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बेबाक बोल-राजकाज-कांग्रेस कथा: सत्ता और संत

जयप्रकाश नारायण की अगुआई में जनता के प्रतिरोध की आंधी इंदिरा गांधी महसूस कर रही थीं। उस समय चंद्रशेखर ने उन्हें जेपी की ताकत की चेतावनी देते हुए उनके साथ सुलह-समझौते का रिश्ता बनाने की सलाह दी थी। तत्कालीन प्रधानमंत्री ने चंद्रशेखर की सलाह न मान कर संत को ही साधने की ठान ली। लेकिन संत से टकराने के बाद इंदिरा गांधी की सत्ता का विनाश हुआ। इसी तरह अण्णा हजारे के आंदोलन की ताकत पहचानने की नसीहत को सोनिया गांधी ने परे रखा और कांग्रेस रसातल में चली गई। आज दिल्ली की सीमाओं पर किसान संतन की तरह धुनी रमाए हैं और चंद्रशेखर जैसी भूमिका सुप्रीम कोर्ट निभा चुका है। हम गांधी से लेकर जेपी और अण्णा तक की कथा को एक बार फिर से सुनेंगे तो पाएंगे कि आजादी के पहले से लेकर आज तक के भारत में बड़े सियासी परिवर्तन उन्हीं संत जैसे लोगों के कारण हुए जिन्हें सत्ता का मोह नहीं था। बेबाक बोल में संतन से भिड़ी सत्ता पर बात।

बेबाक बोल- राजकाज- कांग्रेस कथाः एक समय की बात है

अब तक इंदिरा गांधी को निज के परिवार से मिली लोक की सत्ता पर अहंकार होने लगा था। उनका यह अहंकार टूटा 1972 में शिमला में हुए कांग्रेस कार्यसमित के चुनाव में।

बेबाक बोल-राजकाज-कांग्रेस कथा: शक और मात

दिल्ली की सीमाओं पर एक से दो डिग्री की कड़कड़ाती ठंड में जवान से लेकर बुजुर्ग किसान हौसले का अलाव तेज कर रहे थे तो कांग्रेस के खेमे की तरफ ‘राहुल कहां हैं’ का आलाप शुरू हो गया।

बेबाक बोल- कांग्रेस कथा: आगे बंगाल की खाड़ी

ममता बनर्जी जुझारू नेता हैं और वो अपनी जमीन बचाए रखने की पूरी कोशिश करेंगी और भाजपा वहां के हिंदी भाषी प्रदेशों में अपनी पैठ बना चुकी है। ममता बनर्जी ने जिस परिवर्तन को वाम की ओर मोड़ा था आज भाजपा ‘खोए गौरव’ के नारे से उसे तृणमूल की ओर मोड़ चुकी है।

बेबाक बोल-कांग्रेस कथा: श्री हीन

सामूहिक असंतोष से निकले संघर्ष से पैदा हुए थे श्रीकृष्ण सिंह जिन्होंने नमक सत्याग्रह का रास्ता तैयार किया था। नमक की लड़ाई से तपा हुआ शरीर, अंग्रेजों के आगे हुंकार भरती आवाज के कारण ही वो स्वाधीनता संग्राम के बाद बिहार के पहले अगुआ बने।

कांग्रेस कथा: बिहार से बहिष्कार

केंद्र की सत्ता का ताला आज भी उत्तर प्रदेश और बिहार की चाबी से खुलता है। इन दोनों राज्यों की सीटें उस जादुई आंकड़े का काम करती हैं जिसे बहुमत कहते हैं।

बेबाक बोल- कांग्रेस कथा : कांग्रेस कहां बा

भिखारी ठाकुर को अपनी जीविका के लिए कलकत्ता जाना पड़ा था। कलकत्ता यानी तब का विदेश। एक बिहारी को ‘बिदेशिया’ और ‘बिरहा’ बनाने वाली शक्तियों पर ही नेहा भोजपुरी गीतों से हमला करती हैं।

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