत्तर प्रदेश को केवल एक राज्य या नक्शे पर बनी भौगोलिक इकाई के रूप में नहीं, बल्कि अपनी स्मृतियों, इतिहास, संस्कृति, नदियों, बोलियों, लोकजीवन और लोगों के साथ एक जीवंत पात्र के रूप में प्रस्तुत किया जाता है।


इस श्रृंखला में उत्तर प्रदेश के इतिहास और उसकी सभ्यता की यात्रा से लेकर गंगा-यमुना जैसी नदियों, अलग-अलग सांस्कृतिक क्षेत्रों, भाषाओं और बोलियों, लोकपरंपराओं, साहित्य, कला, आस्था, शहरों, गांवों, खेती, कारीगरी और सामाजिक जीवन तक के विभिन्न पहलुओं को सामने लाया जाता है। कोशिश है कि उत्तर प्रदेश को केवल राजनीति, चुनाव और आंकड़ों के जरिए देखने के बजाय उसकी विविध और बहुस्तरीय पहचान को समझा जाए।


‘मैं उत्तर प्रदेश हूं’ में इतिहास और वर्तमान को एक-दूसरे से जोड़ते हुए यह जानने की कोशिश की जाती है कि इस प्रदेश को बनाने में उसकी नदियों, सभ्यताओं, किसानों, कारीगरों, साहित्यकारों, संतों, कलाकारों और आम लोगों की क्या भूमिका रही है। अलग-अलग क्षेत्रों की अपनी भाषा, संस्कृति, खानपान, परंपरा और स्मृतियों के बावजूद वे किस तरह एक साझा उत्तर प्रदेश का निर्माण करते हैं, यह श्रृंखला इसी विविधता को सामने लाती है।


जनसत्ता की इस श्रृंखला का उद्देश्य उत्तर प्रदेश की ऐसी तस्वीर प्रस्तुत करना है, जो सिर्फ सत्ता और राजनीति तक सीमित न हो, बल्कि उसके इतिहास, संस्कृति, समाज और उन करोड़ों लोगों की कहानी भी कहे, जिन्होंने इस प्रदेश को अपनी मेहनत, परंपरा और स्मृतियों से आकार दिया है।


‘मैं उत्तर प्रदेश हूं’ में उत्तर प्रदेश के इतिहास, संस्कृति, भूगोल, नदियों, लोकजीवन, साहित्य, विरासत और सामाजिक विविधता से जुड़े विशेष लेख पढ़े जा सकते हैं।


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अवधी लोककथा और उत्तर प्रदेश के ग्रामीण जीवन को दर्शाती तस्वीर
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1857 के विद्रोह को दर्शाती सांकेतिक फीचर इमेज, जिसमें विद्रोही, लाल ध्वज, मेरठ-सहरधना-अकलपुरा का मानचित्र और ऐतिहासिक स्थापत्य दिखाई दे रहे हैं।
मैं उत्तर प्रदेश हूं (Ep-04): मेरठ की मिट्टी में आज भी जिंदा है 1857 के विद्रोह की आवाज

मेरठ को सिर्फ 1857 के विद्रोह की शुरुआत वाले शहर के रूप में याद करना उसकी पूरी कहानी नहीं है।…

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मुझे नक्शे पर खींची सीमाओं ने नहीं, मेरी नदियों ने गढ़ा है। गंगा, यमुना, सरयू, गोमती, घाघरा, बेतवा और केन…

उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक विविधता को दर्शाती इलस्ट्रेशन — बांसुरी बजाती महिला, कथक नृत्यांगना, बनारसी बुनकर, झांसी की रानी, दुधवा का बाघ और 1857 की क्रांति के प्रतीकों के साथ 'विविधता' शीर्षक
मैं उत्तर प्रदेश हूं (Ep-02): मैं एक नहीं, कई सभ्यताओं का संगम हूं

नाम से मेरी पहचान नहीं बनती। मुझे समझना हो तो मेरे गांवों की धूल, मेरी नदियों का संगीत, मेरी बोलियों…

उत्तर प्रदेश की रूपरेखा में ताजमहल, धार्मिक और ऐतिहासिक धरोहरें, गंगा घाट, किसान, विद्यार्थी, साहित्यकारों की पुस्तकें और सांस्कृतिक विरासत को दर्शाती 'मैं उत्तर प्रदेश हूँ (भाग-1): पहचान' शीर्षक वाली फीचर इमेज।
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24 जनवरी 1950 को मुझे ‘उत्तर प्रदेश’ नाम मिला, लेकिन मेरी कहानी उससे कहीं पुरानी है। ‘मैं उत्तर प्रदेश हूं’…

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