Education Policy

‘हिंदुत्व और पूंजीकरण से भरा है मोदी सरकार का शिक्षा नीति मसौदा’, पैनल ने लगाए गंभीर आरोप

मोदी सरकार ने राष्ट्रीय शिक्षा आयोग प्रस्ताव किया है। यह आयोग देश के समूची शिक्षा प्राइमरी से लेकर यूनिवर्सिटी लेवल तक को नियंत्रित करेगा। यह संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन है।

शिक्षा की गुणवत्ता का सवाल

एनएसएसओ की रिपोर्ट के अनुसार इस वक्त देश में निजी ट्यूशन ले रहे विद्यार्थियों की कुल संख्या लगभग 7.1 करोड़ है

पढ़ाई की पोल

बड़े महानगरों के शिक्षण संस्थानों में राजनीतिक प्रभाव वाले सूत्रधारक शिक्षकों का भारी जमावड़ा देखा जा सकता है।

परीक्षा और सीखने की प्रक्रिया

क्या किसी बच्चे की योग्यता, क्षमता और बुद्धिमत्ता का पैमाना महज अंकों का प्रतिशत ही है? वह भी उस परीक्षा प्रणाली में, जिसकी स्वयं की योग्यता संदेहों से घिरी हुई है?

बस्ते का बोझ

शिक्षा के निजीकरण के इस दौर में बस्ते का बोझ हल्का करने की बात एक सपना ही हो गई है। बच्चे के मानसिक तनाव को कम करने के प्रयास निरर्थक नजर आ रहे है।

शिक्षा के राष्ट्रीयकरण की जरूरत

विश्व बैंक की एक रपट कहती है कि भारत में छह से दस साल के कोई तीन करोड़ बीस लाख बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। रपट में यह भी कहा गया है कि भारत में शिक्षा को लेकर बच्चों में खासा भेदभाव है।

सरकार को RSS के सहायक संगठन का सुझाव- स्‍कूलों में पढ़ाई जाए संस्‍कृत, महानगरों में 12 घंटे चले क्‍लास

आरएसएस और इसके सहयोगी संगठनों का इस बात पर जोर है कि नई एजुकेशन पॉलिसी में शिक्षा का भारतीयकरण हो।

पढ़ाई के पैमाने

सच तो यह है कि सरकारी विद्यालयों की दुर्दशा और शिक्षा के बाजारीकरण की जिम्मेदारी सरकार पर आती है। शायद इस बात का इंतजाम किया जा रहा है कि गरीबों के बच्चे केवल इतना ही पढ़ें कि फैक्ट्रियों को मजदूर और क्लर्क मिलते रहें।

मुनाफे की शिक्षा

हम सब एक नारा लगाते रहे हैं- ‘शिक्षा है व्यापार नहीं!’ लेकिन अब शायद यह अपने अंतिम मुकाम पर है, जब उच्च शिक्षा हमेशा के लिए व्यापार हो जाएगी। चौदह दिसंबर..

स्मृति ईरानी ने कहा, शिक्षा का भगवाकरण नहीं हो रहा

केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने इन आरोपों को खारिज कर दिया कि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में शिक्षा का भगवाकरण हो रहा है। उन्होंने खेल तथा राजनीति में…