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चौपाल: बेरोजगारी का दंश

सरकार रोजगार देने का वादा तो करती है, लेकिन उन्हें पूरा नहीं कर पा रही है। आज टीवी चैनलों पर भी बेरोजगारी और महंगाई के मुद्दे गायब हो गए हैं।

चौपाल: देश की भाषा

सबसे हैरान करने वाली बात तो ये है कि जिन अंग्रेजों ने भारत को गुलाम बना कर भारतीयों पर तरह-तरह के जुल्म ढाए थे, आज आजाद भारत के वासी उनकी भाषा को पढ़ना-लिखना अपनी शान समझते हैं।

चौपाल: आत्मनिर्भरता का रास्ता

सरकारों ने किसान और किसानी की जिस तरह से उपेक्षा की है, उसी का नतीजा है कि आज किसान दयनीय हालत में जीने को मजबूर है और हताशा में मौत को गले लगा रहे हैं। दूसरी ओर राजनीतिक दल किसानों की मौत पर राजनीति करते रहे हैं।

चौपाल: सवालों पर रोक

कोरोना महामारी के कारण संसदीय कार्यवाही के सबसे महत्त्वपूर्ण भाग को स्थगित करना कहीं से भी उचित प्रतीत नहीं होता। मौजूदा समय में स्थिति यह है कि संसद का कोई भी सदस्य मौजूदा मंत्रिमंडल से कोई भी प्रश्न नहीं पूछ सकता है।

चौपाल: पाक का चेहरा

सत्ताईस वर्ष से दाऊद इब्राहिम की तलाश कर रही विभिन्न जांच एजेंसियों को इस बात का अंदाजा पहले ही था कि उसने पाकिस्तान में शरण लिया हुआ है।

चौपाल: बिगड़ती सेहत

एक तरफ सरकार को भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है, वहीं देश में बेरोजगारी और बेकारी बढ़ रही है और लोग बदहाली की त्रासदी में जी रहे हैं। केवल ऊपरी तबके को छोड़ दिया जाए तो इससे देश में लगभग हर वर्ग के लोग भारी आर्थिक संकट की चपेट में आ गए हैं।

चौपाल: दोहरा संकट

कोरोना संकट के बीच देश में करोड़ों गरीब बच्चे ऐसे हैं जिन्हें स्कूल बंद होने और सरकारी लेटलतीफी के कारण मिड-डे-मिल मिलना मुश्किल हो गया। ये आंकड़े हमारी प्रसाशनिक कार्य-पद्धति की भी पोल खोलते नजर आते हैं। योजनाएं बनती तो हैं, लेकिन वास्तविकता और यथार्थ से कोसों दूर नजर आती हैं।

चौपाल: एक परीक्षा

राष्ट्रीय भर्ती एजेंसी के जरिए होने वाली साझा पात्रता परीक्षा इस तरह होनी चाहिए, जिससे उसकी विश्वसनीयता को लेकर कहीं कोई सवाल न उठने पाए, क्योंकि हाल के समय में कुछ प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर सवालिया निशान लगे हैं।

चौपाल: नदी पर हक

किसी भी देश में कृषि और पेयजल के लिए नदियां आधार का काम करती हैं। भारत और बांग्लादेश के बीच नदी जल विवाद का एक मुख्य कारण भारत की आंतरिक राजनीति भी रही है।

चौपाल: इंदौर की मिसाल

आज इंदौर के लोग कारों में कचरा पात्र या डस्टबिन लेकर घूमते हैं, ताकि कचरा सड़कों पर न फेंकना पड़े या कहें कि सिंगल यूज प्लास्टिक की गंदी आदत भी धीरे-धीरे छूटती जा रही है। इस प्रकार इंदौर के लोग स्वच्छता का उत्कृष्ट संदेश एवं संस्कार देश के सामने नजीर के रूप में पेश कर रहे हैं, जिसे अन्य शहरों को आदर्श के रूप में मानना चाहिए।

चौपाल: पाक को सबक

विदेशी मदद के भरोसे पाकिस्तानी अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए विदेश मंत्री कुरैशी बेजिंग के दौरे पर गए। मगर वहां भी उन्हें निराशा ही हाथ लगी। राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने उन्हें मिलने का समय नहीं दिया, बल्कि रिकॉर्ड किया हुआ संदेश भेज दिया।

चौपाल: संकट की शिक्षा

लंबे समय तक मोबाइल पर देखते रहने से आंखों की समस्या भी होने लगी है। यह डिजिटल डिवाइड और डिजिटल खाई का नतीजा ही है। यूनेस्को ने इस समस्या पर काबू पाने के लिए डिजिटल खाई को पाटने समेत छह-सूत्री उपाय सुझाए हैं। लेकिन भारत जैसे विकासशील देश के लिए इन सुझावों पर अमल कर पाना टेढ़ी खीर है। बहुत से शिक्षाविदों ने देश में डिजिटल खाई पर गहरी चिंता जताई है।

चौपाल: उत्तर कोरिया की राह

उत्तर कोरिया ने सितंबर 2017 के बाद कोई परमाणु परीक्षण नहीं किया है। संयुक्त राष्ट्र की यह अंतरिम रिपोर्ट सुरक्षा परिषद की पंद्रह सदस्यों वाली एक समिति को सौंप दी गई है, जो उत्तर कोरिया के खिलाफ प्रतिबंधों पर नजर रखती है।

चौपालः कौशल के दम

वित्त वर्ष 2009 में राष्ट्रीय कौशल विकास नीति बनाई गई तो इस तरह के प्रशिक्षण के लिए शुरुआती कदम उठाए गए। इसमें वित्त मंत्रालय, भारत सरकार के तहत राष्ट्रीय कौशल विकास फंड और राष्ट्रीय कौशल विकास निगम की स्थापना की गई।

चौपालः अपने-अपने महापुरुष

आखिर महापुरुष कैसे किसी एक के हो सकते हैं या नहीं हो सकते हैं? चाहे नेहरू हों या और कोई नेता, अगर देश के प्रति उनका योगदान है तो क्यों न उनके प्रति कृतज्ञ हुआ जाए?

चौपालः वोट की खरीद

जब लोकसभा और विधानसभाओं के चुनाव होते हैं तो राजनीतिक दल अपने घोषणापत्रों में चावल, साड़ी, रंगीन टीवी, अनाज, लैपटॉप, साईकिल आदि सामान मुफ्त देने का वादा करके मतदाताओं को लुभाने की खुलेआम कोशिश करते हैं।

चौपालः सोच का सूखा

सूखे की वजह सेकुलरता है’- यह पहला वाक्य था उस संदेश का, जो तीन-चार रोज पहले ‘वाट्सएप’ पर पढ़ने को मिला। लिखा था: आपको लगेगा कि यह अजीब बकवास है, पर है यह अटल सत्य ।

चौपालः श्रमिकों के साथ

पिता कहते थे कि शिक्षा प्राप्त कर लोगे तो सब पा जाओगे; मैं शिक्षा नहीं पा सका, इसलिए जीवन में कष्ट है। पिता के निधन के बाद कुछ धनोपार्जन के उद्देश्य से मैं एक जगह प्राइवेट ट्यूशन के लिए जाने लगी थी।

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