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डॉ कफील खान ने खुद को बताया बेगुनाह, योगी सरकार बोली- प्राइवेट प्रैक्टिस के दोषी, अभी भी चल रही जांच

सरकार के मुताबिक, कफील खान पर दो आरोप साबित नहीं हो सके। पहला यह कि बच्चों की मौत के वक्त खान हॉस्पिटल में मौजूद थे, लेकिन उन्होंने अपने सीनियरों को ऑक्सीजन की कमी के बारे में सूचित नहीं किया। जांच में सामने आया कि 11 मई 2016 को डॉक्टर भूपेंद्र सिंह वार्ड 100 के इनचार्ज थे और खान ने तुरंत ही सीनियरों को ऑक्सीजन की कमी के बारे में सूचित किया था।

नाहक नौ महीने जेल में रहे गोरखपुर के डॉ. कफील खान, दो साल बाद जांच में हुए बरी

जांच रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि डॉ. खान न तो ऑक्सीजन सप्लाई की टेंडरिंग में शामिल थे, न ही उसके भुगतान या रख-रखाव के लिए जिम्मेदार थे। जांच कमेटी ने एक बड़ी बात कही है कि 10 से 12 अगस्त के बीच करीब 54 घंटों तक लिक्वि़ड ऑक्सीजन की सप्लाई की कमी थी।

झोलाछाप से दिखाते हैं, मरने लगते हैं तब सरकारी अस्पताल लाते हैं- बच्चों की मौत पर योगी के मंत्री का बयान

बच्चों की मौत का आंकड़े की तस्दीक खुद मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य ने की और कहा, ”पिछले साल जिला अस्पताल में कुल 1,955 मरीज आए थे, जिनमें से 48 मरीजों की मौत हुई थी। इस बार कुल 2155 मरीज आए, जिनमें से 48 की मौत हुई है। इस तरीके से हमने मृत्यु दर पर अंकुश लगाया है।”

सीएम योगी आदित्यनाथ पर डॉ कफील का पलटवार, बोले- मरने वाले बच्चों के घरवालों के साथ मत कीजिए राजनीति

सीएम योगी का मानना है कि उनकी अपनी कर्मभूमि गोरखपुर स्थित बाबा राघव दास मेडिकल कॉलेज में पिछले साल अगस्त में 24 घंटों के दौरान बड़ी संख्या में बच्चों के मारे जाने की घटना को वहां की ‘आंतरिक राजनीति‘ के कारण तूल मिली थी

BRD अस्पताल मामला: CM योगी बोले- ऑक्सीजन की कमी होती तो वेंटिलेटर वाले बच्चे पहले मरते

बीआरडी मेडिकल कॉलेज में पिछले साल अगस्त में ऑक्‍सीजन की कमी की वजह से 60 से ज्यादा मासूम बच्चों की मौत हो गई थी। हालांकि प्रशासन का कहना था कि बच्चों की मौत के पीछे और भी वजहें जिम्मेदार थीं।

बर्बाद हो गई है पिछले साल BRD मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल रहे डॉक्‍टर की जिंदगी, ‘कातिल’ कहते हैं सब

राजीव मिश्रा इस वक्त लिवर, हायपर टेंशन, नसों के फूलने, छाती में पानी आने जैसी कई बीमारियों से जूझ रहे हैं। पूर्णिमा उच्च रक्तचाप की समस्या से जूझ रही हैं। जेल में इन दोनों की हालत और भी खराब हो गई थी। पूर्णिमा जब भी बोलने की कोशिश करती हैं उनकी सांस टूटने लगती है।

इंसेफेलाइटिस से कितनी मौतें हुईं, पहले रोज बताता था गोरखपुर का BRD अस्‍पताल, अब नहीं

एक स्थानीय पत्रकार का कहना है कि यह कदम इन्सेफेलाइटिस से होने वाली मौतों के आंकड़ों को खबर बनने से रोकने के लिए उठाया गया है। सरकार इस कदम से मौत के आंकड़े छिपाकर खुद को शर्मिंदा होने से बचाना चाहती है।

अस्पताल में नाबालिग से रेप की कोशिश, बच्चों की मौत के बाद फिर सुर्खियों में गाेेरखपुर का BRD कॉलेज

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का शहर गोरखपुर एक बार फिर सुर्खियों में है। शहर के सबसे बड़े अस्पताल बीआरडी मेडिकल कॉलेज में नाबालिग लड़की से रेप की कोशिश की गई है। वी​आईपी जिलों में शुमार होने पर भी अपराध के 36 घंटे बाद भी पुलिस पीड़िता का मेडिकल नहीं करवा पाई है।

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