Dunia mere aage opinion

बोली के संदर्भ

यह कोई बताने वाली बात तो नहीं, लेकिन पिछले कुछ समय के दौरान एक बदलाव यह आया है कि आजकल हमने अपने घर में...

कसौटी पर श्रेष्ठता

आदिकाल से ही हमारा समाज जाति और वर्गों में बंटा हुआ है। उच्च कही जाने वाली जातियां और ऊंचे वर्गों वाले लोग अपने से...

जिंदगी का तराना

इंद्रधनुषी रंगों से भरे पल हमारी जिंदगी की खूबसूरती बढ़ाने के साथ-साथ हममें नई ऊर्जा भरते हैं। हर रंग हमसे कुछ कहना चाहते हैं।...

पहाड़ का संघर्ष

शहरों की ओर पलायन बढ़ा, प्रदूषण बढ़ा और जल संकट उभरा। यह सब हकीकत की शक्ल में हमारे सामने था, फिर भी हमने पलायन...

रंगों से अनुराग

बचपन में रंगों में डूब कर होली मनाने का आनंद ही कुछ और था। अब हम बड़े हो गए हैं, इसलिए वह लड़कपन नहीं...

इंद्रधनुषी सौंदर्य

रंगों की सुंदरता तो उसके नैसर्गिक रूप में ही है। इनके बीच वैमनस्य पैदा कर प्रतिस्पर्धा कराने का हक हमें नहीं हो सकता, क्योंकि...

अभिव्यक्ति का आकाश

पिता-पुत्र या भाई-भाई के भिन्न विचारों को लेकर होने वाले झगड़े या मनमुटाव को हमारा समाज सामान्य रूप में स्वीकार कर लेता है, लेकिन...

इंसानियत का चेहरा

बाघों, शेरों सहित कई वन्य जीवों की घटती संख्या के बारे में आए दिन हम अखबारों में पढ़ते और टीवी पर देखते-सुनते हैं।

दुनिया मेरे आगे: सहयोग का समाज

यह किस्सा किसी एक किसान का नहीं, पूरे देश भर के किसानों का है। आए दिन यहां अलग-अलग कारणों से कई अर्थियां उठती हैं।...

दुनिया मेरे आगे: हृदयजीवी का हर्ष

हमारे समाज में इन लोगों को बुद्धिजीवी नहीं कहा जाता। क्या ये अपनी एड़ी का इस्तेमाल करके इस तरह के खूबसूरत काम करते हैं?...

दुनिया मेरे आगेः ओ री गौरैया

तब हमारे दिल्ली वाले मकान में मात्र दो कमरे, रसोई, गुसलखाना, शौचालय और एक बरामदा था। बाहर अमरूद के नीचे आंगन में खाना खाते...

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