Hindi Language

हिंदी भावना भी संभावना भी

एक ऐसे दौर में जब लोकतंत्र से आगे का खुलापन बाजार के हिस्से है, तो भाषा और संस्कृति भी नए सिरे से परिभाषित हो रही है। इस बदलाव में बड़ी भूमिका निभा रही है सूचना क्रांति का वाहक बनकर आई तकनीक, जो रोज अपडेट हो रही है, यूजर फ्रेंडली हो रही है।

मान, मानक और हिंदी

इंटरनेट पर आज सब अपने-अपने तरीके की हिंदी ला रहे हैं। इनका अपना साहित्य, समाज, परिवार सब कुछ हिंदी में है। सवाल है कि इसे मुख्यधारा की हिंदी क्यों न मानी जाए। हिंदी के मानकीकरण में सबके साथ समस्या आती है।

लीक से आगे तकनीक की भाषा

दरअसल, पिछले दो दशक में इंटरनेट ने पूरी दुनिया के लोगों को नया मंच दिया तो हिंदी बोलने वाले भी इस मंच पर आए और साबित किया कि हिंदी नए समय के दरकारों को कामयाबी के साथ पूरा कर सकती है। इसका एक पूरा ढांचा खड़ा होने लगा तो गूगल और माइक्रोसॉफ्ट यूनिकोड लेकर आए। गूगल की भाषाई समझ में ‘बिहारी’ तक स्वतंत्र भाषा है

चौपाल: अंग्रेजी के रंग

हिंदी को अंग्रेजी से नीचे रखना हमारा समाज ही हमें बचपन से सिखाता है। बच्चा जब बचपन मे अंग्रेजी में नहीं बोल पाता तो लोग हंसते हैं उस पर। फिर मां-बाप परेशान होकर उच्च कोटी के अंग्रेजी स्कूल में उसका दाखिला करवाते हैं कि बच्चा पढ़े या न पढ़े, इससे मतलब नहीं, मगर अंग्रेजी बोलना जरूर सीख जाए।

दुनिया मेरे आगे: भाषा बहता नीर

हिंदी का विपुल साहित्य, व्यापक भौगोलिक क्षेत्र, बाजारवाद में हिंदी का बोलबाला और बोलने वालों की जनसंख्या इसे मजबूती प्रदान करने के लिए काफी हैं।

व्यक्तित्व: विदेश में हिंदी की अनूठी खुशबू बिखेर रहे युवा

कोहे मुंबई में रहते हैं और वहीं रहकर भारत के बारे में और जान रहे हैं और भारत की संस्कृति के बारे में जापान को बता रहे हैं। उनके वीडियो में देखा जा सकता है कि जापान के लोग भी भारत से उतना ही प्यार करते हैं जितना कि भारत के लोग जापान से।

राजनीति: हिंदी के विकास की बाधाएं

स्वतंत्र भारत में हिंदी की विकास यात्रा जितनी तीव्र गति से होनी चाहिए थी, उसे उतनी गति नहीं मिल पाई। इसका सबसे बड़ा कारण रहा कि स्कूली शिक्षा निसंदेह हिंदी या क्षेत्रीय भाषा में हो रही हो, लेकिन उच्च शिक्षा के लिए लोगों को अंग्रेजी माध्यम ही चुनना पड़ा है। इसलिए नवयुवक पहले से अपना अंग्रेजी आधार मजबूत करने का उपक्रम करने लगते हैं। ऐसी वर्जनाएं भी हिंदी के विकास में बाधक बनी हैं।

कनिमोझी ने फिर उठाया ‘हिंदी थोपने’ का मुद्दाः बेविनार में सचिव बोले थे- जिसे नहीं आती है हिंदी, वह जा सकता है; AYUSH मंत्री से की शिकायत

कोटेचा के बयान को लेकर कनिमोझी ने निंदा की है और कैबिनेट मंत्री श्रीपद नायक को पत्र लिखकर उनके खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है।

बाखबर: हिंदी की खाते हैं…

पहले शशि थरूर जी ठोके, फिर कर्नाटक के पूर्व सीएम जी भी ठोक दिए। जिस भाषा को तैंतालीस फीसद लोग बोलते हों उसकी ठुकाई सिर्फ पांच फीसद तमिल बोलने वाले करें और कुछ अंग्रेजी एंकर ठुकाई करवाएं! यह अपने देश में ही हो सकता है!

अमेरिका में सबसे मशहूर भाषा बनी हिंदी, परदेस में हैं 8.74 लाख बोलने वाले; जानें बाकी भारतीय भाषाओं की रैंकिंग

अमेरिका में हिन्दी का उपयोग 8.74 लाख लोग करते हैं 2017 के आंकड़ों के मुक़ाबले ये 1.3% ज्यादा है। पिछले आठ सालों में हिन्दी बोलने वालों की संख्या 2.65 लाख बढ़ी है। मतलब पिछले आठ सालों में हिन्दी बोलने वालों में 43.5% का इजाफा हुआ है।

अबू धाबी की अदालतों में हिंदी को मिला तीसरी आधिकारिक भाषा का दर्जा

अबू धाबी ने हिंदी को अदालत की तीसरी आधिकारिक भाषा बनाया।

दक्षिण भारत में बढ़ रही हिंदी भाषियों की तादाद, मातृभाषा को लेकर जारी आंकड़ों से खुलासा

देश में अब रिवर्स पलायन का चलन बढ़ा है। कुछ दशक पहले तक दक्षिण भारत के इन दोनों राज्यों से बड़ी आबादी उत्तर भारत की ओर पलायन किया करती थी। लेकिन अब इन राज्यों के लोग उत्तर भारत के बजाय दक्षिण भारत के ही एक अन्य राज्य कर्नाटक में जा रहे हैं।

चौपालः हिंदी की जगह

यह चिंता की बात है कि आज हमारी मातृभाषा हिंदी की जो दयनीय स्थिति हो रही है, उसमें हमारे उच्चवर्ग के साथ-साथ मध्यवर्ग की भी एक बड़ी भूमिका है।

तीरंदाज़ : लोक-संवाद में अड़चन न बनें

हिंदी शायद वह भी है, जिसे हम बंबइया कहते हैं, यानी मराठी में सनी खड़ी बोली और अंगरेजी के शब्द। पंजाबी भी अंगरेजी के शब्दों के सहारे दिल्ली वाली पंजाबी होती जा रही है..

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