Chaupal Opinion

चौपाल: वोट की खातिर

बिहार विधानसभा चुनाव के लिए मतदान का काम पूरा हो चुका है। अब टीवी चैनलों पर नतीजों की भविष्यवाणी से लेकर प्रचार के दौरान नेताओं द्वारा किए गए वादों और दिए गए बयानों को लेकर चचार्एं जारी हैं।

चौपाल: नोटबंदी का दंश

नोटबंदी के फैसले ने भारत की अर्थव्यवस्था को लंबे समय के लिए बीमार कर दिया था। आज भी गरीब लोग सरकार के इस अपरिपक्व फैसले की मार झेलने को मजबूर हैं। नोटबंदी के वक्त सरकार ने पुराने नोटों की जगह नए नोट जारी करने के लिए भी कोई अग्रिम तैयारी नहीं की गई थी।

चौपाल: जागरूकता का सफर

देश की अर्थव्यवस्था के लगभग तीनों क्षेत्र आर्थिक मार का शिकार हो चुके हैं। सरकार का राहत पैकेज समाचारों के माध्यम से जनता को सुनने में जरूर आया, लेकिन उसके क्रियान्वयन की रफ्तार अभी तक देखने को नहीं मिली। सरकार को जरूरत है। जिस प्रकार राजनीतिक दल चुनावी ‘जनसंपर्क’ करते हैं, उसी तरह व्यापक रूप […]

चौपाल: लोकतंत्र के लिए

बिहार जैसे राज्य में चुनाव का गिरता प्रतिशत, बिहार की प्रत्यक्ष राजनीति आर्थिक-सामाजिक उन्नति के लिए बाधक सिद्ध हो सकती है। इसलिए बिहारवासियों को कोरोना से जरूरी सुरक्षा बरतते हुए अधिक से अधिक मतदान करना चाहिए

चौपाल: परस्पर जीवन

धरती की असली धरोहर है इसकी जैव विविधता। यह जैव विविधता ही धरती का चक्र चला रही है। वन, उपवन, बाग-बगीचे जो संसार में निर्मल जलवायु, तापमान संतुलन, साथ ही साथ खाद्य और जरूरी वस्तुओं का बंदोबस्त करता है। हिमालय, नदियां, पहाड़, पशु और पक्षी भी उतने ही जरूरी हैं।

चौपाल: चुनावी चकाचौंध

बिहार के लोगों को कोरोना का टीका मुफ्त में मिलेगा। तो फिर बाकी राज्यों का क्या? अगर बिहार विधानसभा चुनाव में भाजपा और जदयू की सरकार नहीं बनती तो क्या तब भी मुफ्त में बिहार की जनता को टीका मिलेगा?

चौपाल: गहराता अंधेरा

केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार आए दिनों निजीकरण पर ज्यादा जोर दे रही है। इसमें रेलवे, हवाईअड्डे, स्कूल, बिजली विभाग आदि क्षेत्र शामिल हैं। एक तरफ कोरोना महामारी के कारण लोगों के सामने रोजगार की समस्या उत्पन्न हो गई है, दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा बिजली विभाग का निजीकरण किया जा रहा है।

चौपाल: नशा और नाश

लोग कई रूपों में नशे को अपनाते हैं, जिनमें गुटखा भी एक नशा का ही एक रूप है। गुटखा धीरे-धीरे इंसान को मौत की तरफ भी ले जा सकता है।

चौपाल: पढ़ने की सीख

अगर बच्चों को लिखित सामग्री को पढ़ कर खुद की धारणाएं बनाने और वास्तविक जीवन से संबंध स्थापित करने के अवसर दिए जाएं तो ‘पढ़ना’ अधिक प्रभावशाली होगा।

चौपाल: खौफ में बेटियां

हाथरस हो या गुरुग्राम, आजमगढ़ हो या जौनपुर, हर तरफ महिलाओं के लिए सिर्फ डर या भय का माहौल नजर आ रहा। ऐसे में आखिर कोई पिता और परिवार अपने बेटियों को शिक्षा और अन्य कार्य के लिए अकेला कैसे छोड़ेगा?

चौपाल: प्रदूषण का धुआं

पिछले साल सरकार के तरफ से यह आश्वासन भी दिया गया था कि अगर किसान अपने खेतों की पराली नहीं जलाते हैं तो उन्हें प्रति एकड़ एक हजार से ढाई हजार रुपए तक का मुआवजा दिया जाएगा। लेकिन क्या यह आश्वासन पूरा हुआ?

चौपाल: लोकतंत्र में प्रतिपक्ष

वर्तमान परिप्रेक्ष्य में स्वाभाविक रूप से करारी हार की हताशा से आहत प्रतिपक्ष अपना आत्मविश्वास न खो बैठे, यह चिंता किया जाना लोकतंत्र की सार्थकता के लिए अत्यंत आवश्यक है। निश्चित रूप से नया जनादेश राजनीति में नए दौर की जरूरत पर बल देता है।

चौपाल: कहां है चौकीदार

हैदराबाद विश्वविद्यालय के शोध के छात्र रोहित वेमुला, पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या दलितों की आवाज दबाने की साजिश ही है। देश में हर घंटे दलितों के साथ पांच अपराध हो रहे हैं और दूसरी ओर सबके साथ, सबका विकास का नारा देकर पाखंड किया जा रहा है।

चौपाल: व्यवस्था हुई राख

हाल में हाथरस की एक दलित ‘गुड़िया’ के साथ बर्बर अपराध हुआ, फिर बाद में उसकी जीभ काट दी जाती है ताकि सच्चाई हमेशा-हमेशा के लिए दफन हो जाए। चौदह-पंद्रह दिनों तक जिदंगी से जूझते-जूझते वह हार गई। आनन-फानन में सरकार प्रशासन की सहायता से उसकी लाश को जला दिया गया। उत्तर प्रदेश में सरकार राजनीतिक मंचों से रामराज्य की बात करती है।

चौपाल: आशंका के बीच

किसानों की एक बड़ी आशंका यह है कि आलू,प्याज, अनाज, दलहन, तिलहन को आवश्यक वस्तुओं की श्रेणी से हटा दिए जाने और इनके भंडारण पर लगी रोक को हटाने की नई प्रणाली एक तरफ संसाधनों से विहीन किसानों के लिए घाटे का सौदा बनेगी।

चौपाल: बाजार में किसान

किसान किसी भी देश और समाज की जान होता है। उसका नुकसान सबका नुकसान होगा।

चौपाल: प्रदूषण के सामने

कोरोना वायरस की मौजूदगी में वायु प्रदूषण से जंग और मुश्किल होगी। दिल्ली की तमाम प्रदूषण नियंत्रण संबंधित एजेंसियां पहले से तैयारी में लगी हैं।

चौपाल: धुएं की घुटन

आखिर क्या मिलता है लोगों को धुआं उड़ाने से और इसी धुएं में गुम होकर बेवजह खुद को मिटाने से। लोगों को पता है कि ये चीजें उनको अंदर से खोखला कर देती हैं, पर फिर भी पता नहीं क्यों, वे लत की हद तक जाकर सेवन करते है इन चीजों का, जो बेहद हानिकारक […]

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