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बाखबरः गालियां खाके बेमजा न हुआ

साफ हुआ कि आज के आलोचक फिल्म की आलोचना नहीं करते। आलोचना के नाम पर फिल्म का प्रमोशन करते हैं और उसका बाजार बनाते हैं। आलोचना का नया बाजार खुल गया है, जहां आलोचना विज्ञापन की भूमिका अदा करती है।

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