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राजनीतिः इलाज को तरसते गांव

देश के अस्पतालों में चौदह लाख से ज्यादा डॉक्टरों की कमी है जबकि हर साल करीब साढ़े पांच हजार डॉक्टर ही मेडिकल कॉलेजों से...

दुनिया मेरे आगेः कौशल के साथ कला

किसी भी व्यक्ति के भीतर मौजूद यही कलाकार एक तरह से उसकी एक ऐसी पूरक ऊर्जा है जो उसे हर तरह की परिस्थिति में...

राजनीतिः भाषागत भेदभाव का संकट

प्रश्न यह है कि जब आधे से अधिक लोग हिंदी को अपनी प्राथमिक भाषा के रूप में प्रयोग में लाते हैं, विभिन्न परीक्षाओं...

राजनीतिः अस्तित्व का संकट और चुनौतियां

बीसवीं शताब्दी की एक खास विशेषता यह है कि इस शताब्दी के अंत तक पंहुचते-पहुंचते अनेक मानव निर्मित कारणों से ऐसी परिस्थितियां उत्पन्न...

दुनिया मेरे आगेः आदृश्य तस्वीरें

मेरा यह मानना कि सभी समझदार और जिम्मेदार अभिभावकों और शिक्षकों ने बच्चों को अच्छे और बुरे के खेल में फंसा कर अपनी तमाम...

दुनिया मेरे आगेः परिधि में स्त्री

राजकुमारी लिखती हैं- यों तो समूची दुनिया में अलग-अलग शक्ल में स्थिति बहुत अलग नहीं है, लेकिन खासतौर पर भारत की महिलाएं एक तरह...

राजनीतिः धरती बचाने की चुनौती

पृथ्वी के तापमान को स्थिर रखने और कार्बन उत्सर्जन के प्रभाव को कम करने के लिए कंक्रीट के जंगलों के विस्तार और प्राकृतिक संसाधनों...

संपादकीयः जानलेवा धागे

इससे बड़ी विडंबना और क्या हो सकती है कि किसी का मनोरंजन या खेल दूसरों की जान लेने वाला साबित होने लगे। पिछले कुछ...

संपादकीयः फर्जी पर पाबंदी

आज सूचना माध्यमों के विस्तार के दौर में निश्चित रूप से सोशल मीडिया का अपना महत्त्व है और इसका सकारात्मक इस्तेमाल लोगों को ज्ञान...

आधी आवादी का सवाल

हमारे देश में सबसे ज्यादा बदलाव की दरकार समाज में मौजूद परंपराओं, रूढ़ियों और भेदभाव भरी मानसिकता की जकड़न को लेकर है। बेटे और...

द लास्‍ट कोच: अति सुधो सनेह को मारग है

मैं प्लेटफार्म नंबर तीन के अंतिम छोर पर पहुंच गया हूं। यहां एक युगल ने बरबस ध्यान खींच लिया है। वे इस तरह सट...

दुनिया मेरे आगेः समझ की उम्र

बचपन से लेकर अब तक हम यही सुनते आए हैं कि बच्चे मन के सच्चे होते हैं, दिल से भोले होते हैं, थोड़े नासमझ...

पर्यावरण की कसौटी पर

अमेरिका, दुनिया का नबंर एक प्रदूषक है, तो चीन नंबर दो। फिर भी भारत, उपभोगवादी चीन और अमेरिका जैसा बनना चाहता है। क्यों?

राजनीतिः संध्या वेला की दुश्वारियां

बेटे-बेटियों-दामादों-बहुओं को यह समझना होगा कि वे भी कभी बुजुर्ग होंगे और जो व्यवहार आपके बच्चे आपके माता-पिता के साथ होते देख रहे हैंं...

दुनिया मेरे आगेः किसके सपने

अरसा पहले एक गीत में एक बच्चा अपनी मां से कहता था कि वह गोली चलाना सीखेगा, क्योंकि उसे लीडर नहीं, फौजी अफसर बनना...

संपादकीयः रोजगार का आधार

पूंजीगत सामान की खपत को अमूमन नए निवेश का सूचक माना जाता है। राजग सरकार के दो साल में कई बार औद्योगिक उत्पादन में...

दुनिया मेरे आगेः असल जीवन का अक्स

अपने स्कूली जीवन के दौरान देखी हुई एक फिल्म याद आती है जिसमें अभिनेत्री रेखा पुलिस अधिकारी की भूमिका में हैं और अपराधियों से...

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