ताज़ा खबर
 

jansatta ravivari

jansatta, epaper, addiction, article

शशांक द्विवेदी का लेख : खतरनाक लत

टार के प्रत्येक कण में नाइट्रोजन, आक्सीजन, हाइड्रोजन कार्बन डाईआक्साइड, कार्बन मोनोआॅक्साइड और कई उड़नशील और अर्द्ध उड़नशील कार्बनिक रासायन होते हैं।

kids, playground, health, smartphones, technology. future, naaz khan column, jansatta raviravi

नाज खान का लेख : खेलकूद की जगह

महानगरों में जैसे-जैसे सुख-सुविधाएं बढ़ी हैं वैसे-वैसे बच्चों के लिए खेलकूद के रकबे घटते चले गए। बनिस्बतन गांवों में आज भी भागने-दौड़ने और सुकून के दो पल गुजारने की गुंजाइश ज्यादा है। शहरों की भीड़भाड़ और संकरी जगहों ने सबसे ज्यादा नुकसान बच्चों का किया है। बच्चों की दिनचर्या कॉपी-किताबों या कंप्यूटर और वीडियो गेमों तक सिमटती जा रही है। बच्चों का मानसिक और शारीरिक विकास ऐसे में हो तो कैसे ?

Opinion On indian medical health service center, jansatta ravivari, jansatta sunday column

सेहतः बदहाल स्वास्थ्य सेवा

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने फरवरी 2015 में राज्यसभा में बताया था कि देश भर में चौदह लाख लाख डॉक्टरों की कमी है और प्रतिवर्ष लगभग 5500 डॉक्टर ही तैयार हो पाते हैं। विशेषज्ञ डॉक्टरों के मामले में तो स्थिति और भी बदतर है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की हालिया रिपोर्ट के अनुसार सर्जरी, स्त्री रोग और शिशु रोग जैसे चिकित्सा के बुनियादी क्षेत्रों में 50 फीसद डॉक्टरों की कमी है। ग्रामीण इलाकों में तो यह आंकड़ा 82 फीसद तक पहुंच जाता है। यानी कुल मिलाकर हमारा देश बुनियादी क्षेत्रों में भी डॉक्टरों की कमी से जूझ रहा है।

jansatta Sunday Column, Jansatta Ravivari, Jansatta opinion

देहलीला से देहगान तक

एक नई लेखिका मैदान में आई है। नाम है : सनी लियोनी। आप चौंक गए न? आपका चौंकना स्वाभाविक है क्योंकि अब तक सनी लियोनी जिनका पूर्वनाम करन जीत कौर है, ‘देसी पोर्न स्टार’ के रूप में ही जानी जाती रही है और अब वे लेखन के क्षेत्र में धमाकेदार एंट्री कर रही हैं। अंग्रेजी में भी यह शायद पहली बार है जब एक देसी पोर्न की मलिका कथाकार बन रही है और एकदम नए तरीके से, बेहद बोल्ड सेक्सी कहानियां लिखने पर उतारू है। उनके ‘नए अवतार’ के बारे में बता रहे हैं सुधीश पचौरी।

साहित्यः कविता का समय-असमय

आज हमारी कविता पर तात्कालिकता का दबाव बहुत ज्यादा है। हमारा पूरा समाज जिन स्थितियों की गिरफ्त में है, उनके दबाव से हर व्यक्ति की मानसिकता यही बनती जा रही है कि अपने समय और श्रम को वही-वही काम करने में लगाया जाए, जिससे तत्काल कुछ मिलने वाला हो। यह अधैर्य कविता की अपनी प्रकृति के प्रतिकूल है। कविता से तत्काल क्या मिलेगा? सच्ची कविता तो तत्काल, अपना कोई अर्थ तक देने को अक्सर राजी नहीं होती।

कहानीः जो हमारा है

श्याम… ओ श्याम ’ अपने में मगन श्याम को देख, वह फिर पुकार बैठी।
पर, श्याम तक जैसे उसकी आवाज न पहुुंची हो।

आवादीः कानून और अत्याचार

आमतौर पर बलात्कार के कारणों में अशिक्षा को भी जिम्मेदार माना जाता है। लेकिन विडंबना है कि संपूर्ण साक्षरता के लिए जाना जाने वाले राज्य केरल में भी महिलाएं सुरक्षित नहीं। यहां पिछले 1,347 महिलाओं के साथ बलात्कार का मामला दर्ज किया गया। महिलाओं की सुरक्षा की दृष्टि से केंद्रशासित राज्य बेहतर हैं। रिपोर्ट के मुताबिक लक्षद्वीप महिलाओं की सुरक्षा की दृष्टि से प्रथम और नगालैंड दूसरे स्थान पर है। इसी तरह दमन और दीव और दादर नगर हवेली भी महिलाओं के लिए सुरक्षित स्थान है।

habib zalib, jail, jansatta article, jansatta ravivari

यादः वो अक्सर जेल में रहता था

इन दिनों पड़ोसी देश में वहां के एक भूले-बिसरे जनवादी शायर हबीब जालिब की खूब चर्चा है। किसी न किसी बहाने से वहां के लोग हबीब को याद कर ही लेते हैं।

स्त्री विमर्शः राष्ट्रीय एकता का स्त्री पक्ष

पुरुष-सत्ता स्त्री के कंधे पर बंदूक रख कर स्त्री को निशाना बनाती है, चाहे वह भ्रूण-हत्या हो, दहेज या अन्य कारणों से युवा स्त्रियों को जिंदा जलाना हो, चाहे बहू या पुत्री पर दूसरे तरह की हिंसा या नियंत्रण हो। सारी नीतियां, कार्यक्रम, एजेंडा, योजनाएं पुरुष या उनकी सोच में ढली महिलाएं बनाती हैं और बाकी सामान्य स्त्रियों के लिए उन्हें अनुकरण के लिए जारी कर दिया जाता है।

जानकारीः हीरा क्यों है हीरा

दुनिया का सबसे कठोर पदार्थ है हीरा। इसकी कठोरता का अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसे दूसरी किसी धातु से काटा जाना असंभव है।

देशभक्ति को सम्मान

हाल में सिने अभिनेता और निर्देशक मनोज कुमार को दादा साहेब फाल्के सम्मान देने की घोषणा हुई है।मनोज कुमार देशप्रेम से ओत-प्रोत फिल्में बनाने के लिए मशहूर रहे हैं। इस मौके पर उनके फिल्मी करिअ‍ॅर पर रोशनी डाल रहे हैं अभिजीत राय।

चिंताः अधर में स्त्री

सच यह है कि सेवा क्षेत्र में आगे बढ़ने के बावजूद आर्थिक क्षेत्र में महिलाओं की स्थिति बहुत मजबूत नहीं हुई। हालत यह है कि महिला हितों के खिलाफ जाने वाले श्रम कानूनों को प्रस्तावित किया जा रहा है। कार्यस्थलों पर मातृत्व से जुड़े मुद्दों को आज भी महिलाओं के लिए अवरोधक बना दिया जाता है। यही सोचना पड़ता है कि हमारा समाज आज भी सभ्य होने के किस पायदान पर पहुंच सका है!

मुद्दाः सुंदरता और क्रीम

सुंदरता बढ़ाने वाले उत्पाद और सर्जरी आदि सामानों और उपायों को केवल सिर्फ उपभोक्ता अदालतों के भरोसे छोड़ना ठीक नहीं है। जिस तरह खानेपीने की चीजों में खतरनाक रसायनों के इस्तेमाल पर सरकार और अदालतों चिंतित दिखती हैं, उसी तरह सुंदरता के नाम पर घटिया क्रीम बेचने को भी एक गुनाह के तौर पर लिए जाने की जरूरत है।

रिपोर्टः वजूद की बोली

कानून की नजर में ये अब जन्मजात अपराधी नहीं हैं, लेकिन इसकी छाप इनकी जिंदगी से जा नहीं रही। सवाल यह है कि तमाम मानवाधिकार आयोग और महिला आयोग इनकी बदहाली को संज्ञान में क्यों नहीं लेते, सरकार पर इन समुदायों के पक्ष में नीतिगत फैसले लेने के लिए दबाव क्यों नहीं डालते।

कहानीः पीले पत्ते

राजेश्वर की नींद तो न जाने कब की खुल चुकी थी। खिड़की का परदा सरका कर देखा तो बाहर अंधेरा था। आ कर फिर बिस्तर पर लेट गए। लेकिन, नींद नही आ रही थी।

v Responsible for suffering, jansatta article, jansatta ravivari

आधी आवादीः कष्ट का जिम्मा

बचपन से ही घर के कामकाज लड़कियों से करवाए जाते हैं। खेलने के लिए लड़कों को बंदूक, गेंद दिए जाएंगे और लड़कियों को गुड़िया। इतना ही नहीं ‘नसबंदी’ भी करानी होगी तो पुरुषों की नहीं, महिलाओं की कराई जाती है। इस धरती पर शायद कष्ट झेलने का सारा जिम्मा महिलाओं को ही सौंप दिया जाता है।

Liberation movement, jansatta opinion, jansatta article, jansatta story, jansatta ravivari

मुक्ति आंदोलन और महिलाओं की हिस्सेदारी

देश की आजादी की लड़ाई रही हो या पुरुषों के साथ बराबरी का मामला, महिलाओं ने हर आंदोलन में बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया है। इसके बावजूद राजनीति हो या समाज या दूसरा कोई क्षेत्र-महिलाओं को उनका वाजिब हक नहीं मिल पाया है। अतीत के आईने में स्त्री-आंदोलनों का एक लेखा-जोखा प्रस्तुत कर रही हैं निवेदिता।

नकल में अकल

मार्का का महीना एक तरह से छात्रों के लिए परीक्षा-काल होता है। बच्चे अपनी साल भर की मेहनत को अच्छे परिणाम में बदल कर माता-पिता के ख्वाबों को पूरा करने में जुट जाते हैं।