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चौपालः पर्यावरण की फिक्र

एक तरफ जहां घटती हरियाली के चलते पर्यावरण संतुलन बिगड़ रहा है तो दूसरी तरफ सरकारें ही देश के विकास को रफ्तार देने या लंबे चौड़े एक्सप्रेस-वे बनवाने के नाम पर 50 से 100 सौ साल तक पुराने और विशालकाय हजारों-लाखों वृक्षों को काटने का फरमान जारी करने में विलंब नहीं करतीं।

चौपाल: कांटे से कांटा

पुलवामा के आतंकी हमले की विश्व भर में घोर निंदा हुई है। सभी देशों ने भारत के साथ सहानुभूति और एकजुटता जताई है। अब समय आ गया है जब सरकार कोई निर्णायक कदम उठा कर आतंक के इस नासूर को जड़ से साफ कर दे। कहने की आवश्यकता नहीं कि श्रीलंका ने बहुत सहा मगर […]

चौपाल: आतंक का दंश

जब बात भारत की अखंडता, अस्मिता, सांप्रदायिक सौहार्द पर मंडराते खतरे की हो तब भी नेताओं की जुबानें जले पर नमक छिड़कने का काम कर रही हैं। आतंकी हमले जैसे संवेदनशील मसले पर भी राजनीतिक दल अपना फायदा देखने की कोशिश कर रहे हैं।

चौपाल: समय की मांग

सत्तापक्ष अनशन-धरनों पर कम ही बैठे देखे जाते हैं, लेकिन राज्य स्तर की नई किस्म की राजनीति के तहत केंद्र सरकार से टकराने और मतदाताओं को लुभाने या यों कहें कि बरगलाने के लिए सरकारी कोष को दोनों हाथों से दिल खोल कर बर्बाद किया जा रहा है।

चौपाल: कैसा भय

इस समय केंद्र सरकार 299 व्यक्तियों को सुरक्षा प्रदान कर रही है। इसके अलावा राज्य सरकारों ने अपने तमाम नेताओं को अलग से सुरक्षा दे रखी है। इन 299 व्यक्तियों में से 26 को जेड प्लस सुरक्षा, 59 को जेड श्रेणी, 145 को वाई प्लस, जबकि एक व्यक्ति को वाई श्रेणी और 68 को एक्स श्रेणी की सुरक्षा मिली हुई है।

चौपाल: प्रियंका से उम्मीदें

जिस तरह कांग्रेसी कार्यकर्ता प्रियंका गांधी में इंदिरा गांधी की छवि देख रहे हैं तो यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि क्या वे अपनी दादी इंदिरा गांधी जैसा करिश्मा कर पाएंगी।

चौपाल: कैसी पारदर्शिता!

राजनीतिक प्रतिद्वंदिता के कारण विपक्ष के लोग सत्ता पक्ष पर और सत्ता पक्ष के लोग विपक्ष पर आरोप-प्रत्यारोप लगाते रहते हैं। मगर जो सत्ता में बैठा है, उसके जिम्मे यह बात है कि सिर्फ आरोपों का खंडन न करे, बल्कि यह साबित भी करे कि सभी आरोप मनगढ़ंत हैं।

चौपाल: सब्र का इम्तहान

राहुल गांधी से कौन कहे कि रफाल का किस्सा किसी सिरे तक तो पहुंच जाने दें। महीनों पहले ही क्यों चोर-चोर चिल्लाना शुरू कर दिया आपने! प्रधानमंत्रीजी तो खैर सर्वेसर्वा हैं और किसी भी हद तक जा सकते हैं, हदों को लांघ भी सकते हैं!

चौपाल: क्रांति की शर्त

एनएसएसओ की रिपोर्ट कहती है कि देश के कुल कार्यबल में केवल पांच फीसद लोग औपचारिक रूप से प्रशिक्षित हैं, और महज दस फीसद लोग डिजिटल रूप से साक्षर हैं। जैसा कि हम जानते हैं, चौथी औद्योगिक क्रांति, जो उन्नत तकनीक पर आधारित है, उसके संचालन के लिए…

चौपाल: दुराव से दूर

कहीं ऐसा न हो कि तर्क-वितर्क में तो हम जीत जाएं मगर हमारे आपसी रिश्तों में दरार पड़ जाए! चुनाव तो हर पांच साल में आते-जाते रहेंगे लेकिन दोस्त और हितैषी वर्षों की साधना के बाद ही मिलते हैं।

चौपाल: गारंटी के साथ

प्रो. स्टेंडिंग के अनुसार भारत में यूबीआई को लागू करने पर जीडीपी का तीन से चार प्रतिशत खर्च आएगा जबकि अभी कुल जीडीपी का चार से पांच प्रतिशत सब्सिडी में चला जाता है। उनके मुताबिक यूबीआई और सब्सिडी एक साथ नहीं चल सकते, इससे सरकार पर वित्तीय भार ज्यादा पड़ेगा।

चौपाल: कुपोषण के विरुद्ध

सरकार ने अपने स्तर पर प्रयास तो बहुत किए है लेकिन अपेक्षित सफलता नहीं मिल रही है। कुपोषण के कारण विकलांग बच्चे दिखने को मिलते हैं। सरकार को कुपोषण दूर करने के लिए तत्काल प्रभावी उपाय करने चाहिए।

चौपाल: दावे पर संशय

सवाल यह भी है कि भारत जैसे देश में, जहां किसी न किसी राज्य में चुनावी माहौल बना रहता है, तो क्या आगे से सीबीआइ चुनाव के दिनों में अपनी जांच को रोक कर बैठ जाए? इस वाकये के बाद यकीनन सीबीआइ के आधिकारियों के मन में असुरक्षा की भावना बैठ जाएगी।

चौपाल: शहीदों से साथ

अदम्य साहस और वीरता से दुश्मनों के छक्के छुड़ाने के फलस्वरूप मिले पदक अपने परिवार के पालन-पोषण एवं शिक्षा की खातिर बेचने की मजबूरी सैनिकों के दिलों पर वज्रपात सरीखी है। यह मजबूरी देश के लिए सर्वस्व न्योछावर करने वाले जांबाजों के अरमानों की बलि है।

चौपाल: आरक्षण में सेंध

आरक्षण का प्रावधान इस लक्ष्य के साथ किया गया था कि जो ऐतिहासिक रूप से शोषित और पिछड़े रह गए उनका भी प्रतिनिधित्व सरकारी सेवाओं और शैक्षणिक संस्थानों में सुनिश्चित हो सके। लेकिन विडंबना देखिए कि सामान्य वर्ग, जो अपनी जनसंख्या से अधिक प्रतिनिधित्व रखता है, उसे ऊपर से आरक्षण भी दिया जा रहा है।

चौपाल: बढ़ता अविश्वास

संविधान के जानकार इसे बंगाल पुलिस और सीबीआइ विवाद के इतर केंद्र-राज्य विवाद के रूप में देखने लगे। हालांकि ममता बनर्जी के धरने पर बैठने के बाद इसे केंद्र-राज्य विवाद के रूप में देखना कोई आश्चर्य की बात भी नहीं है।

चौपाल: भ्रष्टाचार का रोग

हाल ही में विश्व बैंक की एक रिपोर्ट में कहा गया कि भारत में सालाना 6,350 करोड़ रुपए रिश्वत का लेन-देन होता है। यह आंकड़ा 2005 से कम है। तब सालाना 20,500 करोड़ रुपए की रिश्वत का लेन-देन होता था।

चौपाल: आबादी से संकट

आज इसके कारण करोड़ों युवा बेरोजगार घूम रहे हैं। लोग प्रतिदिन संसाधनों की कमी के कारण गरीबी के दलदल में धंसते जा रहे हैं। जमीन की बढ़ती मांग के कारण जंगलों को उजाड़ा जा रहा है, जिससे पर्यावरण प्रदूषित हो रहा है।