IDBI Bank

IDBI को बेलआउट पैकेज, LIC और नरेंद्र मोदी सरकार से मिलेंगे 9,300 करोड़

मोदी सरकार द्वारा केंद्र और एलआईसी से 9300 करोड़ रुपए के बेलआउट पैक के ऐलान के बाद मंगलवार को आईडीबीआई बैंक का शेयर करीब आठ प्रतिशत की बढ़त के साथ बीएसई पर 28.80 रुपए पर बंद हुआ।

IDBI अब कहलाएगा LIC IDBI Bank, या फिर LIC Bank हो जाएगा नाम?

आईडीबीआई बैंक का घाटा करीब 3 गुना बढ़कर 4,185 करोड़ रुपए।

एक रुपये की वसूली करनी थी, बैंक ने ₹85 खर्च कर भेजा नोटिस

यह नोटिस 5 अक्टूबर को बैंक ने भेजी थी। इसमें कहा गया है, 1 अक्टूबर 2018 को आपके लोन अकॉउंट के सब अकाउंट में 1 रुपए का बकाया है। भुगतान न होने की दशा में खाता ओवरड्यू ही रहेगा।

अब IDBI बैंक में सामने आया 772 करोड़ रुपये का फर्जीवाड़ा

पंजाब नेशनल बैंक, एसबीआई, यूनियन बैंक के बाद अब IDBI में भी फर्जी दस्‍तावेज के आधार पर सैकड़ों करोड़ रुपये का कर्ज लेने का मामला सामने आया है। फर्जीवाड़े का यह मामला आंध्र प्रदेश और तेलंगाना स्थित पांच शाखाओं से जुड़ा है। बैंक अधिकारियों को सिर्फ कागजों पर ही तालाब दिखा कर कर्ज मंजूर करा लिया गया था।

वित्त मंत्री ने अरुण जेटली माना- हो सकता है माल्या का कारोबारी मॉडल गलत हो

उद्योगपति विजय माल्या की बढ़ती परेशानियों के लिए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने किंगफिशर एयरलाइंस के ‘कारोबारी मॉडल’ पर सवाल उठा दिए हैं।

अरुण जेटली ने कहा- माल्या 9000 करोड़ रुपए से ज्यादा के कर्ज का भुगतान करें बरना होगी कड़ी कार्रवाई

विजय माल्या जैसे ऋण भुगतान में जान बूझ कर चूक करने वालों को सख्त चेतावनी देते हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि उन्हें बैंकों को सम्मान से बकाए का भुगतान करना चाहिए अन्यथा वे ऋणदाताओं और जांच एजेंसियों के दबाव का सामना करने के लिए तैयार रहें।

PMLA मामले में ED​ के समक्ष पेश होने के लिए माल्या ने मांगा और समय

इस समय ब्रिटेन में मौजूद शराब कारोबारी विजय माल्या ने आज साफ कर दिया कि वह आईडीबीआई बैंक के 900 करोड़ रुपये के ऋण मामले में कल प्रवर्तन निदेशालय के सामने पेश नहीं होंगे।

CBI बोली गलती हो गई, माल्या को भूल से जारी हुआ लुकआउट नोटिस

उद्योगपति विजय माल्या पर निगरानी नोटिस (लुकआउट सर्कुलर) में बदलाव की वजह से आलोचनाओं का सामना कर रही सीबीआई ने शुक्रवार को इस मामले में अपनी गलती मानी।

बैंकों का 4 लाख करोड़ रुपए का कर्ज डूबा

निवेशकों की ओर से सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के शेयरों में लगाए गए हर सौ रुपए पर 150 रुपए के डूबे कर्ज या गैर निष्पादित आस्तियों (एनपीए) का बोझ है।