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कोरोना से आम लोगों पर रोटी का संकट, पर इन अरबपतियों ने इस साल बना लिए दो खरब डॉलर

दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति जेफ बेजोस के लिए यह दूसरा सबसे अच्छा साल रहा। बेजोस ने अपनी 182 बिलियन डॉलर की संपत्ति में 2020 में 67.5 बिलियन डॉलर की वृद्धि की है।

कोरोना वैक्सिनेशन की तैयारियां सिर पर! केंद्र से बोला SC- 7-8 माह से जुटे डॉक्टरों को आराम देने पर करें विचार

उच्चतम न्यायालय ने कहा कि कोविड-19 से निपटने में लगे डॉक्टरों का लगातार काम करना संभवत: उनके मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहा है

विशेष: पीड़ा में महाप्राण

जॉन बैरी ने अपनी पुस्तक ‘द ग्रेट इनफ्लुएंजा-द एपिक स्टोरी आफ द डेडलिएस्ट पेंडेमिक इन हिस्ट्री’ में इस महामारी की विकरालता का वर्णन करने के साथ भारत में इस महामारी के फैलने के कारणों पर भी प्रकाश डाला है।

विशेष: अकाल और महामारी का मैला आंचल

रेणु ने अपनी कहानी ‘पहलवान की ढोलक’ और ‘प्राणों के घुले हुए रंग’ में हैजा और मलेरिया महामारी से बदलते सामाजिक और राजनीतिक परिवेश की गहरी पड़ताल की है। रेणु की कई रपटों में उस समय के अकाल, बाढ़ और गरीबी का जिक्र मिलता है।

विशेष: संक्रमण जब-जब लेखन तब-तब

अब सवाल यह है कि इन महामारियों का संज्ञान उस समय के साहित्य ने किस तरह लिया? समाज में घटित घटनाओं का संज्ञान लेना साहित्य का दायित्व होता है। साहित्य अपने समय को रेखांकित करता है। वह अपने समय के सवालों से लगातार टकराता है। साहित्य इन सबसे अछूता नहीं रह सकता।

राजधानी में 24 घंटे में कोरोना से 79 मरीजों की मौत, देश में संक्रमण के नए मामलों में से 77 फीसद 10 राज्यों से हैं

संक्रमण के 6,953 नए मामले, संक्रमितों की संख्या बढ़कर 4,30,784 हुई, शहर में अभी 40,258 मरीजों का इलाज चल रहा है।

विशेष: त्योहार के दिनों में स्वास्थ्य की देखभाल, उत्सव के संग सेहत का रंग

उत्वधर्मिता हमारे देश की संस्कृति है और उत्सव का मतलब है मिलना-जुलना, देवी पंडाल और मेले। लेकिन जब लोगों को इससे दूर रहना पड़ जाएगा तो उनका अवसाद में आना स्वाभाविक है। वैसे भी अक्तूबर से मौसम बदलता है, जिसका असर दिमागी सेहत पर भी पड़ता है।

विशेष: कोरोना के भय से 12 फीसद भारतीयों को नहीं आ रही नींद

भारत में सामान्य स्थिति में 7.5 फीसद लोग मानसिक रोगी हैं जिनमें से बहुत ही कम लोगों को इलाज मिल पाता है। कोरोना संकट के बीच सिर्फ भारत के लोग ही अवसादग्रस्त नहीं हो रहे हैं, बल्कि अमेरिका और ब्रिटेन में भी ऐसे लोगों की संख्या बढ़ी है।

राजनीति: चुनौती बनता मानसिक स्वास्थ्य

सही समय पर मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान न देने से यह खतरा वयस्कता तक बढ़ सकता है और इससे शारीरिक तथा मनोवैज्ञानिक दोनों प्रकार के स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है। आज देखने में आ रहा है कि पूर्णबंदी के दौरान घरों में कैद रहने के कारण ज्यादातर बच्चों में अवसाद के लक्षण पैदा हो गए। बाहर निकलने, दोस्तों से मेल-मुलाकात करने, खेलने-कूदने जैसी सारी गतिविधियों के बंद हो जाने से बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ा है

दुनिया मेरे आगे: सपने और हकीकत के बीच

हमने क्या सीखा? संकट से हम कैसे पार हुए? जो जीत जाएंगे, उनके पास हौसला होगा कि जिसे वे अपना जीना मान रहे थे, वे सारी सुख-सुविधाएं उनसे छिन गईं, तब भी वे जी सकते हैं। सुख-सुविधाओं का होना, आपका होना नहीं होता। सुख-सुविधाओं को हटा देने पर जो बचता है, वह हमारा जीवन है।

विशेष: अभाव भारी त्योहार जारी

मौत के मंजर पर भी जिंदगी को आना ही होता है तो बहुत सी महिलाओं के लिए सड़क और तीन-चार दिन चल कर रास्ता भूलने वाली ट्रेनों में जचगी का भी तो इंतजाम करना था। इन सबके बीच जो टूटा-दरका और पूरी तरह नकाम साबित हुई वह थी सरकारी व्यवस्था, प्रशासन के बड़े-बड़े दावे।

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