Corona Crisis

गरीबी का गहराता संकट

भारत दुनिया के सबसे ज्यादा आर्थिक असमानता वाले देशों में एक है, जहां अमीर तेजी से और अमीर हो रहे हैं और गरीब की हालत और बिगड़ती जा रही है। महामारी से बचाव के लिए किए गए कुछ उपायों ने असमानता की खाई को कई गुना बढ़ा दिया।

खतरा और बचाव

भारत में कोरोना महामारी का जोर अब कमजोर भले पड़ने लगा हो, लेकिन खतरा अभी टला नहीं है।

सभी 11 जिलों में करीब 25000 लोगों के बीच हुआ सर्वे, आधी दिल्ली में कोरोना के खिलाफ प्रतिरोधी क्षमता विकसित

कोरोना टीकाकरण के बीच दिल्ली में सामूहिक प्रतिरोधक क्षमता बढ़ने के संकेत मिले हैं। हाल ही में दिल्ली सरकार ने दिल्ली में 5वां सीरो सर्वे करवाया है जो अब तक का सबसे बड़ा सीरो सर्वे है।

देश में पोषण पर 3 टॉप पैनल, पर महामारी काल में न हुई 1 भी बैठक; कांग्रेस बोली- ये नहीं है मोदी जी की प्रायरिटी लिस्ट में

दिग्विजय सिंह ने एक ट्वीट में कहा, ‘आश्यर्च की बात है। गरीब, वंचित और कुपोषित मोदी जी की प्रथमिकता सूची में नहीं हैं। किसान विरोधी कानूनों द्वारा अपने दोस्तो को सुविधा देना ही उनकी प्राथमिकता है।’

संपादकीय: दोहरी चुनौती

विश्व के तमाम देश पिछले करीब साल भर से कोरोना महामारी से जूझ रहे हैं। लंबे समय तक इसकी मार झेलने के बाद अब जाकर कुछ उम्मीद इसलिए बन रही है कि इससे बचाव के लिए टीके तैयार होकर सामने आ रहे हैं।

चिंतन: नए विचार की बारी और हरारी

समय का संदर्भ बदलते ही उन विचारों पर भी बदलने का दबाव बढ़ जाता है, जो नए हालात की ठीक से व्याख्या नहीं करते या उससे आगे देखने का जोखिम नहीं लेते। इस लिहाज से कोरोनाकाल में जो लेखक-विचारक सर्वाधिक चर्चा में रहे, उनमें युवाल नोवा हरारी का नाम अव्वल है।

कारोबारी लड़ाई से शक के घेरे में आए दोनों कोरोना टीके: अदर पूनावाला पर जवाबी हमले में भारत बायोटेक एमडी ने SII के वैक्सीन पर उठाया सवाल

भारत बायोटेक के अध्यक्ष डॉ  कृष्णा एल्ला ने कहा कि हमने 200 प्रतिशत ईमानदारी से परीक्षण किये हैं। लेकिन इसके बावजूद भी हमारी आलोचना की जा रही है। कुछ कंपनियों ने तो हमारी वैक्सीन को पानी की तरह बता दिया। लेकिन मैं यह मानने को तैयार नहीं हूँ। हम भी वैज्ञानिक हैं।

राजनीति: आर्थिक चुनौतियों का साल

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2020-21 में भारत की जीडीपी में गिरावट तो आएगी, लेकिन भारत ने कोरोना संकट से निपटने के लिए जिस तेजी से सुधार के कदम उठाए हैं, उससे आगामी वित्तीय वर्ष में भारत 8.8 फीसद की विकास दर हासिल करने की संभावनाओं वाला देश बन गया है।

कोरोना संकट के बावजूद जीएसटी कलेक्शन ने तोड़ा रिकॉर्ड, ऑल टाइम हाइ 1.15 लाख करोड़

पिछले साल की तुलना में दिसंबर 2020 में आयात से 27 प्रतिशत अधिक राजस्व जमा किया और घरेलू लेनदेन (सेवाओं के आयात सहित) से 8 प्रतिशत अधिक राजस्व जमा किया गया।

संपादकीय: उम्मीद का टीका

पिछले साल ज्यादातर वक्त दुनिया के तमाम देश कोराना महामारी की वजह से खड़ी चिंता से जूझते रहे। हर तरफ सिर्फ एक ही उम्मीद थी कि किसी तरह इस बीमारी का इलाज सामने आए, ताकि जनजीवन सामान्य हो सके।

संपादकीय: नया खतरा

ब्रिटेन से फैले कोरोना विषाणु के नए रूप ने एक बार फिर दुनिया के समक्ष महामारी के और गंभीर रूप में लौटने का खतरा पैदा कर दिया है। ब्रिटेन से भारत पहुंचे कुछ लोगों में इस विषाणु के नए रूप की मौजूदगी की पुष्टि होने के बाद यह अंदाजा लगा पाना मुश्किल है कि भारत में कितने लोग इसकी चपेट में आए होंगे।

बेबसी में फंसे दो सौ करोड़ लोग

हर बड़ा संकट अपने साथ प्रभावों का एक लंबा सिलसिला भी साथ लेकर आता है। इस लिहाज से लेकर कोरोना संकट का सबसे दुखद अनुभव दुनिया भर में जिस रूप में सबसे ज्यादा दिख रहा है, वह यह कि इसने आर्थिक तौर पर दुनिया की बड़ी आबादी को रातोंरात विपन्नता के उस कगार पर ला दिया है, जहां से निकट भविष्य में उनका आसानी से उबरना मुश्किल है।

अपनेपन की हवा

पूरी दुनिया में कोरोना संक्रमण की वजह से यात्राओं पर लगे प्रतिबंध के कारण कई लोग इस साल अपने देश, अपने शहर नहीं लौट पाए और घरों से दूर ही रहे गए।

मुश्किल दौर में बचपन

कोरोना महामारी की मार सबसे ज्यादा बच्चों पर पड़ी है। लगातार स्कूल बंद होने से आॅनलाइन शिक्षा का विकल्प जरूर खुला पर इसे स्थायी विकल्प के तौर पर इसलिए भी नहीं देखा जा सकता क्योंकि साधनहीनता के कारण कई बच्चे इस तरह पढ़ाई नहीं कर पाते हैं।

2020 साल से ज्यादा सवाल

कोविड-19 का संकट सिर्फ सेहत का वैश्विक संकट नहीं है बल्कि यह सभ्यता का संकट भी है। इसलिए इससे निपटने की राह व्यक्ति, समाज और आचरण से होकर कहीं ज्यादा गुजरेगी।

चौपाल: भविष्य का जीवन

अब हम जब या तो कोरोना से मुक्ति पा लेंगे या फिर इसके साथ जीएंगे, तब निश्चित ही अपने आप में एक सकारात्मक परिवर्तन को निकटता से अनुभव करेंगे। अनुभव सबके अपने-अपने अलग-अलग होंगे। लेकिन एक बात समान होगी कि अनावश्यक परिग्रह से काफी हद तक हम मुक्ति पा लेंगे।

चौपाल: चीन का चेहरा

दुनिया भर में अपनी झूठी शान का प्रचार करने वाला चीन इस समय अनाज के भारी संकट के दौर से गुजर रहा है। कुछ समय पहले चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने चीन के नागरिकों से अनाज की बबार्दी न करने की अपील की थी। चीन अपने देश के नागरिकों से भी अनाज संकट को छिपाने का प्रयास कर रहा है।

संपादकीय: हल्की होती जेब

महामारी के इस दौर में सबसे बुरी मार आम आदमी की जेब पर पड़ी है। कोविड-19 के प्रकोप से बचने के लिए पूर्णबंदी की गई तो हर तरह के कामकाज ठप पड़ गए। बंदी हटने के बाद बड़े उद्योग फिर से अपने पैरों पर खड़े होने लगे, पर मध्यम, छोटे और सूक्ष्म उद्योग, असंगठित क्षेत्रों के कामकाज आज तक पटरी पर नहीं लौट सके हैं।

ये पढ़ा क्या?
X