Chaupal Opinion

चौपाल: कृषक की आवाज

मैथिली शरण गुप्त ने लिखा है- ‘हो जाए अच्छी भी फसल, पर लाभ कृषकों को कहां/ खाते, खवाई, बीज ऋण से हैं रंगे रक्खे जहां/ आता महाजन के यहां वह अन्न सारा अंत में/ अधपेट खाकर फिर उन्हें है कांपना हेमंत में!’

चौपाल: नैतिकता ही रास्ता

यह नहीं भूलना चाहिए कि जीवन में हम जो कुछ भी धन-संपत्ति भ्रष्ट कर्मों से प्राप्त करते हैं, वह न तो हमें सुख दे सकती है, न ही परिवार के अन्य सदस्यों को। बल्कि आखिरकार यह हमें कष्ट ही देती है।

चौपाल: हड़बड़ी का फैसला

संसद का प्रतिनिधित्व करने वाली सरकार ने उसे भंग कर देश पर समय से पहले चुनाव लादने का फैसला कर लिया, जो संसदीय लोकतंत्र की मूल भावना के बिल्कुल विपरीत है।

चौपाल: हाशिये पर सुरक्षा

महिलाओं से संबंधित बढ़ते अपराधों, जिनमें दहेज उत्पीड़न, कार्यस्थल पर भेदभाव, सार्वजनिक स्थानों पर छेड़छाड़ और उन पर तेजाबी हमला आदि आज गंभीर चिंता का विषय बन गए हैं।

चौपाल: बचाव के बरक्स

कॉलेज और स्कूलों में प्रतिबंध होने के कारण नहीं आ-जा पाने की वजह से अब बच्चों और युवाओं के अंदर चिड़चिड़ापन आना भी शुरू हो गया है। यों सरकार की ओर से योग कक्षाएं भी आनलाइन चलाई जा रही हैं, लेकिन उसकी समय-सारणी नहीं बनी हुई है।

चौपाल: मतभेद से आगे

नागरिकों की तर्कशक्ति में आमूलचूल परिवर्तन के परिणामस्वरूप लोकतांत्रिक प्रक्रिया में अलग-अलग विचारधारा को देश-प्रदेश का नेतृत्व करने का अवसर मिला है। इसे हम नागरिकों की राजनीतिक चेतना के रूप में भी परिभाषित कर सकते हैं।

चौपाल: विविधता की फसल

साल 2017-18 के आर्थिक सर्वेक्षण के मुताबिक ‘मोनोकल्चर’ की वजह से पंजाब में अब फसलों की पैदावर कम हो रही है, खाद डालने के बाद भी फसलों पर फर्क कम पड़ता है, मिट्टी की गुणवत्ता कम हो गई है। इसका सीधा असर बाजार और कीमतों पर पड़ता है।

चौपाल: उधार की जमीन

भारत अड़तालीस लाख एकड़ प्रतिवर्ष की दर से वन को गंवाता जा रहा है। हमें यह सोचना चाहिए कि हमने यह भूमि अपने पूर्वजों से पृथक रूप से प्राप्त नहीं की है। हमने इसे अपने बच्चों से उधार लिया है।

चौपाल: सकारात्मकता का सफर

अगर हम उस वक्त मुस्कुरा सकते हैं, जब पूरी तरह टूट चुके हैं तब दुनिया में हमें कोई तोड़ नहीं सकता। दुनिया में कोई काम असंभव नहीं, बस हौसले और मेहनत की जरूरत है।

चौपाल: वोट की खातिर

बिहार विधानसभा चुनाव के लिए मतदान का काम पूरा हो चुका है। अब टीवी चैनलों पर नतीजों की भविष्यवाणी से लेकर प्रचार के दौरान नेताओं द्वारा किए गए वादों और दिए गए बयानों को लेकर चचार्एं जारी हैं।

चौपाल: नोटबंदी का दंश

नोटबंदी के फैसले ने भारत की अर्थव्यवस्था को लंबे समय के लिए बीमार कर दिया था। आज भी गरीब लोग सरकार के इस अपरिपक्व फैसले की मार झेलने को मजबूर हैं। नोटबंदी के वक्त सरकार ने पुराने नोटों की जगह नए नोट जारी करने के लिए भी कोई अग्रिम तैयारी नहीं की गई थी।

चौपाल: जागरूकता का सफर

देश की अर्थव्यवस्था के लगभग तीनों क्षेत्र आर्थिक मार का शिकार हो चुके हैं। सरकार का राहत पैकेज समाचारों के माध्यम से जनता को सुनने में जरूर आया, लेकिन उसके क्रियान्वयन की रफ्तार अभी तक देखने को नहीं मिली। सरकार को जरूरत है। जिस प्रकार राजनीतिक दल चुनावी ‘जनसंपर्क’ करते हैं, उसी तरह व्यापक रूप […]

चौपाल: लोकतंत्र के लिए

बिहार जैसे राज्य में चुनाव का गिरता प्रतिशत, बिहार की प्रत्यक्ष राजनीति आर्थिक-सामाजिक उन्नति के लिए बाधक सिद्ध हो सकती है। इसलिए बिहारवासियों को कोरोना से जरूरी सुरक्षा बरतते हुए अधिक से अधिक मतदान करना चाहिए

चौपाल: परस्पर जीवन

धरती की असली धरोहर है इसकी जैव विविधता। यह जैव विविधता ही धरती का चक्र चला रही है। वन, उपवन, बाग-बगीचे जो संसार में निर्मल जलवायु, तापमान संतुलन, साथ ही साथ खाद्य और जरूरी वस्तुओं का बंदोबस्त करता है। हिमालय, नदियां, पहाड़, पशु और पक्षी भी उतने ही जरूरी हैं।

चौपाल: चुनावी चकाचौंध

बिहार के लोगों को कोरोना का टीका मुफ्त में मिलेगा। तो फिर बाकी राज्यों का क्या? अगर बिहार विधानसभा चुनाव में भाजपा और जदयू की सरकार नहीं बनती तो क्या तब भी मुफ्त में बिहार की जनता को टीका मिलेगा?

चौपाल: गहराता अंधेरा

केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार आए दिनों निजीकरण पर ज्यादा जोर दे रही है। इसमें रेलवे, हवाईअड्डे, स्कूल, बिजली विभाग आदि क्षेत्र शामिल हैं। एक तरफ कोरोना महामारी के कारण लोगों के सामने रोजगार की समस्या उत्पन्न हो गई है, दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा बिजली विभाग का निजीकरण किया जा रहा है।

चौपाल: नशा और नाश

लोग कई रूपों में नशे को अपनाते हैं, जिनमें गुटखा भी एक नशा का ही एक रूप है। गुटखा धीरे-धीरे इंसान को मौत की तरफ भी ले जा सकता है।

चौपाल: पढ़ने की सीख

अगर बच्चों को लिखित सामग्री को पढ़ कर खुद की धारणाएं बनाने और वास्तविक जीवन से संबंध स्थापित करने के अवसर दिए जाएं तो ‘पढ़ना’ अधिक प्रभावशाली होगा।

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