Farmers Movement

अमित शाह को जमानत दिलवाने वाले जज-वकील आज ऊंचे-ऊंचे पदों पर बैठे हुए हैं- कांग्रेस प्रवक्ता का आरोप

टीवी डिबेट में भाजपा प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी के सवाल पर कांग्रेस प्रवक्ता आलोक शर्मा आक्रामक होकर बोलने लगे।

अल्लाह-हू-अकबर की बात कर रहीं जिन्हें आप राजनीतिक एक्सपर्ट कह रहे, डिबेट में बोले अनुराग भदौरिया

डॉ. भदौरिया ने कहा, “पेट्रोल-डीजल का दाम 100 रुपए से ज्यादा हो गया है। क्या इस पर भाजपा के किसी बड़े नेता ने ट्वीट किया।” मैं पूछना चाहता हूं कि किसने किया। कोई बोला। वे यहां नहीं बोलेंगे। वे नहीं बोलेंगे।

किसानों की भलाई कर रही है मोदी सरकार, बोले अनुराग ठाकुर तो लोगों ने कर दिया ट्रोल

किसान केन्द्र द्वारा पिछले साल बनाए गए तीन कृषि कानूनों को वापस लेने और फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी की मांग को लेकर नवंबर, 2020 के अंत से ही दिल्ली की सीमाओं पर आंदोलन कर रहे हैं।

आंदोलन के दौरान किसानों की मौत से जुड़ा कोई रिकॉर्ड नहीं, कृषि मंत्री तोमर ने राज्यसभा को दी लिखित जानकारी

कहा कि सरकार ने बैठक के दौरान हाल ही में लाए गए नए कृषि कानूनों की कानूनी वैधता सहित उनसे होने वाले लाभों के बारे में विस्तारपूर्वक बताया। फिर भी, किसान यूनियनों ने कृषि कानूनों पर चर्चा करने पर कभी भी सहमति व्यक्त नहीं की।

किसान आंदोलन से जुड़े ट्विटर हैंडल अनब्लॉक करने पर केंद्र नाराज, नतीजे भुगतने की दी चेतावनी

ट्विटर द्वारा शुरू में आदेश का अनुपालन करने के बाद, कंपनी और मंत्रालय के अधिकारियों ने सोमवार शाम को बैठक की थी, जिसमें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ने तर्क दिया कि सामग्री “फ्री स्पीच” और “समाचार योग्य” है।

रंग दे बसंती व जय जवान जय किसान के नारे के साथ दिल्ली पहुंचे किसान

ढोल-ताशे के शोर के बीच सड़क के दोनों किनारे विभिन्न स्थानों पर खड़े लोगों ने किसानों पर फूल बरसाए। वाहनों पर झंडों के साथ खड़े प्रदर्शनकारी ‘ऐसा देश है मेरा’ जैसे देशभक्ति गीतों की धुन पर नाचते नजर आए।

गणतंत्र दिवस: हिंसक हुए किसान, लाल किले पर कब्जा, लहराया अपना झंडा

पुलिस ने लालकिले से प्रदर्शनकारी किसानों को हटाने के लिए हल्का लाठीचार्ज किया। करीब 45 मिनट तक किसानों का जमावड़ा लाल किले पर लगा रहा। इसके बाद धीरे-धीरे किसान समूहों में जाने लगे।

राकेश टिकैत ने कहा, यूपी और अन्य राज्यों में पुलिस-प्रशासन बरत रहा किसानों पर सख्ती, नोटिस और दबिश से दबाव की कोशिश

गणतंत्र दिवस पर 26 जनवरी को प्रस्तावित किसान गणतंत्र परेड को रोकने में विफल रहा सरकारी तंत्र अब दूसरे रास्तों से किसानों को रोकने की कोशिश कर रहा है।

वक्त की नब्ज: कमजोर पड़ता भरोसा

हो सकता है कि किसानों की चिंताएं बेबुनियाद हों। हो सकता है, नई निजी मंडियों से उनको लाभ हो, लेकिन अगर उनको मोदी सरकार पर विश्वास नहीं है तो दोष किसका है? क्या यह सच नहीं है कि अगर किसानों पर झूठे आरोप लगाने के बदले मोदी सरकर ने शुरू से कोशिश की होती ईमानदारी से उनकी शिकायतें सुनने की, तो यह नौबत न आती?

‘RIL के कहने पर PM ने बनाए ये कानून’, किसान आंदोलन में पहुंचीं ऐक्ट्रेस सोनिया मान ने कहा- नोटिसों से डर नहीं लगता

उन्होंने कहा, “यहां तो लोगों को यह नहीं पता है कि लाल मिर्च और हरी मिर्च एक ही पेड़ से निकलती हैं, वे लोग हमें बताएंगे कि कानून हमारे लिए सही है कि नहीं है। यह कानून सही नहीं है और हमें इसे रद्द करवाकर ही जाएंगे।”

देशकाल : आंदोलन राह भी चिराग भी

हर आंदोलन दुनिया में उम्मीद और परिवर्तन का एक नया पाठ लेकर आता है। इस लिहाज से आंदोलनों के इतिहास में झांकना और उनके बीच समान तत्वों की शिनाख्त करना आसान नहीं है। इस लिहाज से किसान आंदोलनों को देखें तो राष्ट्रीय आंदोलन के दिनों से भारत का किसान देश और समाज के लिए उम्मीद और परिवर्तन की नई-नई फसलें उगाता रहा है।

किसान आंदोलन मामले में शीर्ष अदालत की सरकार को फटकार, कानूनों पर अमल टाले केंद्र नहीं तो हम लगाएंगे रोक

सुप्रीम कोर्ट ने तीन कृषि कानूनों को लेकर किसानों के विरोध प्रदर्शन से निबटने के तरीके पर सोमवार को केंद्र को आड़े हाथ लिया। अदालत ने कठोर टिप्पणी करते हुए कहा कि किसानों के साथ केंद्र की बातचीत के तरीके से वह ‘बहुत निराश’ है।

दिल्ली के बॉर्डर पर डटे किसानों का आंदोलन इस बार क्यों है खास? जानिये

यह एक चिंगारी है, जो जल्द ही पूरे देश में आग लगा देगी, जैसा कि चीनी क्रांति में हुआ, और उस पराक्रमी ऐतिहासिक परिवर्तन की प्रक्रिया शुरू कर देगी…

26 जनवरी से पहले सरकार को ट्रेलर दिखाएंगे किसान, योगेंद्र यादव ने बताया प्लान

स्वराज इंडिया के संस्थापक योगेंद्र यादव ने कहा है कि बुधवार से दो हफ्तों के लिए देश जागरण अभियान शुरू किया जाएगा। इसके माध्यम से किसानों के विरोध को पूरे देश में फैलाया जाएगा।

देश: न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी जरूरी

किसान आंदोलन का सकारात्मक पहलू यह रहा है कि जमीन पर कुछ बड़े पूंजीपतियों के कब्जा होने और मंडी व्यवस्था खत्म करने की आशंका को लेकर विरोध के साथ ही न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की गारंटी पर केंद्रित हो गया है।

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