Environment

कोरोना काल में ऐसा क्या हुआ जिसे पर्यावरण विशेषज्ञ बता रहे हैं बड़ी उपलब्धि? पढ़ें

पर्यावरण और जलवायु विशेषज्ञों के एक समूह ने अपने एक शोधपत्र के माध्यम से खुशखबरी दी है कि 2020 में सार्वभौमिक गर्माहट (ग्लोबल वार्मिंग) को संचालित करने वाली ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में रिकॉर्ड गिरावट आई है।

राजनीति: बचाना होगा छोटी नदियों को

नदियों का संकट में होना आमजन के लिए भी संकट का कारण बन सकता है। सन 1951 में हमारे यहां प्रतिव्यक्ति चौदह हजार एक सौ अस्सी लीटर पानी सहजता से उपलब्ध था। लेकिन अनुमान है कि सन 2050 तक पानी की उपलब्धता तीन हजार एक सौ बीस लीटर प्रतिव्यक्ति ही रह जाएगी। यह स्थिति डराती है।

दुनिया मेरे आगे : अनुभूति की यात्रा

दूरदराज की समस्याओं का हल हमेशा हमारे पास होता है, पर खुद की और आसपास मौजूद समस्याओं का हल खोजना हमारे पसीने निकाल देता है। यही बात करीब मौजूद खुशियों पर भी लागू होती है। हमारे भीतर असीम क्षमताएं हैं, पर अगर हम उनका उपयोग नही करेंगे तो धीरे-धीरे वह कमजोर होकर लुप्त होती चली जाती है।

दुनिया मेरे आगे : नीड़ का निर्माण

मनुष्य हो या फिर पशु-पक्षी ,सभी को रहने के लिए घर की दरकार महसूस होती है। सभी तरह के सजीव लोग अपनी-अपनी सुरक्षा और सहूलियत के अनुसार मकान या घोंसलों का निर्माण करते हैं। लेकिन जब गौरैया को अपने नीड़ के निर्माण करते देखा तो यह सोचने को मजबूर हो गया कि एक पक्षी में इतनी समझ है कि वह एक डिग्रीधारी इंजीनियर को भी पीछे छोड़ देता है।

चौपाल: पराली की आंच

विभिन्न राज्यों के ग्रामीण क्षेत्रों में खरीफ फसलों की कटाई तथा मड़ाई के बाद किसानों द्वारा खेत में पराली जलाने का मुद्दा एक बार फिर सुर्खियों में है। सरकार द्वारा भी किसानों को पराली जलाने से रोकने का प्रयास किया जा रहा है।

चौपाल: जहरीली गैस से निजात नहीं

भारत में पिछले कुछ सालों में बिगड़ता पर्यावरण गंभीर चिंता का विषय बन चुका है। हालांकि भारत के वातावरण मे सल्फर डाइआक्साइड के उत्सर्जन में छह फीसद की गिरावट आई है, लेकिन इतने भर से काम नहीं चलने वाला।

‘मत भूलें, हिमालय है तो हम हैं’, भाजपा सरकार की 12,000 करोड़ खर्चीली अहम योजना को रामचंद्र गुहा ने बताया पर्यावरण के लिए खतरा

परियोजना के बढ़ते विरोध के बाद सुप्रीम कोर्ट ने विशेषज्ञों की एक कमेटी का गठन किया है, जिसने हाल ही में अपनी 800 पेज की रिपोर्ट पेश की है।

राजनीति: कचरे के ढेर पर बैठे शहर

एनजीटी का कहना है कि ठोस अपशिष्ट कचरे का निस्तारण न होने के कारण अधिकतर शहर महामारी के कगार पर पहुंच गए हैं। भारत सरकार की नेशनल जियोफिजिकल रिसर्च लेबोरेटरी के सर्वेक्षण के अनुसार, सत्तर का दशक शुरू होने के साथ ही औद्योगीकरण ने भारत के शांत मैदानों, झीलों, झरनों का परिदृश्य बदल दिया है, जहरीले भारी रासायनिक तत्त्वों से धरती के अंदर का जल निरंतर प्रभावित हो रहा है।

विशेष: ‘सर सांटे रूख रहे तो भी सस्तो जान’

सैनिकों ने बिना हिचके पेड़ काटने के आड़े आ रही अमृता देवी का सिर ही काट दिया। पेड़ की जगह एक मां ढह गई। मां तो मां है। अपनी तरह से अपनी सीख नई पीढ़ी को सौंपती है तो एक-एक करके तीनों बेटियां भी वही संकल्प दोहराती हुई आगे बढ़ीं।

राजनीति: वनों के सफाए से बढ़ते खतरे

यह दुखद है कि भारत में अब जैव विविधता नष्ट होने, जलवायु परिवर्तन और बढ़ते तापमान के दुष्परिणाम तेजी से सामने आ रहे हैं। फिर भी पिछले एक दशक के दौरान विभिन्न विकास परियोजनाओं, खनन और उद्योगों के लिए अड़तीस करोड़ से ज्यादा पेड़ काट डाले गए। विश्व के पर्यावरण संरक्षण सूचकांक में एक सौ अस्सी देशों की सूची में भारत एक सौ सतहत्तर वें स्थान पर है।

World Environment Day 2020: लॉकडाउन से दिखी पर्यावरण सुधार की राह, क्या सबक लेंगे हम?

World Environment Day 2020 Date, History: डॉ.संजीव मिश्र बता रहे हैं कि किस तरह लॉकडाउन ने हमें पर्यावरण सुधार की राह दिखाई है और इससे सबक लेकर हमें पर्यावरण सुधार की कार्य योजना बनाने की जरूरत है…

World Environment Day 2020: विश्व पर्यावरण दिवस क्यों मनाया जाता है, जानिये इसके पीछे की वजह

World Environment Day 2020 Date, Theme, Slogans: 1972 से विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जा रहा है। संयुक्त राष्ट्र संघ ने 5 जून 1972 को विश्व पर्यावरण दिवस मनाने की नींव रखी। तब से लगातार हर वर्ष 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जा रहा है।

World Environment Day 2018: पर्यावरण मंथन: ‘प्रकृति’ की नाराजगी के आगे घुटने टेकती ‘संस्कृति’

World Environment Day 2018 Theme, Slogan, Happy World Environment Day 2018 Wishes Quotes Images: इस साल पर्यावरण दिवस की थीम बीट प्लास्टिक पॉल्यूशन रखी गई है। पॉलीथीन पॉल्यूशन दूर करने का एक ही तरीका है कि इसके इस्तेमाल में कमी लाई जाए। इसके लिए खुद के प्रति जवाबदेही रखते हुए ईमानदारी से पॉलीथीन को अपने जीवन से रिमूव करना होगा।

कार की मार से बेहाल दिल्ली की हवा, प्रदूषण पर नहीं लग सकती लगामः CSE

ट्रकों के प्रदूषण में कटौती एक अच्छा कदम है। लेकिन बड़ी चुनौती दिल्ली में हर साल आ रही नई कारों का जखीरा और बाहर से रोजाना आने वाली चार पहिया गाड़ियों का रेला भी है।

पर्यावरण : जलवायु और तकनीक

हाइब्रिड वाहनों से अपेक्षाकृत संतुलित लागत में प्रदूषण को बहुत हद तक कम किया जा सकता है।

दुनिया में एक चौथाई मौतों के लिए पर्यावरण जिम्मेदार: WHO

विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि दुनिया में होने वाली कुल मौतों में से एक चौथाई के लिए पर्यावरणीय कारक जैसे वायु, जल और भूमि प्रदूषण, तथा असुरक्षित सड़कें और कार्यस्थल का तनाव आदि जिम्मेदार हैं।

टिकाऊ विकास के लिए

उत्तर आधुनिक दौर में हमने विकास की जिस आर्थिक नीति को स्वीकार किया हुआ है, वह औद्योगिक सभ्यता के मूल्यों का परिणाम है। पूर्णत: मशीन पर निर्भरता की वजह से श्रम का महत्त्व दिनोंदिन कम होता और पूंजी का महत्त्व बढ़ता जा रहा है..

अस्तित्व का संकट

पर्यावरण के बिना मनुष्य का कोई अस्तित्व नहीं है, लेकिन शायद मनुष्य यह भूल गया है।

किसान आंदोलनः
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