Economy

वृद्धि की राह पर लौटी अर्थव्यवस्था, अक्तूबर-दिसंबर में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 0.4 फीसद की बढ़त

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) द्वारा शुक्रवार को जारी आंकड़ों के अनुसार आलोच्य तिमाही में कृषि क्षेत्र में 3.9 फीसद और विनिर्माण क्षेत्र में 1.6 फीसद की वृद्धि हुई है।

पेट्रोल की महंगाई सरकार की नाकामी का सबूत- नरेन्द्र मोदी ने कहा था, जावड़ेकर बोले थे- 34 रुपए में म‍िल सकता है पेट्रोल

फरवरी 2015 में दिल्ली विधानसभा चुनावों से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि अगर नसीब के कारण पेट्रोल-डीजल के दाम कम होते हैं तो बदनसीब को लाने की क्या जरूरत है?

राहत की आस में बीड़ी श्रमिक

कोटपा कानून में संशोधन से बीड़ी उत्पादन, वितरण और व्यवसाय पर नियमन तो प्रभावी होगा, लेकिन इससे अशिक्षित और स्थानीय स्तर पर वन आधारित आजीविका चलाने वाले एक बड़े वर्ग के सामने रोजगार का खतरा खड़ा हो गया है। बीड़ी का उत्पादन और उसकी बिक्री से जुड़ा व्यवसाय मूल रूप से कुटीर उद्योग है।

राजनीति: विनिर्माण क्षेत्र को चाहिए रियायतें

भारत की श्रमशक्ति का एक सकारात्मक पक्ष यह है कि यहां श्रम लागत चीन की तुलना में सस्ती है। भारत के पास तकनीकी और पेशेवर प्रतिभाओं की भी कमी नहीं है। भारत के पास पैंतीस साल से कम उम्र की दुनिया की सबसे बड़ी आबादी है। ये सब विशेषताएं भारत को चीन से बाहर जाने वाले निवेश और कारोबार के मद्देनजर दूसरे देशों की तुलना में अधिक महत्त्वपूर्ण बनाती हैं।

दूसरी नजर: हर बार हैरान करते जाना

वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण का यह बयान कि मैं ऐसा बजट बनाऊंगी जैसा पहले कभी नहीं बना, पढ़ने के बाद मैंने अक्सर यही कहा है- क्यूरियसर एंड क्यूरियसर।

बांग्लादेश में 10 साल में 80 लाख लोगों को मिला गरीबी से छुटकारा, आनंद महिंद्रा बोले, कहीं हम पड़ोसी से पीछे न रह जाएं

विश्व आर्थिक मंच (WEF) के वीडियो में दिखाया गया है कि बांग्लादेश दुनिया के सबसे तेजी से विकास करती अर्थव्यवस्था में से एक है। इसमें बताया गया है कि बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था भारत से तेजी से आगे बढ़ रही है।

राजनीति: दीर्घकालिक विकास की चुनौतियां

एक महामारी भी हमें दीर्घकालिक विकास के प्रति सचेत कर सकती है और उसका रास्ता दिखा सकती है। इसलिए अब हमें विकास के उन तरीकों को त्यागने में देर नहीं करनी चाहिए जो जीवन के लिए संकट का कारण बन रहे हैं। जैसे हमें प्लास्टिक उपयोग से बचना होगा और पर्यावरण को बचाना होगा।

संपादकीयः चुनौती का सामना

संतोषजनक बात यह भी है कि विश्व बैंक और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष सहित कई वैश्विक संस्थानों और रेटिंग एजेंसियां भारत की आर्थिक वृद्धि को लेकर जो अनुमान व्यक्त करती रही हैं, उनकी तुलना में अर्थव्यवस्था में सुधार कहीं ज्यादा बेहतर नजर आ रहा है।

बेबसी में फंसे दो सौ करोड़ लोग

हर बड़ा संकट अपने साथ प्रभावों का एक लंबा सिलसिला भी साथ लेकर आता है। इस लिहाज से लेकर कोरोना संकट का सबसे दुखद अनुभव दुनिया भर में जिस रूप में सबसे ज्यादा दिख रहा है, वह यह कि इसने आर्थिक तौर पर दुनिया की बड़ी आबादी को रातोंरात विपन्नता के उस कगार पर ला दिया है, जहां से निकट भविष्य में उनका आसानी से उबरना मुश्किल है।

दूसरी नजरः उद्यम, समृद्धि और खुशहाली

भारत जैसे विकासशील देश में बेरोजगारी सदा से एक बहुत बड़ी चुनौती रही है। तेजी से घटती विकास दर (2018-19 और 2019-20) बेरोजगारी बढ़ाने में सहायक होती है। महामारी ने इसे भयावह बना दिया है।

दूसरी नजर: खौफनाक है नया सामान्य

कुछ बदलाव लंबे समय के बाद होते हैं और इन पर ध्यान सिर्फ तभी जाता है जब बदलाव कुछ महत्त्वपूर्ण कर गुजरता है। इसके कई उदाहरण हैं। क्या कोई वह दिन बता सकता है जब सर्वव्यापी एसटीडी, आइएसडी, पीसीओ के बोर्ड लुप्त हो गए? या वह समय जब लोगों ने समाचार सुनने के लिए आकाशवाणी लगाना बंद कर दिया?

तख्त हाल और मिसाल

सर्वोच्च पद पर होना और अपने जीवन और आचरण में भी सर्वोच्च आंका जाना दो जुदा बातें हैं। लोकतांत्रिक ढांचे में सर्वोच्च पदों की तो खासियत ही यह है कि इन पदों पर कोई भी आसीन हो सकता है। लोकतंत्र की इस देन ने हर जगह प्रेरक सुलेख लिखे हैं।

राजनीति: अर्थव्यवस्था में भरोसे का संकट

भारत की जीडीपी में उपभोक्ता खर्च की हिस्सेदारी साठ फीसद से अधिक है। जबकि रोजगार की दर गिर कर 36.2 फीसद हो गई है, यानी श्रमशक्ति का 63.8 फीसद हिस्सा बेरोजगार है। जिनके पास रोजगार है, उनकी भी कमाई घट गई है। परिणामस्वरूप उपभोक्ताओं का भरोसा रिकार्ड निचले स्तर 49.9 पर चला गया है।

RBI पॉलिसीः रेपो रेट जस की तस, गवर्नर बोले- -7.5% रहेगी इस साल GDP ग्रोथ

दास के मुताबिक, आने वाले दिनों में RTGS व्यवस्था को 24 घंटे और सातों दिन के लिए कर दिया जाएगा, जबकि जनवरी 2021 से कॉन्टैक्टलेस कार्ड ट्रांजैक्शन की सीमा दो हजार रुपए से बढ़ाकर पांच हजार रुपए कर दी जाएगी।

कोरोना का असर, विनिर्माण क्षेत्र में सुस्ती, नवंबर में तीन महीने के निचले स्तर पर PMI

आईएचएस मार्किट इंडिया का विनिर्माण खरीद प्रबंधक सूचकांक (PMI) नवंबर में घटकर 56.3 रह गया, जो अक्टूबर में 58.9 था। यह इसका तीन माह का निचला स्तर है।

दूसरी नजर: पीछे जाते हम

हम ऐसी अजीबोगरीब दुनिया में रह रहे हैं, जिसमें साम्यवादी चीन का राष्ट्रपति खुल कर मुक्त व्यापार और वैश्वीकरण की बात करता है और पूंजीवादी अमेरिका का राष्ट्रपति उपहासपूर्ण ढंग से व्यापार समझौतों, डब्ल्यूटीओ, जलवायु संकट और पेरिस समझौते की बात करता है! क्या दुनिया उलट-पुलट हो रही है?

कोरोना का कहर: 24 साल में पहली बार मंदी की गिरफ्त में भारत, पर उम्मीद की एक किरण भी

इसी बीच, मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) केवी सुब्रमणियम ने कहा कि अर्थव्यवस्था का जिस तेजी से पुनरूद्धार हो रहा है उससे लगता है कि चालू वित्त वर्ष में इसका प्रदर्शन अब तक के अनुमानों से बेहतर रहेगा। उन्होंने यह बात दूसरी तिमाही में अर्थव्यवस्था में संकुचन अनुमान के विपरीत कम रहने के बीच कही।

अर्थव्यवस्था पर कोरोना का कहर! सरकारी डेटा से खुलासा- दूसरी तिमाही में GDP में 7.5 प्रतिशत की गिरावट

वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में जीडीपी में 7.5 फीसदी की गिरावट दर्ज हुई है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक विनिर्माण क्षेत्र में तेजी से गिरावट देखी गई।

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