Editorial

एक अनार 23 बीमार

कांग्रेस का भारतीय राजनीति में बहुत लंबे समय तक सत्ता में रहना ही उसके वर्तमान की त्रासदी है। केंद्रीय सत्ता से लेकर राज्यों में कांग्रेस की लिफाफा सरकार का बोलबाला रहा है। सत्ता की प्रतीक बनी देश की ऐतिहासिक पार्टी के साथ ऐसा बहुत बड़ा तबका जुड़ा जिसका कोई जनाधार नहीं था। ये न सिर्फ सत्ता में रहे बल्कि इनके हाथों में कांग्रेस की केंद्रीय कमान भी रही।

राहत के रास्ते

यह अब एक सामान्य जानकारी है कि बाजार में आम उपभोग की वस्तुओं की आपूर्ति डीजलचालित वाहनों पर निर्भर है और डीजल के मूल्य में बढ़ोतरी के साथ ही माल ढुलाई पर ज्यादा खर्च आता है और इसका सीधा असर थोक और खुदरा बाजार पर पड़ता है।

अमन का रास्ता

भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि वह सैन्य तैनाती में कोई कटौती नहीं करेगा। फिर आतंकवाद को वित्तपोषण रोकने के लिए उस पर लगे प्रतिबंध जारी रहेंगे। यानी पाकिस्तान पर कसे बाकी शिकंजे बरकरार रहेंगे।

बेलगाम महंगाई

देश के कई शहरों में पेट्रोल के दाम जहां लगभग सौ रुपए प्रति लीटर तक पहुंच गए हैं, वहीं डीजल भी अस्सी रुपए प्रति लीटर से ज्यादा के भाव पर बिक रहा है।

संपादकीय: चुनौतियों भरा बजट

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को वर्ष 2021-22 का जो आम बजट पेश किया है, उसे बहुत उम्मीदों भरा बजट तो नहीं कहा जा सकता। यह बजट आम आदमी को कोई राहत देने वाला नहीं दिख रहा।

संपादकीय: अभिव्यक्ति के सामने

‘तांडव’ के कुछ दृश्यों को लेकर कुछ संगठनों ने यह आपत्ति जताई कि इससे उनकी धार्मिक भावनाओं को चोट पहुंची है। इसके बाद कई अन्य संगठन भी इसमें कूद पड़े।

संपादकीय: चुनौती भरा अभियान

टीकों को मंजूरी देने के मुद्दे पर भारत में जैसी राजनीति देखने को मिली और जिस तरह की आशंकाएं पैदा कर लोगों को डराया जा रहा है, उसे कहीं से उचित नहीं कहा जा सकता।

संपादकीय: बिहार की कमान

नीतीश कुमार सातवीं बार बिहार के मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। इतने समय तक सत्ता में रह कर वे अच्छी तरह जानते हैं कि बिहार में कहां किस चीज की जरूरत है। लालू प्रसाद यादव को नकार कर वहां के लोगों ने नीतीश कुमार को इसलिए कमान सौंपी थी कि उनकी छवि एक कुशल प्रशासक के रूप में बनी हुई है। सुशासन बाबू के नाम से उन्हें जाना जाता है।

संपादकीय: महामारी में पढ़ाई

बंदी खुलने के बाद बाजारों में कारोबारी गतिविधियां शुरू हो गई हैं। लोग रोजमर्रा की चीजें खरीदने जाने लगे हैं। शॉपिंग मॉल, दफ्तर, बसें आदि शुरू हो चुकी हैं। सब जगह लोग सावधानी बरतते हुए अपने जरूरी काम निपटा रहे हैं। हालांकि स्कूलों को नियमित तौर पर खोलना जोखिम भरा काम है, इसलिए उन्हें बंद रखने का फैसला किया गया है।

दुनिया मेरे आगे: मधुर गूंज की याद

कोयल का कूकना और आम का मौसम, ये एक महज संयोग हैं। यों कोयल का भोजन आम नहीं है। हालांकि अंतर्संबंध की तलाश मानवीय गुण है और इसी गुण की वजह से मनुष्य कई बार कोयल और कौवे के बीच भी अंतर्संबंध ढूंढ़ लेता है। दरअसल, यह एक ऐसा अंतर्संबंध है, जहां कोयल कौवे के घोंसले में अंडे देती है। यह दीगर बात है कि जीव-जगत ऐसी तमाम मिसालों से भरा पड़ा है, जहां एक दूसरे को कुदरती तौर पर पटखनी देते हैं।

संपादकीयः अनुशासन और नकेल

केंद्र सरकार भ्रष्टाचार को लेकर शुरू से काफी सख्त है। इसके लिए अधिकारियों पर नकेल कसने के मकसद से कई कड़े कानून बनाए गए हैं और सतर्कता अयोग तथा संबंधित महकमों को कड़ी नजर रखने का निर्देश है। इसके बावजूद कई बार देखा जाता है कि कोई कानूनी पेच निकाल कर या फिर अदालती कार्यवाही से बचने के लिए कई अधिकारी विदेश भाग जाते हैं।

दुनिया मेरे आगे: मन हुनरमंद है

मन की सेहत एक जरूरी आदत होनी चाहिए, वैसे ही जैसे भूख लगने पर पेट की आग शांत करना। मन को रसमय रखना बहुत बड़ी बात है। संसार की चकाचौंध और भागमभाग के बीच मन की हर धड़कन को बोझिल होने से बचाए रखना है।

राजनीति: लपटों से निकलते सवाल

दिल्ली, मुंबई जैसे महानगरों में पिछले एक-दो साल में जितने बड़े अग्निकांड हुए हैं उनसे यही साबित हुआ है कि चंद लापरवाहियों के चलते हम आग के आगे बेहद लाचार बन गए हैं। मर्ज आग की ताकत बढ़ जाना नहीं, बल्कि यह है कि आग से सुरक्षा के जितने उपाय जरूरी हैं, शहरीकरण की आंधी और अनियोजित विकास-नियोजन की नीतियों ने उन उपायों को हाशिये पर धकेल दिया है।

संपादकीय: अवरुद्ध सूचनाएं

यह अकारण नहीं है कि पिछले साढ़े चार-पांच सालों में सूचनाधिकार के तहत मांगी और प्राप्त की जाने वाली सूचनाओं की दर काफी कम हो गई है। अब तो कई बार स्थिति यह भी देखी जाती है कि इस कानून के तहत मांगी गई जानकारी को संबंधित विभाग यह कह कर ठुकरा देते हैं कि गोपनीयता के चलते वह जानकारी सार्वजनिक नहीं की जा सकती।

संपादकीय: चीन का दोहरापन

हैरान करने वाली बात यह है कि एक तरफ तो चीन भारत के साथ दोस्ती का दम भरता है और दूसरी ओर भारत के कट्टर दुश्मन मसूद अजहर को वह आतंकवादी मानने को तैयार नहीं है। हालांकि पुलवामा हमले की चीन ने निंदा की है, लेकिन यह उसका ढोंग भर है।

दुनिया मेरे आगे: घर की तलाश

नोटबंदी के बाद मकानों के दाम नीचे आने की खबर से अपने हौसले बुलंद हुए। कुछ प्रॉपर्टी एजेंट हमारा बजट सुनते ही कहते, इस बजट में इस इलाके में नहीं मिलेगा! एक प्रॉपर्टी एजेंट से फोन पर बात हुई। हम पति-पत्नी उसके ‘दफ्तर’ पहुंचे। छोटी-सी जगह में छह लोग बैठे थे। हमारा छोटा-सा इंटरव्यू लिया उन्होंने।

राजनीति: खाली हाथ किसान

केंद्र सरकार से उम्मीद थी कि राज्यों के मुकाबले बेहतर आर्थिक स्थिति के कारण किसानों के लिए ठोस सहायता राशि का इंतजाम करेगी। जितनी जमीन पर केंद्र सरकार ने छह हजार रुपए की सालाना सहायता राशि देने की घोषणा की है, उतनी ही जमीन पर तेलंगाना सरकार चालीस हजार रुपए दे रही है। तेलंगाना सरकार रयथू बंधु योजना के तहत राज्य के किसानों को प्रति एकड़ आठ हजार रुपए सलाना दे रही है और इससे तेलंगाना के अट्ठावन लाख किसानों को लाभ मिल रहा है।

संपादकीय: विवाद और समाधान

दिल्ली सरकार शुरू से ही यह दलील देती रही है कि एसीबी उसके अधिकार क्षेत्र में होना चाहिए, ताकि वह भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई कर सके। लेकिन अदालत ने साफ कर दिया है कि एसीबी दिल्ली सरकार का हिस्सा तो है लेकिन उस पर नियंत्रण उपराज्यपाल का ही होगा।

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