jansatta dunia mere aage

धैर्य के अभाव में

सब्र नाम की चीज खत्म हो गई है। अगर स्कूल में कोई बच्चा एक सवाल को दो-तीन बार पूछ लेता है तो शिक्षक के...

पढ़ने का मतलब

हम सपनों की तरह जीते हैं। अगर हमारे मित्रों ने वाणिज्य विषय लिया है तो हम भी उसे चुन लेते हैं, उन्होंने विज्ञान संकाय...

प्रसिद्धि की कसौटी

एक प्रसंग के मुताबिक एक बार रामकृष्ण परमहंस ने युवा नरेन यानी विवेकानंद से कहा- ‘नरेन जरा पास के पुकुर (तालाब) को देख कर...

प्रकृति का पाठ

जीवन के सुख-दुख में हमारे हर भाव के साथ प्रकृति खड़ी रहती है। जब भीषण गर्मी से मैदानी इलाकों में लोग परेशान होते हैं...

दुनिया मेरे आगे: प्रेम की खोज में

प्रेम के बारे में कहा जाता है कि यह मिलन में ही नहीं, विरह में भी महसूस किया जा सकता है। प्रेम मधुर कल्पना...

दुनिया मेरे आगे: नेकी कर दरिया में डाल

पर्व-त्योहार मनाने या दिवंगत पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए और उनके प्रति सम्मान दिखाने के लिए दान देने से बेहतर और कोई...

दुनिया मेरे आगे: परिधान के रिश्ते

एक समय था जब हर चौथी-पांचवी दुकान दर्जियों की हुआ करती थी। कोई पैंट-कमीज का विशेषज्ञ होता था तो कोई कुर्ते-पायजामे का। कोई सफारी-सूट...

दुनिया मेरे आगे: भविष्य की खातिर

तीस जनवरी को रस्मी तौर पर राजघाट पर पुष्पांजलि अर्पित करके, बकौल हरिवंशराय बच्चन, हम उनके फकीरी ठाट को ठेंगा दिखाते हुए आगे बढ़...

दुनिया मेरे आगे: नन्ही मेरी बिटिया होगी

मुझे नहीं पता कि लोगों पर सामाजिक खबरों का क्या असर होता है और ऐसी खबरों से लोग समाज के दिशा-दशा का ज्ञान कर...

दुनिया मेरे आगे: रब सब भला करेगा

देश यथास्थिति-वाद का आदी हो गया है और यहां आपको सब कुछ बदल जाने का आभास दिया जाता है। परिवर्तन की राह पर चलते...

दुनिया मेरे आगे: भोजन की सुगंध

कोरोना काल में बहुतों के लिए रोटी और मकान एक बड़ा अभाव बन गए। कपड़े भले थोड़े बहुत तन पर रहे हों, भोजन पकने...

दुनिया मेरे आगे: जमीन के तारे

पांच वर्ष के एक बच्चे को तितली में रंग भरने का काम दिया गया था। वह कुछ बना नहीं पा रहा था। मासूमियत से...

दुनिया मेरे आगेः समझ की उम्र

बचपन से लेकर अब तक हम यही सुनते आए हैं कि बच्चे मन के सच्चे होते हैं, दिल से भोले होते हैं, थोड़े नासमझ...

दुनिया मेरे आगेः किसके सपने

अरसा पहले एक गीत में एक बच्चा अपनी मां से कहता था कि वह गोली चलाना सीखेगा, क्योंकि उसे लीडर नहीं, फौजी अफसर बनना...

दुनिया मेरे आगेः असल जीवन का अक्स

अपने स्कूली जीवन के दौरान देखी हुई एक फिल्म याद आती है जिसमें अभिनेत्री रेखा पुलिस अधिकारी की भूमिका में हैं और अपराधियों से...

दुनिया मेरे आगेः सुबह की सभा

सीखने-सिखाने की प्रक्रिया में यों तो विद्यालय का हर क्षण अति महत्त्वपूर्ण होता है, लेकिन ‘मॉर्निंग असेंबली’ यानी प्रार्थना सभा का वक्त इसलिए अधिक...

दुनिया मेरेे आगेः शिक्षा का समाज

पिता कहते थे कि शिक्षा प्राप्त कर लोगे तो सब पा जाओगे; मैं शिक्षा नहीं पा सका, इसलिए जीवन में कष्ट है। पिता के...

दुनिया मेरे आगेः भ्रम के विज्ञापन

क्या हम विज्ञापनों से जी रहे हैं? टीआरपी के हिसाब से चैनल अपने धारावाहिक और अन्य कार्यक्रमों के बारे में फैसला करते हैं। दर्शकों...

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