jansatta chaupal

चौपाल: सिमटता बचपन

बच्चों का बचपन बचाने के लिए उनके लिए खेल का मैदान उपलब्ध कराना होगा। बच्चे ही देश का भविष्य हैं। भविष्य की रक्षा करना उन्हें संवारना हर नागरिक का धर्म है।

चौपाल: मैदान की बाजी

रहाणे द्वारा अपना सौवां मैच खेल रहे नाथन लायन को टीम जर्सी सप्रेम भेंट करना यह दर्शाता है कि खेल में उत्कृष्ट प्रदर्शन के अतिरिक्त खेल भावना दिखाने के मामले में भी वैश्विक स्तर पर भारतीय क्रिकेट टीम का कोई सानी नहीं है।

चौपालः बजट से उम्मीद

महामारी को देखते हुए यह फैसला लिया गया है कि इस साल बजट को ‘डॉक्यूमेंट लेस’ रखा जाएगा। आजादी के बाद यह पहली बार होगा जब बजट इस तरह का होगा।

चौपालः विवेक बनाम विज्ञान

देशभक्ति का मतलब है प्रत्येक ऐसे कार्य की जांच-पड़ताल करना, जिससे देश और देशवासियों का अहित हो सकता है।

चौपालः पेट की खातिर

देश के स्वतंत्र होने के बाद विकास के तमाम तमाशों के ढोल पीटने के बाद भी पिछले सात दशक से ज्यादा वक्त में कांग्रेसियों और दूसरे शासकों के शासन में भी महिलाएं सुखी नहीं हैं।

चौपालः बोझ नहीं इंसान

विश्व की सबसे बड़ी आबादी वाले देश चीन में अंदाज से भी काफी कम बच्चे का जन्म हुआ। वहीं भारत में यह आंकड़ा सामान्य से ज्यादा रहा।

चौपालः समारोह की गरिमा

शायद यह पहली बार होगा कि गणतंत्र दिवस समारोह में कोई विदेशी शासनाध्यक्ष अतिथि के रूप में मौजूद न हो। मगर समारोह की अहमियत हमेशा रहेगी।

चौपाल: प्रकृति से हम

पूर्णबंदी के दौरान हमने देखा और अनुभव भी किया होगा कि पृथ्वी के तापमान और पर्यावरण में किस हद तक सुधार हो गया था। काफी दूर से पर्वतों का नजर आना, पशु-पक्षियों का बदला व्यवहार व उनका दिखना, प्रदूषण का हैरतअंगेज तरीके से कम हो जाना।

चौपाल: नैतिकता ही रास्ता

यह नहीं भूलना चाहिए कि जीवन में हम जो कुछ भी धन-संपत्ति भ्रष्ट कर्मों से प्राप्त करते हैं, वह न तो हमें सुख दे सकती है, न ही परिवार के अन्य सदस्यों को। बल्कि आखिरकार यह हमें कष्ट ही देती है।

चौपाल: समस्या से अनजान

खेती किसानी एक विशिष्ट प्रकार के अनुभव हैं, जिसमें किसानों को फसल की उपज प्राप्त करने के लिए तमाम कठिनाइयां झेलनी पड़ती हैं। गरमी की तपन, उमस, बारिश, आसमानी बिजली, जाड़े की सर्द रात तक झेलने को वे विवश होते हैं।

चौपाल: वोट की खातिर

बिहार विधानसभा चुनाव के लिए मतदान का काम पूरा हो चुका है। अब टीवी चैनलों पर नतीजों की भविष्यवाणी से लेकर प्रचार के दौरान नेताओं द्वारा किए गए वादों और दिए गए बयानों को लेकर चचार्एं जारी हैं।

चौपाल: नोटबंदी का दंश

नोटबंदी के फैसले ने भारत की अर्थव्यवस्था को लंबे समय के लिए बीमार कर दिया था। आज भी गरीब लोग सरकार के इस अपरिपक्व फैसले की मार झेलने को मजबूर हैं। नोटबंदी के वक्त सरकार ने पुराने नोटों की जगह नए नोट जारी करने के लिए भी कोई अग्रिम तैयारी नहीं की गई थी।

चौपाल: जागरूकता का सफर

देश की अर्थव्यवस्था के लगभग तीनों क्षेत्र आर्थिक मार का शिकार हो चुके हैं। सरकार का राहत पैकेज समाचारों के माध्यम से जनता को सुनने में जरूर आया, लेकिन उसके क्रियान्वयन की रफ्तार अभी तक देखने को नहीं मिली। सरकार को जरूरत है। जिस प्रकार राजनीतिक दल चुनावी ‘जनसंपर्क’ करते हैं, उसी तरह व्यापक रूप […]

चौपाल: लोकतंत्र के लिए

बिहार जैसे राज्य में चुनाव का गिरता प्रतिशत, बिहार की प्रत्यक्ष राजनीति आर्थिक-सामाजिक उन्नति के लिए बाधक सिद्ध हो सकती है। इसलिए बिहारवासियों को कोरोना से जरूरी सुरक्षा बरतते हुए अधिक से अधिक मतदान करना चाहिए

चौपाल: परस्पर जीवन

धरती की असली धरोहर है इसकी जैव विविधता। यह जैव विविधता ही धरती का चक्र चला रही है। वन, उपवन, बाग-बगीचे जो संसार में निर्मल जलवायु, तापमान संतुलन, साथ ही साथ खाद्य और जरूरी वस्तुओं का बंदोबस्त करता है। हिमालय, नदियां, पहाड़, पशु और पक्षी भी उतने ही जरूरी हैं।

चौपाल: पढ़ने की सीख

अगर बच्चों को लिखित सामग्री को पढ़ कर खुद की धारणाएं बनाने और वास्तविक जीवन से संबंध स्थापित करने के अवसर दिए जाएं तो ‘पढ़ना’ अधिक प्रभावशाली होगा।

चौपाल: खौफ में बेटियां

हाथरस हो या गुरुग्राम, आजमगढ़ हो या जौनपुर, हर तरफ महिलाओं के लिए सिर्फ डर या भय का माहौल नजर आ रहा। ऐसे में आखिर कोई पिता और परिवार अपने बेटियों को शिक्षा और अन्य कार्य के लिए अकेला कैसे छोड़ेगा?

चौपाल: प्रदूषण का धुआं

पिछले साल सरकार के तरफ से यह आश्वासन भी दिया गया था कि अगर किसान अपने खेतों की पराली नहीं जलाते हैं तो उन्हें प्रति एकड़ एक हजार से ढाई हजार रुपए तक का मुआवजा दिया जाएगा। लेकिन क्या यह आश्वासन पूरा हुआ?

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